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@dawriter

सेक्स एजुकेशन

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सेक्स एजुकेशन
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"क्या बकवास है ये, दिमाग खराब हो गया स्कूलों का"
भुनभुनाती हुई मालती बोल उठी।
"क्या हुआ "
"अरे स्कूल के ड्रामे देख लो "
"ठीक से बताना है कुछ या मै जाऊं"
"कुछ बच्चों पर भी ध्यान दे दिया करो, हमेशा बचते हो।
स्कूल में सेक्स एजुकेशन अनिवार्य कर दी है। ये क्या बात हुई एक आठवीं कक्षा के बच्चे का मस्तिष्क इतना डवलप नहीं होता जो ये सब समझ सके"
"अरी भाग्यवान ये सब स्कूलों में जरूरी की गयी है और ये जरूरी भी है"
"क्या जरूरी है, हम नहीं पढ़े क्या पहले जरूरी नहीं था क्या, बकवास है बिल्कुल।"
"तो क्या ये समय पहले जैसा है एजूकेशन रहन-सहन, खान-पान हर जगह बदलाव है। बच्चे जैसा देख रहे हैं और समझ रहे हैं उनके लिए यह होना जरुरी है, नही तो तुम हर बात उन्हें समझाओ ।"
"बैठो यहां समझाता हुँ ।
देखो किशोरावस्था में शारीरिक परीवर्तन के साथ ही मानसिक परिवर्तन भी होता ,बच्चे अपने शारीरिक परिवर्तन के प्रति कई बार घबरा जाते है ।
अब लड़कियों के माहवारी के पहले अनुभव को देखो वो समझ नहीं पाती, सही तरीकों से समझाना और प्रजनन संबंधित जानकारी दोनों ही बच्चों को चाहे लड़का हो चाहे लड़की देना जरूरी है।"
जबकि ये बेहद जरुरी होने पर भी स्कूल उदासीन है।
शादी से पहले यौन संबंध और गर्भावस्था के खतरे, पारिवारिक संस्कृति और सामाजिक मूल्यों को इसमें शामिल किया गया है लेकिन इस शिक्षा को हिकारत की नजरों से देखा जा रहा है जबकि अतिआवश्यक है ये।"
"वैसे भी ज्यादा कुछ नहीं बस जरूरी बातें ही पाठ्यक्रम में ली गई हैं।"
"किशोरावस्था में इंटरनेट और सोशल साइट्स पर गंदगी देख कर अपने मस्तिष्क को विकृत करें उससे अच्छा है हम अपनी जिम्मेदारी समझे"

"सही कह रहे है आप, मै ही समझ नहीं पायी और नेगेटिव ले रही थी, अपनी जिम्मेदारी हमें समझनी चाहिए।"

दिव्या राकेश शर्मा
देहरादून
उत्तराखंड
२२-०१-१८

Image Source: everylifecounts



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