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@dawriter

हसरत

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"निधि, जल्दी करो यार ट्रेन 6 बजे की है, पता चले बेटिकिट हो जायें।"
"कमिंग जानू, ओनली टू मिनिट।"
"तुम औरतें भी न........" भुनभुनाता हुआ रवि अरिस्टोक्रेट के दो बड़े बड़े बैग ड्राइवर की मदद से कैब में रख रहा था।
"रेडी".....कहते हुये निधि भी आ गई।
 
ब्लू टॉप और व्हाइट ट्राउजर और हाई बन से निकल कर जो जुल्फें गोरे गलों पर लहरा रहीं थी उनमें निधि बहुत सुंदर लग रही थी, उसके इसी लुक पर रवि फ्लैट हो हो जाता, बिना तारीफ किये रह ही न पाता, पर जब आज कुछ न कहा तो निधि ने ही पूछ लिया, "कैसी लग रही हूँ?" 
"ठीक",  बिना नजरें मिलाये ही रवि बोला।
"और इस बैग मे पत्थर भरे हैं क्या जो दो दो लोगों के उठाये नही उठ रहा।"
"ऊहुँ ...रवि शादी के बाद फर्स्ट टाइम ससुराल जा रही हूँ, वो भी पूरे 15 दिन के लिये, आखिर मेरी एकलौती ननद की शादी है, लगेज तो ज्यादा ही होगा न।"
"ज्यादा.... पर इतना ।"
 
"मैं कोई मर्द थोड़ी न हूँ, जो सेविंग किट और एक जोड़ी कपड़े में चल दूँ और अपनी ब्यूटी भी तो मैनेज करना पड़ेगी न हनी, निधि ने लगभग रवि को छेड़ते हुये कहा और कैब मे बैठ गयी।"
 
अब तक रवि डिक्की बन्द करवा कर उसके बगल में आ के बैठ गया और मोबाइल चैक करने लगा।
यू नो रवि आई एम वैरी एक्साइटेड।"
"हूँ..."
"व्हाट हैप्पन बेबी आर यू अपसेट?"
"नहीं भाई।"
" टैल मी जानू, आई कैन फील योर इरिटेशन।"
अपनी लहराती जुल्फें कान के पीछे करती हुई बोली।
 "अरे, एट लीस्ट टॉप की जगह कुर्ती ही पहन लेती, लखनऊ वाली बुआ, ताई जीऔर कन्नौज वाली मौसी तो आ भी गयीं हैं गाँव।"
"रवि मुझे ये कम्फर्टेबल लगा और फिर हम रात में पहुँचेगे सिर्फ माँजी ही जागी हुईं मिलेगी, और जब मुंबई आई थी तो वो मुझे ऐसे देख चुकी हैं...।"
"ह्म्म्म"
 
साढ़े बारह बजे रवि और निधि बिल्हौर पहुँचे, कोई साधन ढूढ़ ही रहे थे कि गांव के ही लड़के सुभाष और दिलीप आते दिखे, आकर रवि के पैर छुये और निधि को देखा और हाथ मिलाने के लिये आगे कर दिया,लेकिन निधि ने दोनों हाथ जोड़कर नमस्ते किया।
 
अब निधि समझ रही थी कि, शायद रवि ने ठीक ही सोचा था "जैसा देश वैसा वेश" होना चहिये।
 
घर पहुँचे तो देखा माँ के साथ राखी भी जागी हुई है अपने भाई-भावज के इंतजार मे, देखते ही दौड़ी तो माँ ने टोका, "अरे रुक तो सही, पहले बहुरिया का पानी तो उतारने दे, गली घाट चल के आई है।"
कहते हुये बड़े से काँसे के लोटे से पानी ले लेकर तीन बार ऊपर से उतारा और कहा कि,"अब आवा।"
पास ही खड़ी राखी को निधि ने गले से लगाया और चूमती हुई बोली, "क्या बात है बड़ी निखर गयी हो।"
"क्या भाभी आते ही छेड़ना शुरू, जाओ आपसे बात नहीं करती।"
तभी माँ बोली, "अरी ओ बात करने वाली पहले जाकर भाई भौजाई के लिये कुछु पानी और मिठाई वगैरह लेकर तो आ बातें बाद में कर लेना बेशऊर कहीं की।"
"नहीं माँ कानपुर में ही खाना खाया है।" रवि सैंडिल उतारते हुये बोला।
"हाँ माँ जी" कहते हुये निधि जैसे ही पैर छुये, रेवती (सासोमाँ)'सदा सुहागन रहो' कहकर बलैयां लेने लगी।
 
"जाओ अटारी पर, वहीं पर सुभाष और दिलीप से तुम्हारे झोला रखवा दिये हैं।"
पर पता नही क्यों, निधि को लग रहा था कि माँ जी कुछ कहना चाह रही रही हैं पर कह नहीं पा रहीं।
 
खैर निधि तो 5:30 का अलार्म लगा कर सो गई, पर रवि अपने आपको मानसिक रूप से तैयार कर रहा था, अगले पन्द्रह दिन तक ताने सुनने के लिये जो उसे, अपनी मर्जी से....पढ़ी लिखी.....मुँहफट......जींस पहनने वाली लड़की से शादी करने के लिये मिलने वाले थे। सोचते सोचते कब नींद आई पता ही ना चला।
 
खिलखिलाने की दबी हुई आवाजों से रवि की नींद खुली, अधखुली आँखो से देखा कि निधि और राखी थे।
"बापरे! भाभी इतना सामान...इतना मेकप तो हम चार साल में चुका पायेंगे। 
अरे वाह!और ये लहँगा आपको कैसे पता कि हमे चम्पई रंग बहुतै पसंद है।"
"अच्छा सुन अब जा और इस मैरून अटैची में सब सामान जमा ले।
और जो साड़ियां माँ ने खरीदी हैं न वो भी,फिर दोपहर में मैचिंग चूड़ियां ले कर आयेंगे ठीक, अब जा।
 
"मेरी प्यारी भाभी" कहती हुई राखी निधि के गालों को चूमती हुई चली गई।
और जैसे ही निधि रवि की ओर पलटी....वह तो मुँह बाये उसे देखते ही रह गया।
पीली बनारसी साड़ी लाल और सुनहरे गोटे वाली, अगल-बगल पाटला लगी एक एक दर्जन चूड़ियां, माँग में आधा अंगुल कत्थई लिक्विड की जगह सुर्ख सिंदूर से बनी लम्बी रेखा,गले में सिकड़ी के साथ मंगलसूत्र भी और हद हो गई पैरों मे तीन तीन बिछिया भी.....गजब।
 
"व्हाट हैप्पन बेबी"  कहकर जब निधि ने उसका मुँह बन्द किया तो पहले तो वह झेंप गया फिर बोला, "अनविलिवेवल यार, यू आर लुकिंग गॉर्जियस लेकिन ये सब माँ....."
 
"नथिंग यार, कहते हैं न पचिया बच्चे नही देखते सो एक दो बार पहन कर यहीं छोड़ दूँगी, आफ्टर आल तुम्हारा अंश जो आने वाला है।" कहकर रवि के गले लग गई।
"और ये सिंगार?आई नो यार माँ ने कहा होगा प्लीज डोंट माइंड माँ की हसरत थी कि....... "
 
बीच मे ही उसके मुँह पर उँगली रखती हुई निधि बोली, "ये मेरी हसरत थी कि मैं ऐसे रहूँ, लेकिन मुंबई की फ़ास्ट लाइफ में ये पॉसिबल नही है, तो मैं यहाँ रहकर अपनी हसरत जी भर कर पूरी करुँगी।"
प्यार से देखते हुये रवि ने उसे गले से लगाया और उसके माथे पर......
माँ के बुलाने पर जब दोनों जोड़ी से निकले और सभी रिश्तेदारों के पैर छू कर आशीर्वाद ले रहे थे,
 
तब रवि की माँ बड़ी हसरत भरी नजर से अपनी पूरी हो चुकी हसरत को निहार रहीं थी और मन ही मन आशीष दे रहीं थीं, "दूधों नहाओ ,पूतों फलो " वाला
जो फलीभूत होने जा रहा था।


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