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@dawriter

मैं_भिखारी_हूँ‬…

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dhirajjha123 by  
Dhiraj Jha

मुझे डर लगता है कभी कभी ये सोच कर की मुझे अब मोक्ष नही मिलेगा मैं नर्क भोगूंगा | क्योंकी मैने भूख की आग में वो सारी नियम जला दिये जो लगाये गये थे मोक्ष को पार करने के लिये | मैं भूखा रहा , मेरी अंतड़ियाँ मरोड़ खाती रहीं , मैं अपाहिज था कुछ काम नही कर पाया मैंने तब जूठा खाया, कुत्तों का खाना चुराया , मैने झूठ बोल कर भीख माँगी , मैने खुद से खुद को घीव दिये फिर उन्हे रोज़ छीलता रहा ताकी लाग तरस खायें मेरे घावों को देख कर कुछ दे दें जो मैं अपना पेट भर सकूं |
कितना बुरा हूं मैं मगर पेट के हाथों मजबूर था | तड़पा बिलखा टूटा तब सारे नियम तोड़ दिये |

मैं जन्म से शायद हिन्दू था पर मैने अपना धर्म भ्रष्ट कर लिया चन्द रोटी के टुकड़ों में बेच दिया खुद को उन मुस्लिमों के हाथों जो मुझ पर दया कर के मुझे कुछ खाने को दे देते | उन मुस्लिमों के हाथों जो गाय का गोश्त खाते हैं |

शायद मुझे नर्क में बुरी तरह जलाया जाये इस पाप के लिये पर इसका डर नही क्योंकी बचपन से मैं जिस भूख की आग में जला हूं उसके आगे हर तरह की आग ठन्डी ही लगेगी | मैं भिखारी हूं जिसने नर्क से बड़ा नर्क यहीं ज़िंदा रहते हुये भोगा है |



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