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@dawriter

"डर"

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dhirajjha123 by  
Dhiraj Jha

”डर” 
क्या तुम जानते हो 

सबसे बहादुर होता है ये डर 

हाँ मैं सच कह रहा हूँ 

ये डर सबसे बहादुर है 

क्योंकि इसे लड़ना आता है

अपनी परिस्थितियों से 

इसे पता है कि ये कमज़ोर है

फिर भी लड़ता है 

और तब तक लड़ता है 

जब तक ये अपने आगे के 

‘नि’ को नहीं पा लेता 

अगर डर बहादुर ना होता 

तो शायद यहाँ कमज़ोर 

ज़िंदा ही ना रह पाते 

एक चूहे का डर 

बिल्ली के आगे कमज़ोर है 

एक बिल्ली का डर कुत्ते के आगे 

और कुत्ते का डर डन्डा लिए 

पहरेदार के आगे कमज़ोर है 

मगर फिर भी ये देते हैं 

बार बार चुनौतियाँ 

और बार बार लड़ते हैं 

और तब तक लड़ते हैं 

जब तक ये नि को पा कर 

निडर नहीं हो जाते 

डर तुम्हें ताक़त देता है 

बस तुम्हें पता होना चाहिए कि 

इसे ताक़त बनाना कैसे है 

तुम डरो बार बार डरो 

और डरते डरते एक दिन 

ऊब जाओ इस डर से 

तब तुम अपने अंदर 

एक अलग उत्साह पाओगे 

डर को पालो संभालो 

और एक दिन हथियार बना लो 

फिर विजय निश्चित है 

निडरता के लिए डर का होना 

उतना ही ज़रूरी है जितना 

रौशनी के लिए अंधकार 

कमज़ोरी की ताक़त को समझो 

फिर कभी कमज़ोर नहीं रहोगे 
धीरज झा



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