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@dawriter

शुभ विवाह-III(अंतिम)

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दुविधा में दिन बीतते गए, हफ्ते, महीने...बढ़ते दिनो के साथ कुंदन की बैचेनी बढ़ रही थी, लक्ष्मी ने एक आदर्श बहू के सारे मांपदडो को पूरा किया। लगभग दो महीने बाद एक सुबह लक्ष्मी को उल्टीया हुई...

इतने बडे़ घर पे काम करने वाली महिलाओं ने दबी जुबान में डाँक्टर के आने के पहले ही घोषणा कर दी कि खुशखबरी है...पर जब डाँक्टर आया कुंदन का मित्र अमन...

उल्टीया तो फूड पाऊजिनिगं की वजह से है, पर आप बहुत कमजोर लग रही है, आँखो को देखकर तो ऐसा लगता है कुछ रातो से सोये भी नही है।

हाय राम हम तो सोच रहे थे ठाकुर के घर खुशखबरी आयेगी,हम लोगो को ईनाम मिलेगा पर... ये बात कुंदन के कानो में भी पड़ गई... वो और परेशान हो गया

उसी शाम

माँ मै आपसे बात करना चाहता हूँ

हाँ बेटा कुंदन बोलो।

मैने पहले भी कहा था ये शादी नही होनी चाहिए थी,पर आपको अपनी कसम ज्यादा जरूरी थी,पिता जी की उनकी इज्जत...अब क्या करना चाहते है आगे के लिए, लक्ष्मी को देखा है आपने पूरी तरह से मुरझा गयी है।मै उसका समाना नही कर पाता, अपने आप को उसका अपराधी महसूस करता हूँ...

बेटा मै समझती हूँ पर तुम्हारे पिता...

माँ आज एक उल्टी हुई लोगो ने बात करनी शुरू कर दी,क्या करेंगे पिता जी? मेरे लिए आज तक आप को कोसा उन्होने..अब आगे लोग लक्ष्मी के लिए बोलेंगे, तब किसको कोसेगें।

क्या हुआ क्यो बहस कर रहे हो अपनी माँ से...।

कुदंन के पिता की आवाज आई,

पिताजी आप क्यो लक्ष्मी का जीवन खराब कर रहे है,मैने आपसे पहले भी कहा था ये शादी मत करिये, सोचा था मैने वो मेरी चुप्पी को देखकर, बेरूखी को देखकर चली जायेगी मुझे छोड़कर ...पर नही वो एक अच्छी लड़की है पर वो मेरी अच्छी दोस्त भी है उसके साथ गलत हुआ है और अब ये मुझे सहन नही हो रहा।

अच्छा क्या करना चाहते हो तुम?...कर क्या सकते हो तुम?..

पिता जी जब रोज वो आपके पैर छूती है और आप खुश रहने का आशीर्वाद देते है तो कभी भी आपको अहसास नही होता कि आपने उसके साथ सही नही किया है..ज्यादा कुछ तो नही अपनी सच्चाई जरूर स्वीकार कर सकता हूँ..और उसे बता भी सकता हूँ।

दूसरे दिन सुबह लक्ष्मी क्या इस हवेली से दूर उसी चाय की टपरी पे हम बात कर सकते है जहाँ बचपन से लेकर अब तक हमने सारी बाते की है।

जी। कुंदन मुझे बताईए क्या समस्या है मै एक पल चैन से नही रह पा रही हूँ और वही हाल आपका भी है।

मुझे माफ कर दो लक्ष्मी मै तुम्हारा पति नही बन सकता... मतलब भगवान ने मुझे ऐसा नही बनाया। कि मेरे अंदर किसी लड़की के प्रति प्रेम की भावना आ सके, मेरे पिता ने कभी मुझे इस रुप में स्वीकार नही किया, बहुत सारे सवालो का जवाब तलाशते रहे, ठाकुरो के घर में, इतनी बडी़ हवेली में उनके खून में ऐसा कैसे हो सकता है। कि मेरे जैसे का जन्म हो...। हमेशा उन्होने मेरे लिए माँ को दोषी ठहराया, अपने पिछले जन्मो को पापो को दोषी ठहराया... समाज के सामने मै उनकी नाक बनाए रखने के लिए एक झूठ के साथ जीता रहा... प्रकृति, ईशवर उसी की सब रचना है आदमी, औरत और मुझ जैसे कुछ लोग। पर पराये तो दूर की बात है अपने ही हमारा वजूद स्वीकार नही करते। डाँक्टर बना इस अबूझ पहेली का हल ढूंढने के लिए कि क्यो दुनिया हमे मैनुफैक्चरिंग डिफ्फेक्ट मानती है? हम भी तो इंसान है न, उसी की हम रचना है,हमारे शरीर की भी अपनी कुछ जरुरते है।

फिर आपने मुझसे शादी क्यो की? ये सारी बाते फेरे लेने से पहले क्यो नही जुबान पे आई...

जानता हूँ गुनाह किया है,पिता जी की इज्ज़त बचाने के लिए, माँ ने मर जाने तक की बाते कही,...उस दिन हिम्मत नही कर पाया,काश कर लेता...सोचा ये सब तुम न सहोगी मुझे छोड़ कर चली जाओगी पर अपने सामने अपने सबसे अच्छे दोस्त को तिल तिल मरता नही देख पा रहा था। हो सके तो मुझे माफ कर दो.....

माफ मुझे तो समझ ही नही आ रहा कि हुआ क्या,...क्या जरुरत थी पर अब ये सारी बाते कोई मतलब की नही...क्या कोई आपके इस जीवन का साथी है। हाँ,...। वो डाँक्टर अमन,जो तुम्हें देखने आया था।

महीनो के लंबे संघर्ष के बाद

बाबूजी मान जाईए...कुंदन जी भी उसी ईशवर की संरचना है उन्हे भी अधिकार है अपना जीवन, अपने सच के साथ जीने का..

पर बहू सोचो तो लोग क्या कहेंगे, हमारा मान सम्मान सब चला जायेगा।

लोग कौन से लोग, कुंदन जी ज्यादा महत्वपूर्ण है या लोग, मान इंसान को इंसान मानने में है, उसके वास्तविक स्वरूप को स्वीकार करने में है।

विवाह वो होता है जिसमें बंधने वाले खुश रहे प्लीज बाबू जी कुंदन जी को उनके अस्तित्व के साथ जीने दीजिए। लोग दबी जुबान में बतिया रहे थे, हाय हाय कैसे लोग है कोई लाज शरम नही है हर एक व्यक्ति के मुँह पे यही बात थी। भला किसी पत्नी को कभी ऐसा करते देखा है सच में कैसी औरत है ? अपना ही घर तोड़ रही है अपने ही पति की शादी कर रही है। घोर कलयुग है। ये सब कुछ सुनते हुए लक्ष्मी को कोई वेदना नही हो रही थी क्योकी अब सही मायने में एक शुभ विवाह हो रहा था। वर और वधू का प्रवेश हुआ, वर के रुप में कुंदन के मित्र अमर और वधू के रुप में लक्ष्मी के पति कुंदन का।

शुभ विवाह -I

शुभ विवाह-II

Image Source: pinterest



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