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@dawriter

मैं बहुत खुश था और फिर…

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dhirajjha123 by  
Dhiraj Jha

कल ट्रेन पकड़ी और पहुंच गया उस जिले में जहाँ उसका घर है । फिर वहाँ से बस ले कर उसके शहर की तरफ रुख कर लिया । भई जाता भी कैसे ना अब नही रहा जाता उसके बिना । ये बंदिशें सहना सच्चा प्रेम कर के भी चोरों जैसा अनुभव करना भाई बहनों की जली कटी बातें सुनना ये सब अब नही सहा जाता इसीलिए सोच लिया कि अब तो प्राणप्यारी के पिता जी से मिल कर सारी बात कह ही देनी है । मन बिल्कुल नही डरा प्यार की ताकत है भई बन्दे को झुकने नही देती ।

मैं भी उसी हिम्मत से भरा हुआ पहुंच गया प्राणप्यारी के घर । वहीं से उसे फोन किया, उसने फोन उठाते ही शेरनी की तरह दहाड़ा “कितनी बार कहा है मम्मी घर पर होती हैं तो ऐसे फोन मत किया करो, पकड़े गए तो फोन छीन लेंगी । तुमको तो फर्क भी नही पड़ेगा हम तड़पते रह जाऐंगे ।”

हमने भी तैश में आ कर एक डायलाॅग घुमा के मारा “उसी तड़प को खत्म करने आऐ हैं तुम्हारे सहर, तुम्हारे पप्पा से तुम्हारा हाथ मांगने ।” हमारी बात सुनते ही प्राणप्यारी ऐसे डर गईं जैसे समाजवाद कमल का फूल देख कर चुनाव के नतीजे सोच कर डर जाता । मगर हम काहे डरें ना हम समाजवाद हैं ना उसके पप्पा कमल का फूल फिर काहे का डर । सुना नही क्या प्यार किया तो डरना क्या ?

“आप पगला गए हो क्या ? खुद भी मार खाओगे हमें भी खिलवाओगे । मेरी मानों हमको अपने सुंदर मुख का दीदार करा दो और इसे सही सलामत ले कर वापिस लौट जाओ । हम पप्पा का मूड देख कर उनसे बात करेंगे ना ।” प्राणप्यारी का मुझ पर इस तरह अविश्वास देख कर मेरे अंदर का ब्रहम्णत्व हिदुत्व देशभक्ती सब जाग गई । हमने कसम खा ली कि न अब तो सर्जिकल एस्ट्राईक हो कर रहेगा भले ही पिट कर आना पड़े । हमने फोन काट दिया और बढ़ गए ससुर जी की दुकनिया की तरफ । नोटबंदी का असर उन पर भी साफ दिख रहा था । गल्ले पर बैठे मक्खियां उड़ा रहे थे । शकल से तो भोले भाले लग रहे थे अब पता नही अंदर से कैसे हों । पर अब तो ओखली में मूड़ी धर दिए थे धमक से काहे डेराते ।

जाते ही चर्णस्पर्श किए । उन्होंने चौंक कर देखा फिर बोले “खुस रहिए, पर हमने आपको पहचाना नही आपका परिचय ?” मुंह से निकलने ही वाला था हम आपके दामाद मगर फिर हमको ख़याल आया कि मार खाने में इतनी जल्दबाजी करना सही नही है ।

कुछ सोच कर हमने कहा “सर, हम भारत सरकार की तरफ से सर्वे करने आए हैं ।”

“सर्वे ! कैसा सर्वे ?” ससुर जी चौंक गए

“जैसा की आप देख रहे हैं कि आज कल दहेज प्रताड़ना से लेकर बेवजह की बात पर तलाक तक में एक लड़की पिसती आ रही है । भारत सरकार इसी तरह के मामलों को कम करने के लिए एक सर्वे कर रही जिसके तहत हम उन सभी घरों में जाते हैं जिनके यहाँ बेटियाँ हैं और उनके माँ बाप के सामने (“माँ बाप के सामने” पर मैने सबसे ज़्यादा ज़ोर दिया) उनसे कुछ सवाल पूछेंगे जिससे सरकार अंदाज़ा लगा सके कि कहीं इन सब घटनाओं के पीछे माँ बाप की खराब परवरिश ज़िम्मेदार तो नही ? कहीं उनसे उनकी मर्ज़ी के खिलाफ तो शादियाँ नहीं करवाई जा रहीं ? कहीं आपने अपनी बेटिओं को सिर्फ बेटियाँ समझ कर उनके मन को तो नही मारा ?” शायद जोश जोश में हम ज्यादा ही बोल गए । इसका अंदाज़ा मुझे तब हुआ जब मेरी नज़र उनकी नज़रों से मिलीं जो मुझे घूर रही थीं ।

“हमने कभी ऐसे सर्वे के बारे में सुना नही पर फिर भी आपकी जानकारी के लिए बता दें ना हमने कभी अपनी बेटियों का मन मारा है, ना उनकी परवरिश में कोई कमी है । अच्छा खिलाया अच्छा पहनाया अच्छी शिक्षा दी अपनी तरफ से हर संभव सुविधा और सहूलतें दी हैं उन्हें ।”

“ये तो अच्छी बात है तब तो आपको कोई दिक्कत नही होगी अपनी बेटियों को बुलाने में और मेरे उनसे एक दो सवाल पूछने में ?” ससुर जी का पारा मानों सातवें आसमान पर था मगर शायद उनहोंने सोचा कि जब मैं सही हूँ तो फिर मिलवाने में क्या दिक्कत । बस फिर क्या था वो घर की तरफ चल दिए और पीछे पीछे हम भी लपक के चल दिए । घर पहुंचते उनहोंने अपनी बेटियों को बुलवाया पर उस वक्त उनकी एक ही बेटी यानी हमारी प्राणप्यारी ही घर पर थीं तो बस वही आईं । उन्हे मेरे जब्बर आईडिए का तनिक अंदाजा नही था इसलिए जब मुझे अपने पप्पा संग देखा तो उनकी तो मानो बेहोशी वाली हालत हो गई पर खुद को संभालते हुए वो अपने पप्पा के सामने आईं । तब ससुर जी ने सारी बात बताई । हमारी प्राणप्यारी जिस तरह हमें घूर रही थीं हमें पूरा विश्वास हो गया कि अगर हम अकेले मिल जाऐं तो ये हमें कच्चा ही चबा जाऐंगी । पर पप्पा के सामने तो अंजान बनाना ही था ।

“ये है मेरी बड़ी बेटी पूछिए क्या पूछना है ।” इस वक्त मुझे वैसा ही लग रहा था जैसे एक हिरण को दो आदमखोरों के बीच फंस कर लगता है । मगर हम भी आज मूड में थे । हमने भी तपाक से प्राणप्यारी से अंजान बनते हुए उनके बारे में मामुली जानकारी ली और फिर आँखों में देखते हुए एक सवाज दाग दिया ।

“ये आपकी आँखों के नीचे काले घेरे क्यों हैं ? क्या आपको नींद नही आती या कोई परेशानी है या आप रोती बहुत हैं ?” मैने इधर सवाल पूछा और उधर ससुर जी गुर्रा पड़े ।

“ये कैसा सवाल है ? उसे भला क्या परेशानी होगी ? मेरी बेटी है क्या मुझे इतना भी नही पता होगा कि परेशान है या नही ? सारा दिन हंसती रहती है । वो भला क्यों परेशान होने लगी ।”

“यही तो दिक्कत है सर, माँ बाप को हमेशा लगता है कि बच्चे खुश हैं पर कभी वो ये नही सोचते कि कभी बैठ कर बच्चे से पूछ ही लें कि तुम ठीक तो हो कोई दिक्कत तो नही कोई बात मन में है तो कहो । उन्हे अंदाज़ा ही नही होता कि उनकी बेटी के चेहरे कि मुस्कुराहट झूठी भी हो सकती है ।” ससुर जी अब थोड़े नर्म दिख रहे थे ।

“बताओ बेटी कोई परेशानी है तुम्हे ? कोई बात कहनी है ?” प्राणप्यारी जी अब असमंजस में थीं कि क्या कहें, कभी वो मेरा मुंह देख रही थीं तो कभी पप्पा का ।

“मैं बताता हूँ इन्हे शायद किसी से प्यार है । और यह बात बात ये आप से कह नही पा रहीं क्योंकि ये आपसे डरती है । वो पिता जिसकी क्षत्रछाया में बेटी हमेशा भयमुक्त महसूस करती रही आज वो आपसे डर रही है ।” इतना बोलना था कि ससुर जी रुद्र रूप में आगए ।

“तुम्हारा दिमाग खराब है लड़के । मेरी बेटी ऐसा नही कर सकती । उसकी शादी वहीं करेंगे जहाँ हम चाहेंगे । बताओ बेटी ऐसी कोई बात नही ना है ।” इस वक्त मुझे डरना चाहिए था मगर मुझे हंसी आ रही थी ज़ोर से जिसे मैं रोक नही पा रहा था । फिर भी संभलते हुए बोला

“कमाल है सर कनपट्टी पर पिस्तौल रख कर सच्च बताने को कहते हैं । इसीलिए तो डरती है आपसे । अच्छा सर ये सब छोड़िए आप यह बताइए आपने कभी पेड़ लगाया या लगवाया है सामने खड़े रह कर ?”

” अब ये कैसा सवाल है ? अब ये ना कहना कि तुम पेड़ों का सर्वे भी कर रहे हो कि किसने कितने पेड़ लगाए । वैसे हाँ बहुत पेड़ लगवाए और लगाए हैं ।”

“अच्छा तब तो आपने ये ज़रूर देखा होगा कि जब किसी पौधे को जबरदस्ती एक जगह से उखाड़ कर किसी दूसरी जगह फेंक दिया गया हो तो वो पौधा मुर्झाता है और फिर सड़ कर सूख जाता है ।”

“ये तो आम सी बात है कि जब पौधा उखाड़ कर फेंक देंगे तो मुर्झा कर सूख ही जाएगा ।”

“पर क्यों ? वो तो ज़मीन के संपर्क में ही है फिर भी क्यों सूख जाता है ?”

“अरे तुम पागल हो क्या ? पहले ज़मीन के अंदर था, उसे उसके मुताबिक पानी खनिज सब मिलता था जब उखाड़ा कर फेंका तो सतह पर आगया जहाँ उसे उसका भोजन नही मिला और वो सड़ गया ।”

“सर यही तो कहना चाह रहा था । एक पौधा जिसे उखाड़ दिया तो सूख गया तो वो लड़की कैसे जी पाएगी कैसे खुश रह पाएगी कैसे ना मुर्झाएगी जब आप उसे उस लड़के के दिल से निकाल कर किसी और के घर फेंक दोगे जिसके दिल में उसे प्यार मिलता है सुकून मिलता है जिसे उसने अपना जीवनसाथी मान लिया है । माना आपको उस लड़के कि परवाह ना हो मगर अपनी उस बेटी की तो होगी जिसे आपने नाज़ों से पाला है ।” ससुर जी अब शांत थे । उन्होंने मेरी प्राणप्यारी यानी अपनी बेटी की तरफ धीरे से ऐसे देखा मानों पूछ रहे हों मैं समझ गया अब तुम बताओ कोई है तो । प्राणप्यारी ने भी पप्पा का इशारा समझा और कुछ बोलने की बजाए मेरा हाथ पकड़ लिया ।

ससुर जी सब समझ गए की आखिर माजरा क्या है । क्यों ये सारा शहर छोड़ कर उनके ही घर सर्वे करने आया । ससुर जी हमारी तरफ मुस्कुराते हुए बढ़े और हमारा हाथ पकड़ कर एक दूसरे के हाथ में दे दिया । ये पल मेरी ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत पल था जिसे मैं वहीं रोक देना चाहता था आज मेरा सपना पूरा हो गया था और प्राणप्यारी तो मानो सातवें आसमान के पंद्रहवें माले पर थी । मैने प्राणप्यारी को गले से लगा लिया । ‘मैं बहुत खुश था और तभी’ रूममेट ने मुझे हिलाते हुए कहा “उठ जाओ धीरज भाई आज ऑफिस नही जाना क्या ? साढ़े नौ हो रहे हैं ।” मैं हड़बड़ा कर उठा आँखों को मला पर ये क्या यहाँ तो कोई नही था । ना ससुर जी ना प्राणप्यारी । मेरा पूरा हुआ सपना एक सपना ही था । प्राणप्यारी मेरी होते होते रह गई ।

अब मैं समझ ही नही पा रहा था हसूं या रो दूं । तभी मैं सोचूं मैं इतना कुछ कह गया और ससुर जी ने मेरी धुलाई क्यों नही की ।



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