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@dawriter

नशा

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आधी रात को बनारस छावनी स्टेशन पर वो चढ़ा तो देखा कि एक अधेड़ दरवाजे के पास पालथी मारे बैठा है। उसने टोका " यहाँ क्यों बैठे हैं टिकट नहीं लिये का।"
वो हँसा " आरा जिला घर बा त ,कौन बात के डर बा। "

आदमी दिलचस्प लगा सफर काटने के लिए तो वो भी बाकी सामान सीट पर रख बैगपैक लिए उसी के पास जा बैठा। उसने मुस्कुराकर देखा और फिर बाहर की तरफ देखने लगा। हवाएं जब कान का मैल जमाने लगी तो उसने बैगपैक से रम की बोतल निकाल ली।

उसने घूंट भरा तो ललचाई नजरों से देख रहा था वो। उसने बोतल उसकी तरफ बढ़ाया और हाल चाल पूछा। एक घूंट में वो चौथाई गटक गया और हाल चाल बताने लगा।
"किसान हूँ, धान लगाया था इस बार सात बीघे अपना और बारह बीघे बटाई पर। सरकारी सहायता मिली थी आधे दाम पर खाद बीज और श्री विधि से ही रोपने की हिदायत। पुआल तो इतना हुआ है कि जवार के भैंस साल भर खायें पर, दाना नहीं उतरा।

सरकारी बाबू ने हाथ उठा दिये हैं। और भी हैं हमरे जैसे गाँव में पुआल उपजाने वाले किसान। सरपंच सबको साथ लेकर केस किया है कोर्ट में। लेकिन तुमलोग तो जानते ही होगे बौआ सरकार से लड़ना कितना मुश्किल काम है।
इसी बीच शादी ठहर गई बचिया की तो बनारस आये थे मदद के लिए, इहाँ हमरे चचा रहते हैं। गँजेड़ी थे तो परिवार से बना नहीं, यहीं आकर बबाजी हो गये हैं। आश्रम बना रहे हैं आजकल। दो लाख दिये हैं और कहे हैं तिलक तक आठ दस लाख का और व्यवस्था कर देगें। "

हूँऊऊं करते हुए घूंट भरकर उसने फिर से बोतल उसकी तरफ बढ़ाया तो उसने मनाकर दिया " न जादे नहीं पीना चाहिए खराबी करता है। वैसे भी आरा में बंद है ई सब। हम तो कहेंगे तू लोग भी मत पिया करो। "

फिर रूककर उसने गौर से देखते हुए कहा " अच्छा तू लोग में लगभग सब पीता है ऐसा काहे। कोई नियम है क्या ? "

मुँह कसैला हो गया उसका " बिना सोचे समझे आर्डर फॉलो करने के लिए नशे में होना जरूरी होता है चचा ", कहते हुए उसने एक साँस में गटगटाकर बोतल खाली कर दी।

Image Souce: butnbubbles



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