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@dawriter

ग़ज़ल-"बेकार की बातें न कर..."

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sunilakash by  
sunilakash

 
 
व्यवस्था में विष घोलकर, उद्धार की बातें न कर।
निज आचरण को देख तू, बेकार की बातें न कर ॥1॥
 
इस माँगने और छीनने की संस्कृति को भूल कर ।
अपने कर्तव्य को निभा, अधिकार की बातें न कर ॥2॥
 
अर्थ प्रधान युग है, ये माना सबको प्यारा अर्थ है।
पर स्वार्थों की ओट में उपकार की बातें न कर ॥3॥
 
देख उसको वो जो कतारों में खड़े बूढ़ा हुआ।
उसके हित की बात कर, सरकार की बातें न कर॥4॥
 
प्यार का अभिनय करे और मन में रखे भेद जो।
ऐसे प्रीतम के तू मुझसे प्यार की बातें न कर॥5॥
 
---सुनील आकाश 


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