370
Share




@dawriter

अधूरी कहानी

3 60       
arn by  
Arun Gaud

 गर्मियो की दोपहर मे कुछ बच्चे खेल रहे थे खेल क्या रहे थे रात जो रासलीला देखकर आये थे वे सब उसे फिर से दोहराने का प्रयास कर रहे थे। उनमे से अधिकतर कृष्ण बनने के लिए बहस मे उलझे थे, लेकिन इन सब मे एक बच्चा बार बार बोल रहा था कृष्ण कोइ बने लेकिन राधा तो मै ही बनूंगा और उससे कोई बहस भी नही कर रहा था, क्योकी हर कोई खुद को गोपियो से घिरा हुआ कृष्ण ही समझता था । बहुत देर की जुबानी जंग के बाद आखिर तय हुआ की राजू कृष्ण बनेगा और संजू राधा, जो की खुद राधा बनने को आतुर था।

संजू देखने मे सुंदर था लेकिन और लड़को से अलग था उसे क्रिकेट या दौड़ भाग से दूर सजना सवरना और नाच गाना अच्छा लगता था, बचपन मे किसी ने उसकी इस आदत पर ज्यादा ध्यान नही दिया लेकिन बडा होने पर सबको उसकि ये आदते अखरने लगी। उसके परिवार वालो को भी लगने लगा कि शायद भगवान ने उसे गलती से लडका बना दिया है, सिवाय उसकी माँ के, उसके लिये वो जैसा था वो ही उसकी आँख का तारा था।

संजू के सब साथी क्रिकेट खेलते आवारागर्दी करते और वो सब करते जो उनकी उम्र के लडको को करना चाहिये, लेकिन वह उन सब से अलग नाचना और खुद को व अपनी माँ को सजाने मे मगन रहता था। उसकी चाल ढ़ाल भी लडको से बहुत अलग थी इसलिये वो  सबकी हसी का पात्र था। हर तरफ से उसे ताने ही मिलते और वो अपने दोस्तो और साथियो के लिये भी दोस्त की जगह मजाक का एक बिंदू बन गया था इससे आगे कोई उसके बारे मे नही सोचता था, सबकी ऐसी बेरुखी की वजह से वो दुनिया से दूर होकर खुद मे ही सीमटने लगा, और धीरे धीरे उसने डांस को ही अपनी दुनिया बना लिया।

एक बार उनके कस्बे की रामलीला मे श्री राम बरात मे एक ड़ांस ग्रुप आया,  स्टेज पर उन डांसरो का  नृत्य देखकर संजू को लगा की वो भी ऐसा डांस कर सकता हे, वो बहुत दिनो से ऐसा कोइ ग्रुप ज्वइन करना चाहता था लेकिन ना जाने क्यो उसकी हिम्मत उसका साथ नही देती थी, लेकिन उन डांसरो के लिए बज रही तालियो के गडगडाहट उसके दिल मे उतर गयी और उसने तय कर लिया की एक बार तो वो भी कोशिश करेगा, फिर जो होगा वो देखा जायेगा। रामलीला के एक सदस्य की मदद से वो उस देहाती डांस ग्रुप के मैनेजर शास्त्री से मिला और उसे अपने मन की बात बताई. मैनेजर ने संजू को देखा और उसे अगले दिन अपने आफिस बुलाया।

उस रात संजू सो नही पाया, उसका दिल घबरा रहा था, अगले दिन संजू मैनेजर शास्त्री के दिये पते पर पहुचा वहां और भी कुछ डांसर थे। शास्त्री ने कहा ‘हाँ भई लड़के देखने मे तो तू ठीक है, क्या डांस भी कर लेता हे या बस ऐसे ही’

संजू बोला “आप करवा कर देखो फिर बताना की मै डांस जानता हू या नही।“ संजू का कांनफीडेंस देखकर मैनेजर खुश हुआ और बोला चल देखते हे, कितना हुनर हे तेरे पैरो में।

गाना बजना शुरु हो गया, पहले मिथुन दा का गाना बजा लेकिन संजू उस पर सही से डांस नही कर पाया, वो रुका और उसने कहा ‘सलाम ए इश्क बजाओ, रेखा वाला’, गाना बजना शुरु हो गया और संजू ने डांस करना शुरु कर दिया, उसके पैर रेखा से भी ज्यादा तेजी से चलने लगे, सब उसे देखते रहे, जब गाना खत्म हुआ तो वंहा मौजूद हर एक शख्श उसके लिये ताली बजा रहा था।

मैनेजर ने कहा ‘तू सच मे बहुत अच्छा नाचता हे, अगर तू चाहे तो हमारे ग्रुप मे डांस कर सकता हे, लेकिन तू देख ले भाई, हम देहाती प्रोग्राम करते है इसलिये पैसा थोडा कम मिलेगा।‘

‘पैसा कम ही सही लेकिन तालिया तो पूरी मिलेंगी शास्त्री जी, मुझे पैसे से ज्यादा तालिया मिलने की खुशी होगी’  सांस भरते हुए संजू ने कहा और मैनेजर ने उसे गले लगा लिया और कहा, ‘शास्त्री नही सब मुझे चाचा कहते हैं, अब तू भी ग्रुप का सदस्य हे और अगर तू चाहे तो मुझे चाचा बोल सकता है ।‘

डांस ग्रुप मे शामिल होकर संजू को जैसे पंख मिल गये, उसे लगने लगा की अब वो अपनी बेबसी और अकेलेपन को पीछे छोड एक नयी उडान भरेगा। एक अर्से बाद अपने दामन मे आयी ये खुशी उसने अपनी अपनी माँ को बताई, अपने बेटे को खुश देखकर वो बहुत खुश हुई लेकिन जब यह बात उसके पिता और भाई को पता चली तो वो खुश होने की जगह बहुत नाराज हुए।

संजू के पिता उस पर चिल्ला उठे, ‘अरे नालायक ऐसा कौन सा पाप किया है मैने जो तू मेरे घर पैदा हुआ, अब तक क्या कम मजाक बनवा रखा है तूने हमारा जो अब नचईया बनेगा, तू चाहता क्या है ये बता हम यहाँ रहे या नही।‘ उसका भाई भी इस सबसे सहमत नही था उसे भी लग रहा था की संजू के ऐसा करने से उसकी भी हसी उडेगी, उसने संजू से कहा, देख भाई, तू भले ही कुछ मत कर, हमे कोई परेशानी नही है, लेकिन ऐसा कुछ मत कर की हमारी जीना भी मुशकिल हो जाये।‘

संजू चुपचाप उन सब की बात सुनता रहा, जैसा वो हमेशा से सुनता आ रहा था, लेकिन जब सब खामोश हो गये तो वह पहली बार बोला ‘अगर सब हसी उडाते हैं तो उडाने दो, वो आज कुछ ना करने पर भी हसते हैं और कुछ करने पर भी हसेगे, लेकिन उनके हसने के डर से मैं खुद को कैद तो नही कर सकता, अब चाहे कोई कुछ कहे लेकिन मै वो ही करुंगा जो करना चाहता हूँ।‘ संजू के इस जबाब से उसके पिता सकते मे आ गये, उन्हे संजू से ऐसे जबाव की उम्मीद नही थी, वो उसे देखते रहे उन्होने कुछ नही कहा और चुपचाप अपने कमरे मे चले गये।

संजू ने ग्रुप ज्वाइन कर लिया और जगह जगह जाकर प्रोग्राम करने लगा। वो जहाँ भी जाता अपने डांस से सबका मन मोह लेता, देहाती प्रोग्रामो मे कोइ खास सुरक्षा नही होती इसलिये वहा कलाकरो से छेडछाड हो जाती थी, संजू कुछ ज्यादा सुंदर लगता था, कुछ लोग उसे सच मे ही लड़की समझ बैठते और उसके ज्यादा नजदीक जाने की कोशीश करते। एक दिन प्रोग्राम करते समय कुछ लड़के उसके साथ छेडछाड करने लगे, संजू उनसे परेशान हो रहा था लेकिन फिर भी उन्हे इग्नोर करने की कोशिश कर रहा था. एक लड़का कुछ ज्यादा ही आगे बढ गया और उसे जबरजस्ती अपनी तरफ खींचने लगा, तभी उसके ग्रुप मे साइड डांसर का काम करने वाला जय बीच मे आ गया उसने उस लडके को पीछे धकेल दिया और संजू को बचाया, संजू को अपने पीछे करते हुए वह बोला ‘यह मेरा दोस्त हे अगर किसी ने इससे बदतमीजी की तो मुझसे बुरा कोइ नही होगा’।

जय के मुह से दोस्त शब्द सुनकर संजू बहुत खुश हुआ एक अर्से के बाद कीसी ने उसे अपना दोस्त माना था। संजू ने अजय को धन्यवाद दिया और कहा ‘तुम सच मे ही एक अच्छे दोस्त हो, जय मुस्कुराया और बोला अच्छे तो तुम भी हो, दोनो ने हाथ मिलाया और हसने लगे। परेशानी मे फसे संजू का साथ देकर शुरु हुई दोस्ती धीरे धीरे और गाढी होने लगी वो दोनो अधिकांशतय साथ साथ रहने लगे, हसने बोलने लगे।

एक दिन शास्त्री ने सबको बुलाया और कहा  ‘सब अपना अपना प्रोग्राम तैयार कर लो परसो संजू के गाँव मे राम बारात मे हमे प्रोग्राम करना हे, और संजू तू भी तैयार रहना’। गाँव की बात सुनकर संजू थोडा घबरा गया  वो खडा हुआ और बोला ‘चाचा मै नही नाच पाऊँगा अपने गाँव मे, आप मेरे बिना ही यह प्रोग्राम कर लो’

शास्त्री ने उसे देखा और बोला ‘तेरे बिना कर लू, अबे तेरे लिये तो स्पेशल डिमांड हे यार, तेरी वजह से ही तो हमे ये प्रोग्राम मिला हे, देख तुझे तो डांस करना ही पडेगा वरना लोग मेरी चांद पिट देंगे’।

नही चाचा, आप मेरी परेशानी समझ नही रहे हो, मैं वहां उन लोगो के सामने नही नाच पाऊंगा, आप मेरे बिना ही ये प्रोग्राम कर लो।

अरे, तू कलाकार है अपनी कला को दिखाने मे डरता क्यू हे यार, मे तेरे साथ हूँ , और अगर तब भी तेरा मन ना हो तो मै तुझसे कोई जबरजस्ती नही करुगा, लेकिन फिर भी इतना ही कहूगा की तू अपनी कला का प्रर्दशन कर। संजू यह तय नही कर पा रहा था की वो हाँ करे या नही, शास्त्री उसके मन की स्थति को समझ रहा था वो उसके पास आया और बोला की इतना परेशान क्यो हो रहा है, एक काम कर तू अपनी तैयारी कर और हमारे साथ चल, अगर तेरा मन करे तो प्रोग्राम करना वरना मना कर देना, संजू इसके लिये राजी हो गया।

प्रोग्राम वाले दिन वह तैयार होकर स्टेज के पीछे बैठा था लेकिन वह बहुत नर्वस था, उसका दिल घबरा रहा था, वह अभी तक असमंजस मे था की वो यह प्रोग्राम करे या ना करे, उसे ऐसा गुमसुम बैठा देख कर जय उसकी परेशानी को समझ गया वो उसके पास आया और बोला ‘तू क्यो इतना घवरा रहा हे, एक प्रोग्राम ही तो करना हे, जैसे तू हर रोज करता हे’

संजू आखँ नीचे कीये हुए चुप रहा फिर बोला ‘हाँ है तो रोज जैसा प्रोग्राम ही लेकिन जगह रोज जैसी नही है। अगर मै यहाँ डांस करुंगा तो सब मेरी हसी उडायेंगे और शायद मेरे परिवार वालो की भी’

जय थोडा मुस्कुराया और बोला ‘तो तू भी लोगो की हसी  से डरने लगा। अरे यार कुछ तो लोग कहेंगे लोगो का काम हे कहना, उन्हे कहने दे, तू बस अपना काम कर और ऐसा कर की तुझ पर ऊंगली उठाने वाले ही तेरे लिये तालिया बजाने लगे, तेरी या तेरे परिवार की हसी ना उडाकर वाह वाह करने लगे। मुझे पता हे की तुझमे यह हुनर हे की तू अपने डांस से सबकी गालियो को तालियो मे बदल दे, और तू अकेला क्यो समझ रहा हे खुद को, मै भी तो हू तेरे साथ तेरा कृष्ण बनकर, सॅरी कृष्ण का जूनियर बनकर, तेरे पीछे’,  जय ने हसते हुए कहा।

जय के शब्दो ने संजू पर जादू कर दिया वो स्टेज पर आया लोग उस पर हस रहे थे, तो कुछ पुराने दोस्त हमेशा की तरह छीटाकशी कर रहे थे। ऐसे माहोल मे संजू  ने जय की तरफ देखा, जय मुस्कुराया और इशारे से उसने वेस्ट आफ लक कहा, उसे देखकर संजू भी मुस्कुराया और उसने डांस करना शुरु कर दिया। उसने अपने पैरो से ऐसा समा बांधा की कुछ देर पहले उसकी हसी उडाने वाले लोग मुह फाड कर उसे ताक रहे थे, संजू भी जितना जानता था उतनी कोशिश कर रहा था, शायद वो आज अपना सारा हुनर स्टेज पर बिखेरना चाहता था, उसके पैरो से ऐसी बिजली कौंध रही थी की लोगो की आँखे उस पर से हठ ही नही रही थी, जब उसके कदम रुके तो चारो तरफ तालिया बज रही थी, चारो तरफ संजू संजू की आवाज आ रही थी, उसने देखा की दूर खडे उसके पापा भी उसके लिये ताली बजा रहे थे, ये सब देख कर उसकी आँखो मे आँसू थे, वो स्टेज के पीछे गया और उसके लिये ताली बजा रहे जय से लिपट गया।

उस दिन संजू बहुत खुश था वो जय को कस्बे के बहार बने अपने पुराने घर ले गया, उसने और जय ने शराब पी, वो बार बार जय को शक्रिया बोल रहा था, संजू ने जय से कहा की तुम मुझे कुछ मानो या ना मानो लेकिन तुम मेरे दोस्त हो दोस्त नही दोस्त से बढकर हो,

‘तुम भी मेरे लिये दोस्त से बढकर हो’, जय ने कहा

तूने आज वो कर दिया, जो मैने कभी सपने मे भी नही सोचा था, मैने कभी उम्मीद नही की थी की मेरी हसी उडाने वाले लोग भी मेरी तारीफ करेंगे एक दिन, थैंक यू जय, तू मेरा दोस्त नही सच मे मेरा किशन है, नशे मे डूबे संजू ने उसे देखा और बोला, ‘जय तुम मेरे किशन हो और मै जीवन भर तेरी राधा बनना चाहती हूँ,

जय ने उसे देखा और बोला ‘हाँ, मै भी तुझे पसंद करता हूँ, चाहता हूँ, लेकिन ये सही नही होगा यार’।

क्यो, क्या प्यार करना गलत हे, अगर हे तो गलत ही सही, संजू ने कहा और जय के नजदीक जाने लगा, जय भी उसकी आँखो मे देखता रहा और दोनो शराब के नशे मे सब कुछ भूलकर उस रात पूरी तरह एक दूसरे मे खो गये और दो जिस्म से एक हो गये।

उस रात के बाद संजू की जिन्दगी एकदम बदल गयी, गुमसुम सा रहने बाला संजू अब चहकने लगा, अब उसकी जिन्दगी मे भी कोई था, शायद जो अधूरापन उसे अखरता था वो अब पूरा हो गया था, वो जय की राधा बनकर बहुत खुश था। वो हरपल जय के साथ रहना चाहता था, उसे एक पल के लिये भी अपने से दूर नही करना चाहता था।

जय बहुत दिनो से ग्रुप मे साइड डांसर था, वो मैन डांसर बनना चाहता था, एक दिन बातो बातो मे उसने संजू के सामने भी अपनी ये हसरत बतायी, संजू के लिये तो जय का सपना उसका सपना था, उसने जय की मैन डांसर बनने की हसरत पूरी करने की ठानी। उसे पता था की ग्रप मे उसकी क्या हैसियत हे, वह शास्त्री के पास गया और उसने साफ कर दिया की अगर मै डांस करुंगा तो जय के साथ वरना नहीं, संजू के अचानक ऐसे मांग से शास्त्री अवाक रह गया, वो अचानक ही एक विकट स्थति मे फस गया, और सोचने लगा की इस परेशानी को हल कैसे किया जाये। धीरे धीरे यह बात ग्रुप के मैन डांसर करन तक पहुची यह सब सुनकर उसे बहुत गुस्सा आया, और वो सीधा शास्त्री के पास पहुचा और बोला, ये साला कल का लोंडे के इतने भाव बढ गये की वो अपनी मर्जी से अपना पार्टनर चुनेगा, अगर इसे डांस ना करना हे तो ना सही कोई और राधा बन जायेगा, तुम टेंशन मत लो’।

‘टेंशन तो लेनी ही पडेगी बेटा, क्योकी तू मैन डांसर रहे या ना रहे इससे कोई फर्क नही पडता लेकिन अगर संजू ने डांस नही किया तो फर्क पडता है वो इस समय ग्रुप की जान है, उसके नाम से हमे शो मिलते हैं, तू समझा कर कुछ दिनो तू पीछे डांस कर ले, मेरे लिये’, शास्त्री ने करन को अपने गले लगाते हुए कहा।

करन को उम्मीद नही थी की उसके साथ ऐसा होगा, लेकिन वो कर भी क्या सकता था, उसे भारी मन से चाचा की बात माननी पडी और वो मैन से साइड आर्टिस्ट हो गया। लेकिन इस सब से संजू
और जय उसके लिये सबसे बडे दुशमन हो गये, और उसने मन ही मन अपने दिल मे चुभते इन कांटो को किसी भी तरह हटाने का निश्चय कर लिया।

लेकिन इस सब के बीच संजू की वजह से जय ग्रुप का लीड डांसर बन गया, और अपने इस प्रमोशन से वो बहुत खुश था, और उसे खुश देखकर संजू उससे भी ज्यादा खुश था। इस सब के बाद ग्रुप मे हर कोइ उनके बारे मे जान गया था, एक दिन शास्त्री ने कहा की क्या चल रहा है ये, जब लोगो को पता चलेगा तो क्या कहेंगे,   

संजू ने कहा ‘कुछ तो लोग कहेगे लोगो का काम हे कहना, लेकिन मे लोगो के कहने पर खुद को तो नही बदल सकता’ संजू फिर मुस्कुराया और बोला ‘चाचा, जो चल रहा हे वो सब जान भी लेंगे तो क्या फर्क पड़ता हे, मै जैसा हूँ, जो हूँ, सब जानते हैं’।

संजू जय के प्यार मे पूरी तरह पागल था, वो अब बिना उसके नही रहना चाहता था, उसका प्यार समय के साथ साथ और बढ रहा था तो जय का प्यार अब ठंडा पडने लगा था, लोग अब उसे जानने लगे थे, और सबके सामने संजू का साथ साथ रहना उसे असहज करने लगा, और वो अब जैसे तैसे उससे दूरी बनाना चाहता था, जय के ऐसे व्यवहार से संजू को भी कुछ ऐसा लगने लगा उसने जय से इस बारे मे पूछा भी लेकिन वो टाल गया।

जय के घरवाले उसकी शादी कराना चाहते थे उन्होने उसके लिये लडकी भी पसंद कर रखी थी और वो जय पर उस लडकी से शादी का दबाव डाल रहे थे। जय भी उस लडकी से शादी करना चाहता था लेकिन वो समझ नही पा रहा था की वो संजू का क्या करे उसे कैसे समझाये इसलिये वो थोडा परेशान रहने लगा। करन जानता था की जय के परिवार वाले उसकी शादी कराना चाहते है इसलिये वो जय के उदास चेहरे को देखकर उसके मन की स्थति समझ गया, उसने जय से पूछा क्या हुआ, जय ने उसे अपनी परेशानी बतायी, करन ने कहा, ‘देख भाई, तुम लोगो के बोलना तो नही चाहिये, लेकिन फिर भी तू उस जनके के लिये अपनी और अपने परिवार की जिंदगी क्यो खराब कर रहा हे, तू समझदार हे और फिर भी बेवकूफ जैसी बात क्यो करता हे यार, अरे जो होना था वो हो गया, तूझे जो लेना था वो तूने ले लिया, तू ग्रुप का मैन डांसर बन गया, अब एक पहचान हे तेरी, छोड ये सब और आगे बढ’

करन की बाते जय के मन मे उतर गयी, और उसने तय कर लिया की अब क्या करना है। अगले दिन जय अपने घर चला गया, संजू उससे मिलने को बैचेन था, उसने फोन भी नही मिल रहा था।

कुछ दिन बाद करन ने संजू को फोन किया और आफिस पर आने को कहा, संजू ने पूछा क्यों क्या बात है,  ‘यार मे बता नही सकता, बस इतना समझ ले की जय आया है बाकी तू खुद आकर देख ले’। संजू जल्दी से आफिस पहुचा वहां उसने देखा की जय सबको मिठाई खिला रहा था, सबको अपनी शादी के कार्ड देकर, उसने बडी खुशी से सबको न्योता दे रहा था, जब संजू ने कार्ड देखा तो वह सन्न रह गया, वो समझ ही लही पाया कि क्या कहे.। जय ने उसे समझाना चाहता था लेकिन वो अपनी आँखो मे आँसू लिए चुपचाप वहाँ से बहार चला गया। जय उसके पीछे गया उसने संजू से कहा ‘क्या करता यार घऱ वाले माने ही नही और मै उन्हे ना नही कह सका’

संजू ने पूछा ‘अगर उन्हे ना नही कर सकता तो मेरे साथ क्या किया तूने, उसे क्या समझू खेल या धोखा’

जय ने कहा, ‘अरे नही, वो तो बस हो गया, तू समझा कर यार वैसे भी मे तेरे साथ शादी तो नही कर सकता था, इतना फार्वड नही हूँ मै। हम दोनो को एक दूसरे का साथ अच्छा लगता था, इसलिये कुछ दिन हम साथ रहे, लेकिन हमेशा साथ नही रह सकते, इसलिये अब अलग हो रहे हैं, बस,

संजू ने उसे गुस्से से देखा और कहा, हाँ बस, और वो चला गया.

उसके जाने पर जय थोडा परेशान सा था वो उसके पीछे जाना चाहता था लेकिन करन ने उसे रोक लिया, ‘जाने दे उसे कुछ देर मे खुद ही समझ जायेगा, अगर तू अब उसे मनाने जायेगा तो वो कभी भी तुझे नही छोड पायेगा’। जय को करन की बात सही लगी और उसने संजू को नही रोका

जय से बात करके करन संजू के घर पहुचा,  संजू घर पर चुपचाप लेटा था, करन ने संजू से बात की और उसे जय के खिलाफ खूब भडकाया, उसे यकीन दिला दिया की जय ने उसका इस्तमाल किया और फिर उसे एक झटके मे ही अपनी जिंदगी से बहार निकाल दिया. संजू के मन मे भी करन की बात घुस गयी,  करन के जाने के बाद वो काफी देर बिस्तर पर लेटा रहा और कुछ सोचता रहा, ना जाने उसके दिमाग मे क्या आया, वो अचानक उठा और उसने फोन उठाया और जय को काल किया, ‘हैलो जय’,

‘हां संजू बोल, अरे यार मै तो खुद तुझे काल करना चाहता था लेकिन तू ऐसे गुस्से मे चला गया, सारी यार लेकिन तू भी समझदार हे और समझ सकता हे की तेरा मेरा साथ एक एक्सीडेंट था, और मे तेरे साथ तो पूरी जिंदगी नही गुजार सकता था, हमारे रिश्ते का कोई भविष्य नही है यार’, जय ने कहा

‘हाँ समझता हूँ, कोई भविष्य नही है, लेकिन वर्तमान तो है, संजू ने कहा. क्या तू आज आखिरी बार मुझसे मिलेगा? उसी जगह जहाँ हम पहली बार एक हुए थे, बस आखिरी बार, वैसे भी इसके बाद तो तू किसी और का हो जायेगा।

जय ने कुछ सोचा और कहा, ‘ठीक हे मैं आ जाऊंगा’,

‘आ जा, मै तेरा इंतजार करुंगा, मै तेरी पसंद की शराब भी ले आया हूँ, तेरी शादी भी तो सेलिब्रेट करनी हे’, संजू हसते हुए बोला

संजू की ऐसी बाते सुनकर जय ने राहत की सांस ली, उसके दिल से एक बोझ सा उतर गया।

शाम को जय संजू के कस्बे के बहार वाले मकान पर पहुँचा, वहाँ संजू पहले से ही उसका इंतजार कर रहा था, जय ने संजू को देखा, वो मुस्कुराया, लेकिन वो उससे नजरे नही मिला पा रहा था, संजू उसकी झुकी नजरो को देखकर उसकी परेशानी समझ गया, वो बोला, ‘ज्यादा परेशान मत हो यार, मैं समझता हूँ, छोड ये सब, और आखिरी बार ये रात अपनी राधा को दे दे’,

दोनो अंदर चले गये, संजू ने बोतल खोली, और दोनो के पैग बनाये, दोनो गिलास टकराये, ये जाम है तेरी आने वाली खूबसूरत जिंदगी के नाम, संजू पैग बनाता रहा, और जय को पिलाता रहा,

‘तू नही पी रहा यार’, जय ने पूछा, नही यार, ‘मै तो पहले ही तेरे प्यार के नशे मे डूबा हूआ हूँ, अब और कोइ नशा मुझ पर नही चढ पायेगा’, संजू ने हलके से मुस्कुराते हुए कहा और आज तो तेरे साथ आखिरी रात हे, इसलिये मै पूरे होश मे रहना चाहता हूँ।

धीरे धीरे जय पर शराब ने अपना असर दिखाना शुरु कर दिया, और वो नशे मे चूर हो गया, संजू लगातार उसकी आँखो मे देख रहा था, जय ने कहा क्या देख रहा हे ऐसे,

‘तूने मेरे साथ ऐसा क्यो किया, मुझे धोखा क्यो दिया?....... क्यो मुझे अपना बनाकर अपनी जिंदगी से बहार कर दिया?, वो भी एक लडकी के लिये, देख क्या कमी हे मुझमे?, संजू उसकी नजरो मे देखकर बोलता रहा

जय नशे मे बहक रहा था, ‘अबे चल साले, क्या तेरे लिए मऐ ये सब छोड दूँ,  पूरी जिंदगी लोगो की हसी और ताने सुनता रहूँ, नही यार, तू समझा कर, हमने जो किया वो इस लिये की हम दोनो को ये पसंद था, इसका मतलब ये तो नही की सारी जिंदगी मै ये ही करता रहू, देख  तू चाहे कुछ कर लेकिन मुझे अपनी जिंदगी जीनी है, और तू भी इतना परेशान मत हो, मै ना सही तो कोई और सही, तुझे बहुत लडके मिलेंगे यार’

संजू उसे गौर से देखता रहा और बोला, शायद तेरे लिये वो सब खेल था, लेकिन मेरे लिये नही

‘अच्छा हाँ मेरे लिये वो एक खेल था, बस ठीक हे अब तक तेरे लिये खेल नही था तो अब खेल समझ ले, और आज की रात जो चाहे वो खेल कर ले तू’, जय कपडे उतारता हुआ बोला।

संजू ने जय को देखा गिलास मे रखी हुई शराब पी और जय को गले लगा लिया, ‘जय मे कल भी तुझसे प्यार करता था, आज भी करता हूँ, और हमेशा करता रहूँगा’, जय उसे देखकर मुस्कुराया और बोला, लेकिन मेरा प्यार आज ही खत्म हो जायेगा, संजू ने फिर उसकी आँखो मे देखा और उसे चूमने लगा। हाँ, तेरा प्यार और तू दोनो आज ही खत्म हो जायेंगे, संजू ने एक झटके मे ही अपने हाथ मे ली हुई बोतल फोडी और जय के पेट मे घुसा दी, जय की चीख निकलने लगी तो संजू ने उसके होटो से अपने होठ मिला दिये, और फिर से वार किया, इस बार जय दूर जा गिरा, संजू ने उसे नीचे की तरफ देखा और कहा, अपनी मर्दानगी पर इतरा रहा हे ना तू, अब ना ये मर्दानगी रहेगी और ना ही तू, और इस बार उसने जय के नीचे वार किया, अब जय अपने होश खोकर नीचे गिर पडा, वो अब भी कहरा रहा था, अपनी आँखो मे आँसू लिये संजू उसे देख रहा था, वह उसके पास गया, और बोला तू मेरा नही तो किसी का भी नही, और संजू ने जय पर फिर वार किया जय की चीख निकल गयी और इस चीख के बीद वो शांत हो गया, लेकिन संजू उस पर लगातार बार करता रहा

थोडी देर बाद वो रुक गया, उसने वहाँ पडे जय का सिर अपनी गोदी मे रखा, उसका चेहरा साफ किया, उसे चूमा और पास पडी  टूटी बोतल को उठाया और आँखो मे आँसु लिये जय को देखा और देखता रहा।

सुबह लोगो ने कमरे का गेट खुला देखा, उनहे लगा की शायद गलती से गेट खुला रह गया है. वह वहां गये तो देखा संजू बैठा हे और उसकी गोदी मे सिर रखे हुए जय लेटा हुआ हे, जय के पूरे बदन से और संजू के हाथो की कटी हुई नसो से खून निकल कर चारो तरफ फैला हुआ था, और उनके पास ही खून से खून से फर्श पर लिखा हुआ था जय संग संजू, कृष्ण संग राधा, .... हमेशा हमेशा के लिये एक हो गये.... और शायद पूरी हो गयी थी हमेशा अधूरेपन मे जीने वाले संजू की अधूरी कहानी ।

 

 

( दोस्तो आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी, आप कहानी पर कामेंट करके , कहानी को रेटिंग देकर या निजी तौर पर मुझे मैसेज करके अपनी अमूल्य राय दे सकते हैं। मुझे आपके अनमोल विचारो का इंतजार रहेगा।)

                                                                                                                                                                                      (अरूण गौड़)

                                                                                                                                                                        Email- arungaud00@gmail.com
                                                                                                                                                                         



Vote Add to library

COMMENT