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@dawriter

झल्ली पड़ोसन की बहन जी (महिला दिवस)

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"नमस्ते बहन जी" सुशीला ने अपनी पड़ोसन सुकन्या के बरामदे में झांकते हुए कहा..!

शहर के सबसे प्रतिष्ठित लोगों से बसा हुआ अपार्टमेंट था "सानिधय अपार्टमेंट"..! सुशीला को सुकन्या के पड़ोस में आये हुए अभी दो हफ्ते ही हुए थे..! चूँकि दोनों के घरों की बालकनी एक साथ जुडी हुई थी तो वो एक दुसरे की बालकनी में आसानी से झांक सकते थे..तो जब भी सुशीला सुकन्या को देखती तो उससे घुलने मिलने की कोशिश करती..!

सुकन्या एक बहुत ही प्रतिभाशाली महिला थी..दो बच्चों की माँ होते हुए भी उसने अपने आप को चुस्त-तंदुरुस्त रखा हुआ था..! सुबह की सैर और रोज़ व्यायाम करना तो उसका नियम था..! अपनी सेहत और रहन-सहन का पूरा ध्यान रखती थी वो.! मॉडलिंग, नृत्य और साहित्य लेखन में हमेशा ही अव्वल रहती थी वो..न जाने कितने ही इनाम जीते थे उसने..!

बिलकुल उसके विपरीत थी सुशीला..केवल बारहवीं पास, सांवला रंग..बेडौल शरीर..दिन भर बच्चों पर चिल्लाना और हर किसी से घुलने मिलने की कोशिश करना..! धनवान सुशीला में सादगी कूट-कूट कर भरी हुई थी.! महंगे कपड़े तो पहन लेती पर उस पर वो परिधान जच रहा है या जो गहने उसने पहने है वह सही भी लग रहे हैं..इस बात का जरा भी ज्ञान न था उसके पास..!

उसका "बहन जी" कहना सुकन्या को आग की जलन की भांति प्रतीत हुआ और वो उसको कोई भी जवाब दिए बिना अंदर चली गयी..आखिर सुशीला जैसी गवार महिला के मुंह नहीं लगना चाहती थी वो..!

थोड़ी ही देर में दरवाजे की घंटी बजी तो सुकन्या ने पाया की सुशीला हाथ में डोंगा लिए खड़ी है..! "बहन जी..आज मैंने खीर बनाई है..आज सासुमाँ का जन्मदिन है तो भगवान को भोग लगाया..आपको प्रसाद देने आई हूँ."..अपने सुशील अंदाज़ में भोली सुशीला बोली..!

"ओह..आप जब ले ही आई है तो बस प्रसाद समझकर मैं एक चमच्च ले लेती हूँ..हमारे यहाँ कोई नही खाता खीर.." कह सुकन्या ने एक चमच्च खीर ले ली और सुशीला को दरवाजे से ही लौटा दिया..!

सानिधय अपार्टमेंट में तो सुशीला अब चर्चा का विषय बन गयी थी..सब उसके पहनावे और उसके घुलने मिलने की आदत का मजाक उड़ाते थे..! सुकन्या तो अपनी किस्मत को कोस रही थी ..उसको ऐसी झल्ली पड़ोसन जो मिली थी..!

आज अपार्टमेंट के मंदिर में कीर्तन समारोह था..ऐसे में सुशीला भी वहां आ पहुंची..गहरे हरे रंग की साड़ी पर पुश्तैनी गहने, सिन्दूरी रंग से भरी मांग और होठों पर बेढंग तरीके से लगी लिपस्टिक देख सब मंद मंद एक दुसरे को देख उसका मजाक उड़ा रहे थे..!

सुशीला ने फटाफट माइक को हाथों में ले भजन गाना शुरू किया..उसकी आवाज़ बहुत ही मधुर थी...सुशीला सूजी के हलवे का एक थाल भी बना लायी थी जो उसने कीर्तन के बाद सबको खिलाया..! उसके जाने के बाद सबने उसके खाने और गाने की तारीफ तो की पर ये कहकर की "वो देहाती है यही सब तो उसका काम है..!

महिला दिवस के उपलक्ष पर सेक्टर-13 (जिसमें लगभग 40 अपार्टमेंट थे) की प्रबंधन समिति ने सभी माताओं के लिए मॉडलिंग और नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन आयोजित किया..! इनाम स्वरूप जीतने वाले को दस हजार का चेक और एक ट्राफी मिलनी थी..! पर शर्त ये थी की "आपको अपना एक विडियो भेजना होगा और साथ सोशल साईट पर आपको अपना रजिस्ट्रेशन करवाना होगा..आपको यह परफॉरमेंस अकेले नहीं बल्कि अपनी किसी भी साथी महिला के साथ करनी होगी और उसका भी पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) करवाना होगा और हमको इन्फॉर्म करना होगा "

सुकन्या ये खबर पढ़ कर बहुत ही उत्साहित हुई..और उसने फटाफट अपनी सभी ख़ास सहेलियों को इस बारे में बताया और अपने साथ परफॉर्म करने को कहा..!

पर ये क्या...!दो दिन बीतने पर भी किसी का कोई सन्देश न आया..मोबाइल पर सन्देश डालने पर भी कोई जवाब नहीं आया..! उसने सबसे कारण पूछा तो कोई बहुत व्यस्त थी..किसी को इन सबमें रूचि न थी..किसी का सोशल नेटवर्क ही काम नही कर रहा था और यहाँ तक उसको ये भी कह दिया गया की इनाम तो तेरे हिस्से का होगा और तुम तो पहले से ही प्रसिद्ध हो..हमको क्या लाभ होगा..!

आज सुकन्या को महसूस हो रहा था की उसकी सखियाँ जिनको वो बहुत ही मॉडर्न और अपनी सच्ची दोस्त कहती थी..सब कहीं न कहीं उसकी सफलता से मन ही मन खार खाती हैं..! आज जब उसे उनके साथ की जरूरत है तो कोई भी उसका साथ देने को तैयार नहीं है..! उदास और विचलित मन से वो अपनी बालकनी में बैठी कॉफ़ी पी रही थी..!

"नमस्ते बहन जी" सुशीला की आवाज़ ने उसकी तंद्रा भंग की..! बहन जी संबोधन से वो झल्ला उठी "देखो बहन जी होगी तुम..मुझे मैम्म कहा करो..समझी" कह वो अंदर चली गयी..!

थोड़ी ही देर में दरवाजे की घंटी बज उठी..सुकन्या ने जब सुशीला को दरवाजे पर खड़ा पाया तो उसका माथा फिर घूम गया..इस से पहले वो कुछ कहती सुशीला बोल पड़ी "मैम्म.. लगता है आज आपकी तबियत कुछ ठीक नहीं है..मैं आपके लिए नाश्ता लायी हूँ..आप अपनी सारी परेशानी मुझे बताओ..मैं कोशिश करूंगी आपकी सहायता करने की..दरअसल मेरी माँ कहती है की 'पड़ोसी ही पहले रिश्तेदार होते हैं बाकि सब बाद में"!

सुशीला की ऐसी बातें सुन आज पहली बार सुकन्या ने उसको अंदर बुलाया और हंसते हंसते कहा की "आप नही समझ पाओगी..एक प्रतियोगिता होने वाली है..बस मेरी अपनी ही ख़ास सखियाँ मेरा साथ नही दे रही हैं"..!

"अरे तो कौन बड़ी बात हुई मैम्म..हमको आता है न नृत्य..हम करेंगे आपके साथ.." सुशीला फट से बोल उठी..!

पहले तो सुकन्या को बहुत हँसी आई..पर बाद में अकेले में बैठ कर उसने सोचा की आखिर महिला दिवस का मतलब ये ही तो है की हम हर महिला के गुणों को जग के सामने लायें..!

आज सुशीला के दरवाजे की घंटी बजी..सुशीला के लिए मानो  तो कोई भगवान उसके घर पधारें हों..इतना स्वागत किया की सुकन्या की आँखें ही छलक उठी..! बिना नाश्ता करवाए सुशीला ने उसको जाने न दिया.."

इस बीच सुकन्या ने सुशीला को कहा की हम दोनों साथ में परफॉर्म करेंगे..!

"पर मैम्म..मुझे तो कंप्यूटर चलाने नही आता है..आप ही सब काम करिये..मैं तो बस जैसा आप कहेंगी वैसा  कर दूँगी" सुशीला ने कहा..!

सुकन्या ने सुशीला का अकाउंट बनाया और पंजीकरण की सारी औपचारिकताएं पूरी कर प्रतियोगिता की तैयारी शुरू कर दी..! उसकी सारी सखियों ने उसका जी भर मजाक बनाया..कुछ ने ये भी कहा की "कम से कम अपने स्टैण्डर्ड का तो ख्याल किया होता"..!

प्रतियोगिता का दिन आ गया था..सुशीला इतने सारे प्रतियोगियों को देख डर रही थी..पर सुकन्या मैम्म साथ है इस बात का अहसास ही उस में साहस भर देता था ..!

सुकन्या की सारी सखियाँ भी प्रतियोगिता देखने पहुंच गयी थी..वो देखना चाहती थी की आखिर आज एक देहाती के साथ इतनी मॉडर्न सुकन्या कैसे हारती है..!

पहले नृत्य प्रतियोगिता थी और बाद में रैंप वाक..!

सुशीला और सुकन्या दोनों ने साड़ी में एक साथ "पिंगा गा  पोरी..पिंगा गा पोरी..पिंगा" गाने को बखूबी निभाया..सब उनका नृत्य देख दंग रह गये थे.."once again..once again" की ध्वनि से सारा ऑडिटोरियम गूँज उठा था..!

अब बारी थी रैंप वाक की..सुकन्या ने एक डिज़ाइनर गाउन पहना और सुशीला ने बनारसी साड़ी पर अपने पुश्तैनी गहने..! जब दोनों एक दुसरे का हाथ पकड़ कर रैंप वाक कर रहे थे तो ऐसा प्रतीत हो रहा था की जाने किस देश की महारानियाँ स्टेज पर उतर आई थीं..! स्वदेशी और विदेशी लिबास का इतना मनमोहक ताल-मेल देख सबके मुंह से वाह वाह निकल रहा था..!

आखिरकार इनाम की ट्राफी और चेक के असली हकदार हुए सुशीला और सुकन्या..! जैसे ही दोनों स्टेज पर पहुंचे तो
मुख्य अतिथि ने उनको बधाई दी...दोनों की खूब सराहना की और पूछ बैठे की "आप दोनों का रिश्ता क्या है??"

सुशीला तो चुपचाप नजरें झुकाए खड़ी थी..मुंह से जुबान न निकल रही थी..आखिर इतने मान-सम्मान से पहली बार जो सामना हुआ था उसका..!

मुख्य अतिथि ने अपना सवाल फिर से दोहराते हुए सुशीला से पूछा..इस से पहले वो कुछ बोलती सुकन्या बोल पड़ी..."बहन जी"..!

"हांजी मैं सुशीला की 'बहन जी' हूँ"..! सुकन्या को आज ये शब्द कहते हुए बहुत गर्व महसूस हो रहा था वहीं दूसरी ओर सुशीला की आखों से ख़ुशी की झड़ी बरस रही थी..!

सुकन्या ने ट्राफी और चेक सुशीला के हाथों में सौंपते हुए कहा की "इस पर सिर्फ और सिर्फ सुशीला जी का हक है..सच्चाई और सादगी की जीती जागती तस्वीर है सुशीला जी..ये मेरा सौभाग्य है की दुनिया की सबसे खूबसूरत और पाक दिल  महिला को 'महिला दिवस' के इस ख़ास मौके पर मैं आप सबके समक्ष ला सकी.." सुकन्या भाव-विभोर हो उठी थी..!

अब तो सुकन्या और सुशीला एक सच्ची दोस्ती की मिसाल बन गयी थी और हर जगह उन दोनों को एक साथ ही देखा जाता था..!

"सही कहते हैं की सच्चा मन ईश्वर का घर होता है और अच्छी सीरत वाल इंसान ही सबसे खूबसूरत होता है"..!

धन्यवाद ..!

Image Source: livemint



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