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@dawriter

कर्म का सिद्धांत - Theory of Karma

2 119       

जन्म के साथ हर जीव सिर्फ कर्म ले कर आया है और मृत्यु के समय कर्म ले कर जाएगा, धन - दौलत - शोहरत सब यही धरा रह जायेगा, बस जाएगी तो सिर्फ दो अटैची - एक काली और एक सफेद...

"काली अटेची" - बुरे कर्मो की अटैची जो भरी है जीव द्वारा उसके जीवन काल में किये गए गलत कर्मो से, जैसे की चोरी, झूठ, धोखा, अनादर, दोवेष, मारना आदि जैसे कर्म।

"सफेद अटैची" - अच्छे कर्मों की अटैची जो भरी है जीव द्वारा उसके जीवन काल मे किये गए अच्छे कर्मों से, जैसे की सच, प्यार, त्याग, समर्पण, हर छोटे बड़े को इज्जत एवं मान सम्मान देना, माफ कर देना जैसे आदि कर्मो से।

यही कर्मो का लेखा जोखा है, हर जीव के जीवन काल मे उसके कर्मो की अटैची से ही उसके जीवन की गति तय होती है।

पूजा - पाठ - व्रत - तपस्या आपको भगवान के करीब लाती है परंतु अगर इन सब के साथ मे आप किसी का दिल दुखाते हो, धोखा देते हो, अपशब्द बोलते हो तो यह सब कर्म आपको आपकी पूजा एवं तपस्या के बाद भी आपको भगवान से दूर रखते है, परंतु आप सबसे प्यार का भाव रखोगे एवं भगवान के बनाये जीव में भगवान का ही रूप देखोगे तो आपको इसका फल आपकी पूजा पाठ से भी बढ़ कर मिलेगा।

मैं आपको एक द्रष्टान बातती हु...
एक बूढ़ी अम्मा थी जो हर रोज सुबह सवेरे बिना नागा ५ कोस नंगे पैर पैदल चल कर मंदिर जाती थी, मंदिर में वह भगवान की मूरत के सामने हाथ जोड़ कर आपने परिवार की सुख शांति की प्राथना करती थी परंतु घर जाते ही वह अपनी बहू को काम मे लगा देख कर बहु को आवाज़ लगती थी "अरि ओ बहु कहा मर गयी है कम से कम पानी तो पिला दे, नाश्ता तो अभी बना नही होगा तुझसे जानती हूं कोई भी काम तेरी माँ ने सिखाया नही है तुझको और तेरी जैसी करमजली को मेरे माथे मड दिया है"
बहु मायूस मन से सास को पानी का गिलास दे कर आखो में आंसू लिए वापस काम पर लग जाती है।

जैसा कि हम सब जानते है कि कुऍ की आवाज़ लौट कर वापस आती है वैसे ही बहु का रवैया समय के साथ बदल गया, अब बहु ना तो अपनी सास को पूछती थी ना ही ज्यादा बात करती थी, एक दिन वह बूढ़ी अम्मा बहु की बेरुखी से दुखी हो कर मंदिर में बैठी थी, वहां एक साधु बाबा ने अम्मा से पूछा माई क्या बात है उदास क्यों बैठी हो, अम्मा ने अपनी सारी व्यथा साधु बाबा को सुना दी, साधु बाबा बोले माई आप रोज सिर्फ एक गिलास पानी के लिए अपने अपनी बहू को अपशब्द बोलते हो, फिर साधु ने पूछा एक बात बताओ माई आपके घर मे पानी का घड़ा कहा रखा हुआ है?, अम्मा बोली घर मे घुसते ही दरवाजे के बगल से ही घड़ा एवं गिलास रखा हुआ है, साधु बाबा मुस्कुरा कर बोले माई आप रोज ५ कोस दूर पैदल मंदिर आती जाती हो तो क्या आप ५ कदम की दूरी पर रखे हुए घड़े में से खुद पानी नही ले कर पी सकती ?, अगर आप खुद घड़े से पानी ले ले और आप अपनी बहू को अपशब्द न बोले तो आपके घर मे क्लेश नही होगा और आपकी बहु आपकी दिल से इज्जत करेगी अब आपने आपने लिए बुरे कर्म भी बना लिए एवं आपने घर की सुख शांति भी भंग कर ली।

बस थोड़ा सा श्रम, अच्छा व्यहवार, आपसी समझ, प्यार और अपनापन लाने की देर है, फिर आपका घर किसी स्वर्ग से कम नही होगा, प्यार और स्नेह की वर्षा होगी आपके आंगन में, बस शर्त यही है कि आप किसी से भी कोई भी उम्मीद न रखे, भगवान ने आपको समर्थ बनाया है आप अपना कार्य स्वयं करे, किसी पर बोझ न बने।

अम्मा को साधु की बात समझ मे आ गयी और अम्मा ने वैसा ही करना शरू कर दिया और अम्मा के घर फिर से खुशिया लौट आयी।

अर्थात....
"जैसा आप बोलोगे, जैसा आप सोचोगे
ये कुऍ की आवाज़ है, लौट कर वापस आप तक जरूर आएगी"

इसलिए अच्छा सोचे, भला सोचे, प्यार का भाव रखे, क्योंकि यह ही हमारे कर्मो की अटैची बनाते है और वह अटैची ही अंत मे हम ले कर जाएंगे।

 

 

                .......... दिव्या कालरा



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