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वो चाय आज भी ड्यू है. (स्मृति शेष)

rgsverma   225 views   5 months ago

मैं अवाक रह गया पर उन्होंने आगे बताया कि , "इंटरव्यू उनका लिया जाता है जिनसे हम अपरिचित हों, न मेरी तुमसे कोई रिश्तेदारी है, न कोई व्यक्तिगत परिचय, पर तुम गज़ब लिखते हो, दिल से लिखते हो, सो भूल जाओ कि मैंने तुम पर कोई अहसान किया है. चयन तो तुम्हारा ही होना था, ..." मैं नि:शब्द हो गया.

आसमान बोलता है !

sunilakash   11 views   6 months ago

विश्वास है इंसान का, जो विपदाओं मॆं डोलता है।

......इंतजार करना

rashmi   24 views   6 months ago

किसी को खामोश़ या बेबस समझ अक्सर लोग उसका फायदा उठाकर चले जाते है या बार बार उसे परेशान करते है जैसे कि वो कुछ प्रतिक्रिया कभी देगा ही नहीं. एेसी ही परिस्थिति में उस बेबस के मन के भाव जब उसकी खामोशी टूटने को तैयार हो जाती है.

ग़ज़ल-"बेकार की बातें न कर..."

sunilakash   19 views   6 months ago

व्यवस्था में विष घोलकर, उद्धार की बातें न कर।

बौड़मसिंह मर गया

sidd2812   53 views   6 months ago

बौड़म जलेबी खाने से मर गया? वाकई?

रूपया बोलता है

rashmi   8 views   6 months ago

धन की अधिकता और दुरूपयोग पर रूपये की ओर से इंसान को समझाने की कोशिश

A lesson from the Mute

Alankrita Tiwari   14 views   6 months ago

This article talks about the baseless divisons our society has been segregated into. A division that is purely man-made.

Silent Cries

troubleseeker11   3 views   6 months ago

This poem is an attempt to spread awareness about the atrocities faced by women in this modern age.

"thin strings left me paralysed"

Shreya Dubey   9 views   6 months ago

This is a fiction story which will surely increase your heartbeat.

मेरा देश बदल रहा है....

Shyam Tiwary   8 views   7 months ago

मेरा देश बदल रहा है मेरी खुद की नजरिया है.... मैंने खुद आंखों से देख रहा हूं जो चीज तारीफ के काबिल होती है उनकी तारीफ करनी चाहिए....

भूखें मरते हम

utkrishtshukla   54 views   7 months ago

दुनिया भर में जितना भोजन बनता है, उसका एक तिहाई भोजन बर्बाद हो जाता है।

शब्दों का महत्व

udyalkarai   24 views   7 months ago

एक उभरती लेखिका का निवेदन इस समाज के हर व्यक्ति से।

उसे पढ़ना है

poojaomdhoundiyal   11 views   7 months ago

जहाँ हम शिक्षा में अंकों और प्रतिस्पर्धा की बहस में लगे हुए हैं वहीँ कुछ मासूम ऐसे भी हैं जो पढ़ना चाहते हुए भी नहीं पढ़ पा रहे हैं। शिक्षा ही एकमात्र ऐसा अचूक बाण है जो हर बुराई हर नफरत हर भ्रष्टाचार, आतंकवाद ,हर असमानता , हिंसा या अमानवता को समाप्त कर सकती है।

उलटी चप्पलें

sidd2812   40 views   7 months ago

मुसीबत घने कोहरे सी थी। चारों ओर नक्सलियों से घिरा एक पुलिस थाना, जिसमें इंचार्ज से लेकर सिपाही तक सब नई भर्ती। पिछले सारे पुलिसिए एक नक्सली हमले में ख़त्म हो चुके थे। सिवाए एक हवलदार के।

बहनजी टाइप

swa   57 views   7 months ago

8 दिन हो गये । सृष्टि जिद पकड़कर बैठी है । नौकरी करेगी। आख़िर उसकी डिग्री किस काम की है ? सिर्फ घर संभालती रहेगी? आखिर वो गोल्ड मेडलिस्ट है। ऋषभ बताओ मैं क्यों नहीं कर पाऊंगी नौकरी? कितनी लड़कियां करती है। तुम्हें क्या लगता है? मैं नौकरी और घर मैनेज नहीं कर सकती?