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@dawriter

अंतिम इच्छा

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सन 2050 की बात है तब भूकंप की घंटे भर अग्रिम सूचना देने वाला यंत्र अस्तित्व में आ चुका था । उसकी मदद से अट्टालिकाओं से भरे शहर को सूचित किया गया आज दो बजकर दस मिनट पर ऐसा भीषण भूकंप आएगा कि पूरा शहर धूल में मिल जाएगा ।

किसी 108 मंजिल की इमारत में सैंतालिसवीं मंजिल पर जतिन अपने फ्लैट में बैठा है। लिफ्ट बंद पड़ा है । जतिन एक अट्ठाईस वर्षीय नौजवान है जो लोहरदगा से बारहवीं करके सोलह साल की उम्र में दिल्ली आया था । उसके जीवन भर की कमाई है पिता को भेजे हुए पैसों की कुछ रसीदें । अब वो नहीं रहे तो वहाँ का घर और अपनी सारी जमापूंजी लगाकर ये फ्लैट खरीदा था । दुनियावी नजर से देखें तो ऐसी इमारत में एक फ्लैट का मालिकाना हक होना भी कम बड़ी उपलब्धि नहीं ।

सामने के फ्लैट से मिस्टर शर्मा व्हील चेयर लुढ़काते आए और बेबस से आँखों में आँसू लिए बोले " जतिन तुम्हारा मोबाइल देना मेरे में बैट्री नहीं है । "
सोच में गुम जतिन ने चुपचाप मोबाइल बढ़ा दिया । वे फीकी हँसी हँसे "आखिरी इच्छा है पोती की आवाज सुन लूं । छह महीने की हो गई होगी सुना है केवल दादा दादा पुकारती है । "
दो रिंग के बाद किसी ने फोन नहीं उठाया तो फोन वापस देते हुए जतिन से पूछा " तुम बाहर मैदान में क्यूं नहीं जा रहे । मेरी तरह मरना चाहते हो क्या ? "

"नहीं बस सोच रहा हूं जिंदा रह कर भी क्या किया ? "

वो ठठाकर हँस पड़े " फिर तो जल्दी से अंतिम इच्छा बता दे क्योंकि ये बड़ा पेचीदा सवाल है और वक्त कम है । "
थोड़ा रूककर बोले " वैसे क्या है तुम्हारी आखिरी इच्छा । "
जतिन मुस्कुरा उठा " मैं शराब पीना चाहता हूं । पहले पिता का अनुशासन और फिर इस शहर में अपना पता कायम करने का जूनून । वक्त ही नहीं मिला । "

मिस्टर शर्मा जेब से एक चाभी निकालकर देते हुए बोले " ऊपर उनचालिसवे माले पर मेरा फ्लैट है भरी पड़ी हैं बोतलें । बहुत पी है मैंने बेवड़ेपन के कारण ही तो बीबी छोड़ गई थी । "

पांच मिनट बाद दोनों के हाथ में पैग था । मिस्टर शर्मा का चौथा तो जतिन का भी तीसरा पैग था । शर्मा जी मूड में आते हुए बोले " यार जतिन पहले पता होता तो खूब जमती अपनी महफिल । "
जतिन भी सूरूर में आ गया था " तो अब कौन सी देर हुई है चलो भाग चलते हैं मैदान में अभी भी आधे धंटे समय है । "
" हा हा तूने पहलीबार पी है न चढ़ गई है आधे घंटे में सैंतालिस मंजिल की सीढ़ियां उतरेगा वो भी मुझ लंगड़े बूढ़े के साथ । "
जतिन अंटी में बोतल फंसाते हुए खड़ा हो गया " कहते हैं शराब चूहे को भी शेर बना देती है । "
अचानक से शर्माजी की आँखों में जीवन चमक उठा " चल तू कहता तो हम भी जी लेंगे । बता कैसे क्या करना है । "
"कुछ नहीं बस गद्दे लपेटकर आपको लुढ़का दूंगा और हर तीन फ्लोर पर एक पैग लगाते रहेगें । "
शर्मा जी ने पैग खाली किया " डन । "
इस बचकाने तरीके से वे चार मंजिल ही नीचे उतरे थे कि भूकंप आ गया । खुशी की बात ये रही भूकंप अनुमानित तीव्रता से कम का था तो मकान को कम नुकसान पहुंचा । दोनों जीवित बच गए। दुखद ये रहा कि उनकी अंतिम इच्छाएं मर गई ।

Kumar Gourav



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