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@dawriter

कभी नीम नीम कभी शहद शहद...माँ का जायका

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समझ नहीं आ रहा कि क्या करूँ? तुम ही कुछ बताओ ।

क्या समझ नहीं आ रहा।

यही की पापा की कल तेरहवीं भी हो जायेगी, उसके बाद माँ कैसे क्या करेगी। दीदी कह रही है कि वो माँ को लेकर जायेगी, पर...क्या ये अच्छा.... अब तो माँ को कुछ समझ भी नहीं आता जल्दी। क्या करेगी माँ ?

क्या करेगी, मतलब हमारे साथ रहेगी।

पर वो तुम्हें परेशान करती है। निधि, हमेशा हमारी शादी को लेकर ताने देती है। तुम्हें पसंद भी नहीं करती...मैं भी चाहता हूँ कि माँ हमारे पास रहे पर फिर वो रोज़ का तुम लोगों का नाटक चालू हो जायेगा।

नहीं होगा,तो क्या हुआ मुझे पसंद नहीं करती, है तो माँ ना...

क्या बच्चे खराब निकल जाते हैं तो माँ की ममता कम हो जाती है नहीं ना वैसे ही माना माँ जी ने प्रेम विवाह होने के कारण मुझे अब तक पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया। पर जब शादी होकर आई थी तो उनकी उम 45 की थी पर आज साठ की है। पापा थे अब वो भी नहीं है, उस समय मैं अकेले थी आज मेरे पास उनके दो पोते हैं, इस उम्र में भी वह अपनी जवानी के दिनों की कुछ धुँधली यादें, कुछ मुस्कुराए हुए सपने आँखों में समेटे हुए अकेली रहेगी, ये सही नहीं है। और दीदी के पास अपनी ज़िम्मेदारियाँ है। वो हमारे साथ ही रहेंगी मैं उनकी सब तरह से देखभाल करूँगी, आप चिंता ना करें, इतना ज़रूर है कि उतने स्नेह से नहीं, केवल अपना काम समझ कर, पर करुँगी। हो सकता है अब वो मुझे स्वीकार कर ले। निधि ने धीरे से कहा

हर इंसान का स्वाद सामने वाले इंसान के हिसाब से,परिस्थिति के अनुसार अलग अलग होता है। जैसे एक माँ हमेशा अपने बच्चों के लिए मीठी होती है, पर यदि बच्चा गलत करे तो कड़वी नीम भी बन जाती है। पापा हमेशा सख़्त नारियल की तरह होते है बाहर से कठोर पर अंदर से नरम, हर इंसान अपने आप में अलग होता है। किसी के लिए बहुत अच्छा तो किसी के लिए बहुत बुरा। माँ आज तक मेरे लिए कड़वी जैसी ही रही पर अब शयाद.... और वैसे भी सबसे मीठा-मीठा बनने से आप इंसान नहीं, डायबिटीज़ हो जाते हैं, इंसान बने रहने के लिए कुछ के साथ खट्टा, कुछ के साथ तीखा और कुछ के साथ बेस्वाद बन जाना जरूरी होता है.

ये सब कुछ माँ सुन रही थी अंदर के कमरे से, भरी आँखो से निधि के सिर पे हाथ रख कर कहाँ मेरा जीवन सफल हो गया ऐसी बहु पाकर जुग जुग जीओ, सदा खुश रहो, माँ की उँगलियों में कोई ताक़त ना थी,मगर जब निधि का सिर झुका, तो सिर पर रखे काँपते हाथों ने निधि को ज़माने भर की दौलत दे दी।

इस के बारे में अपने विचार कंमेंट के रुप में जरुर बताऐ।

मनीषा गौतम



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