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@dawriter

रूपया बोलता है

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"रूपया"

कभी रंजिशें मेरी वज़ह से

कि भाई-भाई ही दुश्मन....!

कभी दहेज में सजकर चला

कि जहर ही बन जाता हूँ....!

तिजोरियाँ जहाँ भरी पड़ी और

दान नहीं कभी दिया हो,

चोरों के हाथों जाकर...

ह्रदयघात भी करता हूँ.....!

कंजूस सेठों को बीमारियाँ देकर 

दवाईयों का मोल भी बनता हूँ.....!

धन के लालचियों को 

नशें में भी डूबा देता हूँ....!

मेरी अति से कभी मन बिगड़ते,

कभी मेरे हाथों तन भी बिकते......

गलत हाथों जहाँ भी गया

काम तमाम मैं करता हूँ......!

 

हाँ मैं "रूपया"हूँ...

हर जगह बोलता हूँ....!

जहाँ मेरी अति हुई और धर्म की क्षति हुई...

पलटवार भी करता हूँ...!

मैं रूपया हूँ ,बहुत बोलता हूँ.....!!

 

सुनो ऐ इंसान!

इंसानियत को भूलाकर यूं तुम

धन के पीछे पागल ना बनो....

पहला पाठ प्रेम का पढ़कर, 

धर्म की राह पर आगे बढ़ो...,

मैं खुद पीछो आऊंगा...

रूपया हूँ...सदा साथ निभाऊंगा....!! 

#रश्मि



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