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शब्दों का महत्व

udyalkarai   50 views   10 months ago

एक उभरती लेखिका का निवेदन इस समाज के हर व्यक्ति से।

કાળા ના ધોળા

pravinakadkia   109 views   5 months ago

પૈસા કમાવા માટે ખોટો રસ્તો ન અપનાવવો એ સમજાવતી એક વાર્તા.

मैं_भिखारी_हूँ‬…

dhirajjha123   14 views   1 year ago

जो मैं लिखने जा रहा हूँ वो वही पढ़ें जिन्हे शब्द पीड़ा महसूस करनी आती है…

इंसानी भेदभाव व दुश्मनी… जिम्मेदार शायद हम खुद||

Mona Kapoor   25 views   4 months ago

समाज में आपसी सहयोग व एकता को बढ़ावा देने के लिए पहला सहयोग हमारा स्वयम का ही होना चाहिए ।

પ્રેમની સૌરભ

falguniparikh   211 views   5 months ago

વેલેન્ટાઈડ દે ને અલગ રીતે ઉજવવાનો આનંદ કેવો હોય તે સમજાવતી વાર્તા

वंशवृद्धि ..... एक पहल !

nehabhardwaj123   92 views   7 months ago

ये कहानी है रश्मि की हो अपनी गर्भावस्था में बेटे और बेटी के फेर में उलझी है, पर उसके पति का साथ मिलने पर, कैसे वो ...... अपनी सास की मानसिकता को बदलने में सक्षम हो पाती है।

माँ मुझे आना है .....

nehabhardwaj123   21 views   7 months ago

एक अजन्मी बच्ची की भावनाएं , जिसे एक लड़की होने के कारण जन्म नहीं लेने दिया गया ....।

कौन आज़ाद है?

sidd2812   29 views   8 months ago

वो लाहौर से भागा तो अमृतसर में जा फंसा, उसपर बेटी के साथ बलात्कार का आरोप था। और वो अपनी बेटी से मिलने के लिए बेताब हुआ जा रहा था।

झूठी कहानी

dhirajjha123   19 views   1 year ago

यह महज़ कहानी ही है मैं सच भी कहूँगा तब पर भी कहानी ही रहेगी । पर इस कहानी पर ऊँगली ना उठाऐं क्योंकी सच में तो ये प्रेम मरता जा रहा है कम से कम कहानियों में तो अल्लाह और महादेव का प्रेम बना रहे

वो चाय आज भी ड्यू है. (स्मृति शेष)

rgsverma   260 views   8 months ago

मैं अवाक रह गया पर उन्होंने आगे बताया कि , "इंटरव्यू उनका लिया जाता है जिनसे हम अपरिचित हों, न मेरी तुमसे कोई रिश्तेदारी है, न कोई व्यक्तिगत परिचय, पर तुम गज़ब लिखते हो, दिल से लिखते हो, सो भूल जाओ कि मैंने तुम पर कोई अहसान किया है. चयन तो तुम्हारा ही होना था, ..." मैं नि:शब्द हो गया.

फैसला

abhi92dutta   127 views   6 months ago

इंसान और कुत्ते की दोस्ती को सलाम। क्या था वो फैसला

“…और मैं अनूप जलोटा का सहपाठी भी था।”

Mohit Trendster   210 views   4 months ago

नशे से नज़र ना हटवा सके… उन ज़ख्मों पर खाली वक़्त में हँस लेता हूँ, मुफ़लिसी पर चंद तंज कस देता हूँ… बरसों से एक नाव पर सवार हूँ, शोर ज़्यादा करती है दुनिया जब… उसकी ओट में सर रख सोता हूँ।

" एक उलझी सी पहेली "

Neha Neh   178 views   7 months ago

एक खूबसूरत सी कहानी जो जरूर आपको कुछ सीखा कर जायेगी।

पिता के रंग

dhirajjha123   10 views   11 months ago

पिता उस छेनी और हथौड़े की तरह होते हैं जो खुद के चेहरे की उदासी छुपा कर चोट करते हैं , इतनी चोट जो तुम जैसे पत्थर को नायाब मूर्ती में तराश दे |

इंसानी जिद में दफन हो गए पेड़

harish999   22 views   10 months ago

आज महानगरों में सांस लेने के लिए शुद्ध हवा तक मयस्सर नहीं है, कंक्रीट के जंगलों के लिए पेड़ों को दफन करके हाउसिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी और हाइवे के चौड़ीकरण के लिए पेड़ों को कटान के चलते पर्यावरण संतुलन गड़बड़ा गया है