21
Share




@dawriter

परवरिश

0 1.18K       

घर आते ही मयंक अपनी दिदी स्नेहा को आवाज़ लगाते हुए बोला- दिदी पानी लाओ एक ग्लास।
स्नेहा पानी ला ही रही थी कि उसे रोकते हुए उसकी माँ अंकिता ने मयंक से कहा- बड़ो से पानी मांगना गलत है बेटे। उठो और खुद पानी लेकर पियो।

मयंक बोला- मैंने तो देखा है मेरे सब दोस्त और कजिन भी अपनी दिदी से पानी मांगते है।
इससे पहले की अंकिता कुछ कहती उसके पति राजेश ने मयंक को समझाते हुए कहा- बेटे माँ ठीक कह रही है। जो गलत करते है उन्हें करने दो, लेकिन हमारा मयंक तो अच्छा बच्चा है, वो सबकी देखादेखी गलत चीज क्यों सीखे। अच्छा इंसान वो होता है जो हरसंभव अपना काम खुद करे।
मयंक सहमति में सर हिलाता हुआ पानी पीने रसोई में चला गया।

रविवार का दिन था। इस दिन रसोई संभालने की जिम्मेदारी राजेश की होती थी और बाजार से खरीददारी करने की जिम्मेदारी अंकिता की जिसमें अब स्नेहा भी हाथ बँटाती थी।
मयंक को आवाज़ देते हुए राजेश ने कहा- बेटे आओ आज तुम भी पापा का हाथ बँटाओ और कुछ सीखो।
मयंक बोला- लेकिन पापा, मैंने तो किसी के पापा को ये सब करते नहीं देखा। ये तो माँ का काम है। दादाजी भी तो कभी दादीजी का काम नहीं करते।
राजेश ने कहा- बेटे पुराने जमाने में सब लोग चाहे लड़का हो या लड़की घर पर ही रहते थे उन्हें घर से दूर जाकर पढ़ने या काम करने की जरूरत नहीं होती थी, इसलिए हम पुरुष घर के कामों से और स्त्रियां बाहर के कामों से दूर रहती थी।
लेकिन अब देखो वक्त बदल गया है। तुम्हारे पापा ने घर से दूर दूसरे शहर जाकर पढ़ाई की, थोड़े दिनों में तुम्हारी दिदी भी बाहर पढ़ने जाएगी।
तो ऐसे में दिदी को बाहर के सब काम जैसे बाजार से सामान लाना, बैंक का काम करना आना चाहिए ना ताकि उसे दिक्कत न हो और उसी तरह तुम्हें अपने सब काम खुद करने की आदत होनी चाहिए और खाना बनाना भी आना चाहिए ताकि कभी अकेले रहो आस-पास अच्छा खाना न मिले तो तुम्हें भूखा न रहना पड़े जैसे तुम्हारे पापा को रहना पड़ता था।
और फिर देखो माँ पूरे हफ्ते हमारे लिए सुबह से रात तक घर और रसोई में व्यस्त रहती है तो हमें छुट्टी के दिन उसे भी आराम देना चाहिए ताकि वो भी खुश रहे।

अपने पापा की बात सुनकर मयंक बोला- पापा आप कितने अच्छे है, सबका ख्याल रखते हैं और अच्छी बात सिखाते हैं। मैं भी बिल्कुल आप जैसा बनूँगा।
अभी तक चुपचाप पापा और बेटे की बात सुन रही अंकिता ने कहा- राजेश तुम अच्छे पिता और पति तो हो ही भविष्य में अपनी बहू के बेस्ट ससुर भी होगे।
राजेश ने हँसते हुए पूछा- वो कैसे?
अंकिता ने दुलार से मयंक के सर पर हाथ रखते हुए कहा- उसके लिए इतना सुलझा और समझदार साथी जो तैयार कर रहे हो। बहुत दुआएँ देगी वो तुम्हें।
तभी बाजार से सामान लेकर आती स्नेहा बोली- माँ-पापा आज मैंने कोई गड़बड़ नहीं कि। सारा सामान ठीक से लेकर आई हूँ और हिसाब भी गड़बड़ नहीं हुआ।
राजेश ने स्नेहा से सामान और बिल लेते हुए अंकिता से कहा- सिर्फ बहु ही नहीं हमारा दामाद भी हमें बहुत दुआएँ देगा।
राजेश और अंकिता एक-दूसरे की इस बात पर खिलखिलाकर हँस पड़े।
उधर स्नेहा और मयंक अचरज से एक-दूसरे को देखते हुए अपने माँ-पापा की हँसी का कारण तलाश रहे थे।



Vote Add to library

COMMENT