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@dawriter

पढ़ी लिखी घरेलू बहू !!

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सुनीता जी, आज कुछ ज़्यादा ही थकी हुई सी थी। अब बस बहू आ जाये तो चैन की सांस लूं, कहते कहते बैठ गयी। अब और हिम्मत नहीं है कुछ करने की। उसके आते ही चाबी, उसके हाथ में सौंप कर कहूंगी, लो भाई ! संभालो अपना घर बार मैं तो पार पा गयी हूँ इन सबसे, छोटे की शादी में तो अभी बहुत समय है, सोचते सोचते उन्हें कुछ ख्याल आया कि शांता मौसी को कहूँ फिर से ?? आज सुबह ही तो उन्होंने रोहन को कहा भी तो उसने फिर से कह कर टाल दिया " अभी नही माँ " अरे ! अभी नही, तो कब ...? 28 का हो गया है, दो साल बाद तो प्रौढ़ावस्था में चला जायेगा । कौन अपनी बेटी देगा तुझे .....??? " आप पहले स्नेह का देख लो न वो भी तो अब 24 की हो गयी "।

जल्दी से उन्होंने अपने हाथ पोंछे और शांता मौसी को फ़ोन करने बैठ गयी। मौसी ! आपको मैने रोहन और स्नेह के लिए कहा था न ...… कोई बात बनी क्या ....?? उधर से आवाज़ आयी बहू " तू चिंता न कर शाम को आती हूँ मैं "। कहकर उन्होंने फोन रख दिया। शाम को तकरीबन 5 बजे डोर बेल बजी। घर मे कोई और था ही नहीं, तो सुनीता जी ने ही दरवाजा खोला। अरे मौसी ! आ गयी आप ..... " हां बहू ! आ तो गयी, जरा ठंडा सा पानी तो ला ", हां अभी लायी, कहकर सुनीता जी पानी ले आयी। " हाँ .....! तो बताइए मौसी क्या लेंगी चाय या ठंडा " कहकर मौसी के साथ सोफे पर ही बैठ गयी देख बहू ! मैं तो बस मिठाई खाऊँगी, शादी की ! वो भी एक नहीं ...... दो दो ।

हाँ .....हाँ ..... मौसी ! उसके लिए रिश्ते भी तो चाहिए, आप बताइए मिला कुछ ?? मिला तो ..... देख बहू ! ये है ...... कुछ लड़को के, ये देख पहले। इनमे बस दिक्कत ये है कि सब घर परिवार वाले हैं। मतलब भरा पूरा परिवार और नौकरी भी उसी शहर में, तो जो तू चाहे, वो न हो पायेगा इनमे। मतलब रहना तो परिवार में ही पड़ेगा। लेकिन लड़के सारे हीरा हैं...... हीरा ! अब बाकी तू देख ले।

देखो..... मौसी ! साफ सी बात है, अभी तो शादी कर के रह लेगी साथ में। फिर धीरे धीरे कुछ न कुछ खटपट का बहाना कर के अलग हो जाएगी और फिर मैं उसे शादी में हर चीज देंने को तैयार हूँ। आखिर कब तक निभाएगी साथ, साल छह महीने में तो अलग हो ही जाएगी। तो इसके लिए मैं उसे सारा सामान दूंगी...... LED, fridge, मशीन, फर्नीचर, बेड, सोफ़ा, AC और गाड़ी भी। कल को उसे किसी चीज के लिए किसी का मुंह न ताकना पड़े। बस यही चाहती हूं। देखना ..... उनका मुँह न भर दिया पैसे से ...... तो कहना। बाकी ..... मैंने अपनी बेटी को पढ़ाया, लिखाया ...... काबिल बनाया। इसीलिए थोड़ी न ......! कि वो बस चूल्हे चौके में घुसी रहे। अरे ! जानती हूं ..... परिवार में रहने का मतलब क्या होता है.....? बस नौकरानी, बना कर रख दी जाएगी। जब तक कमाएगी नहीं ...... तो, घर मे भी मान सम्मान नहीं मिलेगा। हाँ समझ गयी, मैं देखूंगी और कोई, इस लायक .....।

हाँ ! ले ये रोहन के लिए, लायी हूँ कुछ तस्वीरे। उनके पीछे ही लड़कियों की पढ़ाई भी लिखी है। मुझे तो समझ न आई बहू तू ही देख ले, कहकर मौसी ने कुछ फ़ोटो सुनीता जी को थमा दी, एक एक फोटो सुनीता जी देखती जा रही थी और मौसी से उसके घर परिवार के बारे में पूछती जा रही थी। अचानक एक लड़की की फ़ोटो देख कर सुनीता जी की नज़रे उस पर ही ठहर गयी। इसके बारे में बताओ कुछ ...... मौसी ! मुझे तो ये बहूत पसंद है। " इसके बारे में क्या कहूँ ......???? बहू ! ये तो बेचारी बड़ी अभागिन है, 3 साल पहले ही पिता का साया सर से उठ गया। 4 -4 बहने हैं, सब की सब एक से बढ़कर एक। दो बहनों की शादी हो गयी और अब ये दो बची हैं।

एक ये है इसने M. A. कर रखी है, अब स्कूल में पढ़ावे है और बहन इसकी B.A . करे है। वो ट्यूशन पढ़ावे है बच्चों को, घर की हालत तो सही ना है बहू इसके, लेन देन भी न कर पावेंगे और मुझे तो लगे है कि बारात की खातिरदारी भी न कर पावेंगे "। उसकी कोई बात नहीं है, मौसी !. सुनीता जी ने कहना शुरू किया, बस मेरी एक ही शर्त है कि लड़की नौकरी नहीं करेगी। बाकी सब मैं खुद करूंगी। शादी के कपड़ो से लेकर उसके जेवर, बारात की खातिरदारी सब कुछ, बस मेरी एक ही शर्त है वो नौकरी नहीं करेगी।

ये बहूएँ ! जब नौकरी करने लगती हैं न तो घर का ध्यान ही नहीं रखती, घर तो उन्हें फिर काटने को दौड़ता है और देखो मौसी हम जन ही कितने हैं ?? ले दे कर चार। उसके आने के बाद 5 हो जाएंगे। बाकी मेहमान हमारे यहाँ ज्यादा आते नहीं। महीने में दो चार लोग आ जाते हैं गांव से, या मेरी और इनकी बहने बस। मौसी, तुम तो जानती हो सारी उम्र हो गयी मेरी इसी घर गृहस्थी में,बस अब तो स्नेह और रोहन की शादी करके, सब उसे सौंप कर निश्चिंत होना चाहती हूं। आप उनसे बात करके बताओ वैसे तो उनके लिए घर बैठे साक्षात भगवान मिलने जैसा है। मैं शाम को रोहन को फ़ोटो दिखा कर पूछती हूँ ।। " अच्छा ! चल बहू मैं भी चलूं देखूं क्या हो सके है " कहकर मौसी जाने लगी ।

अब मौसी सोचने पर मजबूर थी कि बहू नौकरी न करेगी, काहे की वो गरीब है ?? कुछ लेन देन न कर सके? अरे पढ़ी लिखी तो है ना पर बेटी घर न रहवेगी ...... काहे ......???? कि उसके दहेज में घर भर जावेगा । हे राम ।।

© नेहा भारद्वाज



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