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@dawriter

दो लक्ष्मीयों के बाद कुबेर तो आते ही है.

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आज शरद के घर चौंक की पूजा(मध्य भारत में बच्चे के जन्म के बाद की सबसे बडी पूजा का नाम) है पूरे घर में चहल पहल है। ढोलक की थाप के साथ मोहल्ले की औरतों की गाने की आवाज़ गूँज रही थी।

सज रही है तेरी अम्मा सुनहरे गोटे में

अनीता शरद की पत्नी अपने छोटे से बच्चे के साथ पूरे सोलह श्रृगांर में दुनिया की सबसे सुंदर नारी लग रही है। वैसे भी कहा जाता है एक लडकी अपनी शादी में और चौक की पूजा में मिस वर्ल्ड से कम नही लगती है। शरद की माँ की खुशी साँतवे आसमान पे है।

" अरे अपना शरद बाप बन गया है, चाँद से सुन्दर बेटे का बाप। आज तो ख़ुशी का दिन है! आज तो नेग लुटाने का दिन है। मैं दादी बन गयी अब, पोते की दादी!" शरद की दो बेटियाँ भी अपनी दादी के साथ नाच रही थी।

कुछ दूर बैठी सुधा जी पूरा उल्लास देख रही थी।

माँ ....माँ सुधा जी को उनकी बहू शांति ने आवाज दी.

हाँ....चले माँ बच्चो का स्कूल से आने का टाईम हो रहा है। ....हाँ चलो।.

माँ आप मंदिर नही गए, कोई बात भी नहीं कर रहे,क्या हुआ? कुछ नही शांति बहु बस ऐसे ही चून्नू मून्नू कहाँ है?

चून्नू मून्नू? ,.....

आज उनकी डाँस क्लास होती है न तो गये,अच्छा मुझे ध्यान नही था। सुधा जी ने कहा

क्या हुआ माँ आपकी तबीयत तो ठीक है शांति ने सुधा जी का माथा छू कर कहा

नही, ठीक है तबीयत

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सुनो, सुन रहे हो

हाँ बोलिए मालकिन....अविनाश शांति का पति

आज माँ की तबीयत ठीक नहीं है

क्यो आज तुम्हे बोला नहीं क्या शांति कुछ तो नाम की तरह शांत रहा करो...

अविनाश मजाक नहीं न...शांति ने चिढ़ते हुए कहा

अच्छा बोलो क्या हुआ

दोपहर के बाद वो मंदिर जाती है आज नही गयी,शाम को सास बहू वाले सीरियल देखती है वो भी नही देखी....और तो और चून्नू मून्नू को कभी वो चून्नू मून्नू नहीं कहती हमेशा चुरकी मुरकी पर आज....चून्नू मून्नू ही पुकारा.

इतना दिमाग क्यों लगाती हो, इसलिए बोलता हूँ सावधान इंडिया कम देखा करो ..

फिर वही न हर बात में मजाक ,आप पूछो न मैने पूछा बहुत बार, पर मुझसे कुछ नहीं कहती....

अच्छा करता हूँ बात

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माँ क्या हुआ...आज आँफिस से आने के बाद एक भी बार आपकी आवाज नहीं आई बच्चों को डाँटते हुए।

अविनाश माँ के पास आकर बिस्तर पर बैठ गया, शांति दरवाजे से लग कर खडी़ हो गई।

बच्चो ने कुछ किया ही नहीं ऐसा कि डाँटा जाऐ...सुधा जी ने कहाँ

क्या बात है बच्चे एक दिन में सुधर गए, और आपकी शांति भी आज शांत है। सुधा जी उठ कर खिड़की के पास चली गयी।

क्या हुआ माँ बताओ

कुछ नहीं

माँ बताओ

आज हम लोग शरद के घर गए थे चौक की पूजा में,सब लोग वहाँ बहुत खुश थे।

हम्म तो

वो...वो शरद को दो लड़कियाँ थी उसके बाद लड़का आया।

तो....

अपने यहाँ भी तो दो लड़कियाँ है न,.. तो शायद हमारे यहाँ भी ...लड़का आ जाए।

अविनाश ने अपना सिर पकड़ लिया। और दरवाजे के बाहर शांति के मन में अंशाति आने लगी।

अच्छा तो ये बात थी माँ किसने आप को ये सारा ज्ञान दिया...

शरद की माँ कह रही थी कि दो बेटियों के बाद बेटा होता ही है।

अच्छा इसलिए उनकी खुद की अंवाक्षित चार बेटियाँ है जिनके बाद शरद है...है न माँ...

माँ पहली बात ये सब केवल बाते है कि दो लड़कियो के बाद लड़का होता है...पर ये बाताओ माँ आपको क्यों लगता है कि लड़का होना चाहिए।

बेटा तेरी दो बेटिया बस है, चुरकी मुरकी, बुढ़ापे में क्या करेगा।

माँ जिस शरद की आप बात कर रही है न वो खुद दो भाई है पर क्या बेटो के पास माँ रह रही है नही न ,गाँव में वो अकेले रहती है

फिर

पर वंश का नाम भी तो बढ़ना चाहिए न

हाँ ये बात पांईट वाली है ,माँ

आपके दो बेटे है ,मेरी दो बेटियां... पर भैया का तो बेटा है आपका वंश का नाम बढ़ रहा है आपके हिसाब से...

और फिर बेटी के नाम के साथ भी तो मेरा नाम जुड़ा है न...और कौन सा मैं अपनी प्रजाति का अंतिम प्राणी हूँ.

पर...

पर क्या माँ, शांति दोनो बच्चों को बड़ा कर अब थोडी व्यवस्थित हुई है, दो बच्चे होने चाहिए जिस से हमारे बाद उन्हे एक दूसरे का सहारा हो, बेटा बेटी हो तो सबसे अच्छा, पर बच्चे जो भी हो दो ही अच्छे, बेटा हो या बेटी हमारे संस्कार क्या है ये मायने रखता है।...

हाँ सही कह रहे हो तुम मैं जिस मंदिर में भजन के लिए जाती हूँ वहाँ पास के वृध्द आश्रम की बहुत महिलाएं आती हैं जो बताती हैं कि उनके दो बेटे हैं तीन बेटे हैं कुछ कुछ के तो बाहर विदेश में हैं पर वो अपने माता पिता को अपने साथ नहीं रखना चाहते....सही है बेटा या बेटी सब समान है बस उन्हें अपने बुजुर्गों का आदर करना आना चाहिए। दो लक्ष्मीयो के बाद कुबेर आते ही है इस सोच को बढ़ावा नहीं देना चाहिए।

मनीषा गौतम

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