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@dawriter

an ode to sachin tendulkar

2 15       
khyati by  
khyati

सदियों में एक पैदा होता है,

धरती का मान बढ़ाने को।

जो क्रिकेट का "भगवान" बन जाये,

ऐसा अद्भुत संयोग कभी कभी होता है।

 

सड़क की धूल से खेलकर,

गलियों को रोशन करता है।

ऐसा अद्भुत संयोग कभी कभी होता है।

 

जिसकी मूरत बनाये ईश्वर,

वही उसका पर्याय बन जाता है।

ऐसा अद्भुत संयोग कभी कभी होता है।

 

जो सफलता के झंडे गाड़े तो सही,

पर विनम्रता से झुककर अभिवादन करे तो कभी,

उसका ये अंदाज़ दिल को पूरा सुकून देता है।

ऐसा अद्भुत संयोग कभी कभी होता है।

 

जो छोटे कद को मात देकर,

महान स्वरुप की रचना करे,

और फिर दिल से जिए।

देख उसे, स्नेह उमड़ता है,

ऐसा अद्भुत संयोग कभी कभी होता है।

 

जो जाए तो आये आँसूं,

श्रद्धा के, आदर से भरे।

इस कुटिल दुनिया में,

इतना सम्मान जो पा ले,

ऐसा अद्भुत संयोग कभी कभी होता है।

 

जीत का गुमान न हो,

हार की हताशा न हो,

हर वक़्त को संभाल ले,

देश की हर धड़कन को थाम ले,

ऐसा अद्भुत संयोग कभी कभी होता है।

 

जिसने भारत माता का शीश उठाया,

स्वयं को नतमस्तक करके,

"महान" का तमगा पाया,

वो सदी पुरुष सचिन तेंदुलकर कहलाया।

 

सादगी जिसने ओढ़कर,

भारत को शान का चोंगा पहनाया,

हर घर में अपने को,

लोगों के बीच पहुंचाया,

कर्मों से खुद को उठाया,

ऐसे चमत्कार को मैंने,

कोटि कोटि शीश झुकाया।

 

आमची बम्बई हो या सूरमा भोपाली,

सब के बीच वो अद्भुत संयोग सचिन दादा कहलाया।



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