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@dawriter

बाबुल ना बिहाओ मोहे ओ संग

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उसके चेहरे की हँसी और ख़ुशी एक अलग ही कहानी बयां कर रही थी। आज तो जैसे उसकी खूबसूरती को चांदनी ने खुद अपने हाथों से सजाया हो, ऐसी बला की खूबसूरत लग रही थी वो। हाथों की मेंहदी, चूड़ी, कलीरे आने वाले पलों के गवाह बनने जा रहे थे।

“कितनी खुश लग रही है न आज मीरा। आज उसके चहरे की हँसी में एक अलग ही नूर है। भगवान करे यह हमेशा ऐसे ही खुश रहे।”

“खुश तो वो होगी ही क्यूंकि अब उसने सही कदम उठाया है। और भगवान् तो पहले भी उसको खुश रखना चाहता था। पर एक बाप ने अपनी बेटी की खुशियाँ छीन ली।”

मीरा के कमरे की खिड़की से रोशन लाल जी और उनकी पत्नी बीना अपनी दुल्हन बनी बेटी को निहार रहे थे। कि तभी अचानक से उन्होंने अपनी बेटी के चेहरे पर आयी आह देखी तो दोनों उसकी ओर दौड़े।

“ संभल के पहन बेटा। ला मैं पहना देती हूँ।” बिनाजी अपनी बेटी को चूड़ियां पहनने के लिए आगे बढ़ी। बेटी का हाथ, अपने हाथ में ले उन्होंने उसको चूड़ियां पहनना शुरू ही किया था कि अचानक उनकी नज़र मीरा के हाथ पर एक निशान पर गयी। बीना जी की आँखें उस निशान को देख नम हो गईं।

मीरा ने झट से अपना हाथ पीछे खींचा और बोली “ माँ अब इस निशान की मेरी जिंदगी में कोई अहमियत नहीं रही। अब ये निशान मुझे और पीछे नहीं खींच पायेगा। माँ पिछले 4 सालों ने मेरी जिंदगी को बदल दिया है। अब मैं अपने अतीत को पीछे छोड़ केशव के साथ आगे बढ़ गयी हूं। आज आपकी बेटी किसी के एहसान की मोहताज नहीं है । उसके अपने उसके साथ हैं। माँ, ये आप भी मानती हैं कि अपनों के साथ से बढ़कर एक औरत को कुछ नहीं चाहिए होता। उसके अपनों का साथ ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। और मुझे ख़ुशी है कि मेरी ये ताकत अब मेरे साथ है। है न बाबा!?”

मीरा ने अपनी माँ की तरफ से मुँह मोड़ अपने बाबा को देखना चाहा पर वो वहां नहीं थे।

“ माँ बाबा कहाँ गए अभी तो यहीं थे।”

“ अब तेरे बाबा बदल गए हैं, छोरी। न देख पाए होंगे तो थाहरा ये निशान। अब थाहरी जरा सी भी आह उनको तोड़ देती है। थाहरे साथ जो कुछ भी हुआ उसके लिए न माफ़ कर पाते हैं वो खुद को अभी तक। आज भी एक डर उनके सीने पे साँप की तरह लोटता रहता है। तू तो जाने है अपने बाबा को।”

“ माँ केशव मुझे बहुत खुश रखेगा। वो मुझसे प्यार करता है। माँ आप तो जाने हो उसने मुझे तब अपनाया है जब मैं हर तरफ से टूट चुकी थी। हार चुकी थी। किसी पर भी भरोसा न रह गया था मुझको। आप लोगो के साथ साथ खुद से भी नफरत कर बैठी थी। और तब केशव ही था जिसने मुझे वापस बुलाया जिंदगी की ओर। मेरी खुशियों की ओर। मेरे परिवार की ओर। आज अगर आपकी बेटी आप लोगो के सामने ज़िदा है, हँस रही है अपने परिवार के साथ है तो वो बस उसकी ही बदौलत है माँ। आपके आँसूं और बाबा का डर केशव का अपमान कर रहे हैं माँ। आपको उस पर भरोसा करना होगा।”

“ जाने हूँ मैं छोरी, और तू जो बोल रही है उस बात को माने भी हूँ। पर तू क्या जाने माँ बाप के कलेजे को। दूध का जला छांछ भी फूख फूख कर पीवे है। तू तो हमारी बेटी है। दुबारा न बर्दाश्त हो पायेगा छोरी वही सब। भरोसा है मने भी उस छोरे पर। देखा है मने भी उसका प्यार तेरे लिए। पर भला तो वो कमीना राकेश भी था न।”

बीनाजी ने इतना बोला ही था कि मीरा ने माँ को टोका” माँ आज नही, आज नहीं “।

मीरा ने माँ के आंसू पोछे और दोनों माँ बेटी एक दूसरे के गले लग गयी।

“ अरे वाह बड़ा लाड हो रहा है माँ बेटी में। कभी मुझे भी इतना प्यार कर लिया करो। छोरा हूँ मैं तुम्हारा माँ, पर सारा प्यार अपनी छोरी को ही देना तू। अच्छा है, ये चंटो माई जा रही है इस घर से अब फिर तुम किसे प्यार करोगी। कर लो कुछ और घंटे इसको प्यार, लुटा लो अपनी ममता, फिर यही बेटा और यही तहरा प्यार।” मीरा के भाई, ब्रिजेश ने अपनी माँ और बहन के कंधे पर हाथ रखा तो वो दोनों हँसती हुई उसके गले लग गयी।

“ माँ बाबा कहाँ है, वो कुछ लोगो का बकाया देना। बाकि सब इंतज़ाम भी हो गया है। बस एक बार बाबा देख लेते तो। मैंने सब देखा कहीं दिख नहीं रहे हैं। कहीं बाहर गए है क्या किसी काम वास्ते ?” ब्रिजेश ने माँ से पूछा

“ ढूंढ तो छोरा अपने बाबा को अभी तो यही थे न जाने कहाँ गए। बोला भी नहीं कुछ। थोड़ा परेशान भी लाग रहे थे। ढूंढ जा।” बीना जी ने अपने बेटे की हिदायत दी ।

ब्रिजेश कमरे से निकल अपने पिता को ढूंढने लगा। हर जगह देखा पर! “क्या पता केशव जीजू से न मिलने गए हों, उनके  कमरे में भी देख लेता हूँ।” ब्रिजेश ने मन ही मन बुदबुदाया और केशव के कमरे की ओर चल पड़ा।

कमरे की खिड़की खुली थी उसने अंदर झाँका तो उसके चेहरे पर एक मुस्कान आयी।” लो ये रहे बाबा, मुझे लग ही रहा था कि जमाई की क्लास ले रहे होंगे। बाबा भी ना।” ब्रिजेश फिर से बुदबुदाता हुआ एक कदम बढ़ाने को ही था कि ठिठक गया। रोहन लाल जी केशव के पैर छूने को झुके। ब्रिजेश ने फिर से पैर उठाया ही था कि वो फिर रुक गया। अब की बार वो खिड़की पर ही खड़ा हो देखने लगा की क्या हो रहा है अंदर कमरे में।

“ बाबा ! नहीं बाबा, ये क्या कर रहे हैं आप बाबा। क्यूँ मेरे सर पर पाप चढ़ा रहे हैं। आप मेरे पिता सामान है बल्कि मेरे भी पिता ही हैं। ऐसा न कीजिये की जिंदगी भर खुद को माफ़ भी न कर पाऊं। क्या भरोसा नहीं है आपको मुझ पर या अभी भी आप को मेरे प्यार और क़ाबलियत पर शक है!?” केशव ने रोशन लाल जी से कहा ।

“ न जवाई जी, ऐसा न कहो मने आप पे अब अपने से ज्यादा भरोसा है। ये तो मैं अपनी उस गलती की माफी मांग रहा हूँ जो मैंने बरसों पहले की और जिसकी सजा मेरी बेटी को मिली। आपका पिता बनने के काबिल न हूँ मैं। मैं तो अपने बच्चों का पिता न बन सका। अपनी ही बेटी को जिस बाप ने नरक ने झोंक दिया हो वो कहाँ से बाप कहलाने के लायक है। वो बेचारी रोती रही, पर में बेदर्द उसकी एक आह भी नहीं सुन पाया और! (कुछ सेकंड का विराम) आपको तो मरवाने की पूरी तैयारी ही कर दी थी वो तो भला हो भगवान की पाप न हो पाया, वरना किसी को मुँह न दिखा पाता मैं।” रोशन लाल जी इतना बोल फबक के रो पड़े।

ब्रिजेश खिड़की से सब देख रहा था वो भाग कर अपने पिता को गले लगाना चाहता था लेकिन आज उसने खुद को रोक लिया क्यूंकि आज वो जनता था कि केशव उनके साथ है। और केशव ने भी उसे निराश न नहीं किया। उसने रोशन लाल जी को गले से लगा लिया

“ बाबा जो हुआ सो अब बीत चुका है, बिता हुआ एक बुरा सपना समझ के सब भूल जाते हैं न। हम सब के आगे अभी जिंदगी पड़ी है। आने वाली नयी जिंदगी की खुशियां हमको बुला रही हैं। क्यूँ  पुराने वक़्त की कड़वी यादों को याद कर अपने आज की खुशियों को ग्रहण लगाना। मुझे आप से कोई शिकायत नहीं है।”

“ ना जमाई जी गलती तो मेरी ही है, मैंने अपने घमंड और समाज में अपनी झूठी इज्जत के लिए अपनी ही बेटी की खुशियां छीन ली। मुझे आज भी याद है वो दिन जब मैंने थाहरे को और मीरा को एक साथ पहली बार पकड़ा था। मैंने छोरी पर हाथ तक उठा डाला था। वो बेचारी रोती बिलखती रही । अपने प्यार की दुहाई देती रही। पर माहरे ऊपर तो अपनी ऊँची जात पात का भूत सवार था। उसकी पढ़ाई छुड़वा दी। मने आज भी याद है

 ‘तन्ने कॉलेज पड़ने के लिए भेजा था कि इश्क़ लड़ाने को।माँ बाप अपनी बेटी ने पढ़ा लिखाएं किस वास्ते की वो छोरी बाद में कॉलेज में इश्क करती फिरे। पढ़ाएं तो परेशानी न पढ़ाएं तो हम ख़राब माँ बाप। और तो और वो लड़का हमारे समाज से भी न है। अभी अगर मैं अपनी मर्ज़ी से थहरी पढ़ाई रुकवा कर शादी कर देता तो मैं एक ऐसा पिता हो जाता जो अपनी ही छोरी को आगे नहीं बढ़ने देना चाहता। और अगर छोरी कॉलेज के दूसरे साल में किसी छोरे के चक्कर में पड़ जावे तो वो ठीक है क्यूंकि हक़ है उसको अपनी जिंदगी जीने का। हम माँ बाप का तो कोई हक नहीं है। मीरा की माँ आज से इसका कॉलेज बंद। यह लड़की घर के बाहर नहीं जाएगी।’

 सब कुछ दिन शांत रहा। पर मैं रोज़ अब मीरा को तुमसे अलग कैसे करूँ सोचता रहा। आनन फानन में रिश्ता तय भी कर दिया। मीरा से किसी ने पूछा भी नहीं। और दो महीने बाद की शादी की तारीख भी निकालवा ली। हमारे समाज के एक जानने वाले ने रिश्ता बताया है ये बात सोच मैंने लड़के के बारे में ज्यादा पुछताज भी नहीं की।  एक बार ब्रिजेश् को मीरा से तुम्हारे साथ भाग जाने को कहते सुना और तब मीरा बोली थी “ नहीं बीरू, केशव कहता है कि माता पिता की हमारी जिंदगी में अपनी एक ख़ास जगह है और वो जगह कोई नहीं ले सकता। वो रिश्ता जो बड़ों के आशीर्वाद के बिना शुरु होता है वो ज्यादा समय तक नहीं चल सकता। वो मुझसे भाग कर नहीं बाबा की के आशीर्वाद से शादी करना चाहता है।” इतना सुन कर भी मैं नहीं जान पाया कि आप ही मेरी छोरी लायक हो। रोज़ आप मेरे आगे गिड़गिड़ाते और कहते की आप मीरा के बिना नहीं जी सकते। पर मैं अभागा बाप तस से मस नहीं हुआ।

और कहीं आपकी वजह से मीरा की शादी में कोई विघ्न ना आये इसलिए गांव के कुछ छोरों को आपकी पिटाई करने भी भेज दिया। मुझे बाद में पता चल की उन्होंने आपको इतना पिटा की आप दो महीने अस्पताल में बेसुद पड़े रहे थे।

शायद किसी निर्दोष के साथ गलत करने की मेरी गलती की ही सजा भगवान ने मुझे न दे कर मेरी बेटी को दे दी। पर क्यूँ? उसका क्या दोष था? शादी बाद वो दोनों मुम्बई में जा बस गए। मैं तो अपने इसी घमंड में था कि अपनी छोरी के लिए भगवान विष्णु सा वर ढूंढा है। ऊँची जात का, अपने समाज का। परिवार का नाम है। पढ़ा लिखा है। सुन्दर सुशील है। और क्या चाहिए होता है एक बाप को अपनी बेटी के वर में।

मीरा हमसे नाराज है तभी हमसे बात नहीं करती। पर जब खुशियां उसके दरवाजे पर दस्तक देंगी न तब वो भी खुश हो जायेगी और मान लेगी की उसके बाबा ने जो कुछ भी किया उसकी खुशी के लिए किया। पर कितना गलत था मैं!

वो दिन भूले नहीं भूलता जब मुम्बई से फ़ोन आया था कि आपकी बेटी ने आत्महत्या करने की कोशिश की है और आप जल्दी आ जाएं। वहां गए तो मीरा एक जिन्दा लाश सी नज़र आई। गहरे सदमे के कारण वो अपनी सुधबुध खो चुकी थी। पर तब डॉक्टर ने बताया कि उसके शरीर पर जख्मो के निशान है। हम हैरान थे की इतनी बड़ी बात हो गयी और हमारे जवाई कहीं नहीं हैं। पर पुलिस ने बोला की वो अकेली ही रह रही थी उनके पति तो विदेश में हैं। कुछ दिन बीत गए मेरी उम्मीद के मुताबिक अब तक तो राकेश को आ जाना चाहिए था पर वो नहीं आया और फिर शुरू हुआ मेरा सच से सामना।

राजेश कोई विदेश नहीं गया था, वो वही था उसके और उसके माँ बाप पुलिस के साथ मिल कर हमें धोखा दे रहे थे। राकेश किसी और लड़की से प्यार करता था पर किसी कुंडली में दोष के कारण उसको पहले किसी और लड़की से शादी करनी थी ,तब ही वो उससे शादी कर सकता था। और इसीलिए उसने मेरी बेटी की जिंदगी बर्बाद कर दी।”

रोशन लाल जी फबक कर रो पड़े। केशव ने उनको फिर से संभाला “ बाबा छोड़ दीजिए पुरानी यादों को। जो बीत गया सो बीत गया”।

“ हां सब बीत तो गया है। भगवान् की कृपा रही हम पर जो उसने माफ़ कर दिया। शायद कभी कोई बड़ी भलाई की होगी। जो आज हम ये सुख देख पा रहे हैं पर माहरी गलतियों की सजा तो भुगती न माहरी छोरी ने। आज भी उसके हाथ पर जब वो जाली हुई सिगरेट के निशान देखता हूँ तो (गुस्से के भाव) खून खोल जाता है मेरा। उसके दिल और दिमाग पर जो चोट पड़ी थी कहीं न कहीं उन सबका दोषी उस कमीने के साथ साथ मैं भी हूँ। मैंने देखा है अपनी बच्ची का दर्द उसकी शादी से पहले, और फिर उसके हमे उस हालात में मिलने के बाद।”

“ हाँ बाबा जब मैं भी उससे मिला था तब वो वैसी मीरा नहीं थी जिसको मैं जानता था। चंचल, शोख, हँसमुख, पर फिर भी शांत और सौम्य। कॉलेज का हर लड़का उस पर मर मिटने को तैयार रहता था,उसके इन्ही गुणों की वजह से। मैं था वो खुशनसीब जिसको उसका प्यार मिला था। उसको उस हाल में देखा तो मैं भी खुद को ही कोस रहा था कि शायद अगर मैं उसकी जिंदगी में न आता तो आज उसकी जिंदगी ऐसी न होती। पर बाबा पहले आपने जो कुछ भी किया सो किया पर उसके बाद आपने अपनी बेटी को इन्साफ दिलाने और उसको उसकी जिंदगी में वापस लाने के लिए भी कम जद्दोजहद नहीं की। आपने अपनी जी जान लगा दी थी उसके कसूरवारों को सजा दिलाने के लिए।”

“ हां जमाई जी और तब मुझे पता चला की क्या होता है समाज का मतलब और क्या होता है रुतबे का होना। वो समाज जिसमे अपनी साख के लिए मैंने अपनी बेटी की खुशियों की परवाह नहीं की उसने बुरे वक़्त में साथ छोड़ दिया। न जाने कैसी कैसी बातें की मेरी बेटी के बारे में। मेरी सब जानपहचान सब साथ छोड़ आगे बढ़ गयी थी। पर मैंने सोच लिया था कि मैं वही गलती नहीं दोहराऊंगा। मैंने बिना किसी के साथ के अपनी बेटी के हक़ के वास्ते लड़ने का फैसला कर लिया था।”  

“ हां, बाबा। और फिर एक दिन आपने मुझे भी ढूंढ लिया और मीरा की जिंदगी में लौटने को कहा। भले ही बाबा पहले आप की वजह से मुझे और मीरा को एक दूसरे से दूर होना पड़ा हो पर फिर आप ही थे जो अपनी बेटी के लिए दुनिया से लड़ गए थे और आज जो हम साथ हैं वो भी आपकी वजह से। बाबा मीरा अभी तक नहीं जानती की आप थे जो मुझे ढूंढ कर उसकी जिंदगी में वापस लाये थे। उसे तो आज भी लगता है कि हम पहली बार जो दिल्ली में मिले थे वो एक इत्तेफ़ाक था। पर वो तो आपने तय किया था। सब आपने ही बताया था मुझे की कब कहाँ मीरा नौकरी का इंटरव्यू देने जा रही है। और मुझे उसे वहां मिलना है। बाबा, आपने ही बोल कर मेरी और  उसकी नौकरी एक साथ एक ही कंपनी में लगवाई थी। मैंने तो बस उसके बाद अपने प्यार को जिया था। अपने प्यार को प्यार देने की कोशिश की। मेरी भी तो जान बसती है उसमें। हँसती खेलती मीरा की जगह एक उदास टूटी हुई मीरा को देख मेरा भी दिल दुखता था। मैंने तो बस तभी सोच लिया था कि अब मैं फिर से इसे नहीं खो सकता। फिर बस अपने प्यार को दुबारा पाने के लिए मैंने वही जद्दोजहद शुरू कर दी। आपके साथ और मेरे प्यार ने मीरा को फिर से जिन्दा कर दिया। वो फिर से मुस्कुराना सीख गयी है।

और आज देखिये हम सब फिर से साथ हैं खुश हैं। जो बीत गया सो बीत गया बाबा।बंद कीजिये अपने को कोसना। हम सब इंसान हैं गलती हो सकती है हम सब से और आप ने तब भी जो किया वो अपनी बेटी की भलाई के लिए ही किया था। पर, अगर खोट दूसरे में निकला तो आपकी क्या गलती ।

बाबा , चलिये अब खुश हो जाइये। आज मैं आपसे एक वादा करता हूँ कि जिस उम्मीद के साथ आप मुझे मीरा की जिन्दगी में वापस लाये हैं मैं उस उम्मीद पर खरा उतरने के लिए जी जान लगा दूंगा। आपको निराशा का एक भी मौका नहीं दूंगा। और अब तो हमारी मीरा भी बदल चुकी है। अब वो पहले वाली मीरा नहीं रही। वो एक स्वाबलंबी, एक निर्भयी मीरा है जिसने अपने जख्मों को अपनी ढाल बना लिया है। बाबा आप बस अपना आर्शीवाद हम पर रखिये और देखिये हम कैसे अपने प्यार को परवान चढ़ाते हैं।” केशव ने इतना कहते हुए रोशन लाल जी के पैर छुए तो उन्होंने भी झुक कर उसको गले लगा लिया।

खिड़की से ये सब देख ब्रिजेश खुश था पर इस सच्चाई को सुन हैरान हो गया था कि मीरा और केशव के दुबारा मिलने में उसके बाबा का हाथ है। आज उसके मन से वो जरा सी टीस भी निकल गयी जिसमे वो अपनी बहन  के दुखों के लिए अपने बाबा को जिम्मेदार मानता था।

सब कुछ सुन उसको सकून हो गया कि अब उसकी बहन की जिंदगी में उसकी सच्ची खुशियों ने दस्तक दे दी है। अब केशव और मीरा को कोई एक दूसरे से अलग नहीं कर पायेगा।उसकी बहन का पहले प्यार का चाँद पूरा हो उसकी जिंदगी की ख़ुशियों को चांदनी सा रोशन कर देगा।

#saynotoforcedmarriage



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