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@dawriter

जबरन विवाह

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जबरन विवाह, सुनने में यह शब्द सामान्य सा लगता है लेकिन जिसके साथ यह घटित होता है उसकी जिन्दगी बद से बदतर हो जाती हैै। माँ-बाप जो अपने बच्चों के सुखमय जीवन व उनके उज्जवल भविष्य के लिए अनेक कामनाएं करते है, वे कभी मजबूरी में तो कभी बहकावे में आकर अपने बच्चों की जबरन शादी करवा देते है और बाद में उन बच्चों की जिन्दगी नरक बन जाती है। वे स्वंय उन्हें उच्च स्तारीय शिक्षा दिलाते है और जब उनका कुछ करने का समय आता है तब वे उन पर अपनी मर्जी थोप कर बिना उनकी इच्छा के बिना उनकी शादी करवा देते है। जबरन विवाह वास्तव में विवाह है ही नही। विवाह को दो वयस्क व्यक्तियों की आपसी सहमति से बना पवित्र मिलन माना जाता है जो पूरे जीवनभर के लिए एक-दुसरे की सभी जिम्मेदारियों को स्वीकार करने के लिए तैयार होते है। विवाह का अर्थ दो भौतिक लोगों को जोड़ना नहीं बल्कि दो आत्माओ को जाड़ने से है। विवाह उपरान्त दो विभिन्न विचारधराओं के लोग एक हाते हैै। ऐसे में किसी व्यक्ति का विवाह यदि जबरदस्ती बिना उसकी इच्छा के किसी दूसरे व्यक्ति के साथ करा दिया जाये तो एक की नही बल्कि दोनों की ही जिन्दगी बरबाद हो जाती है। जिससे दोनों के मन में एक दुसरे के प्रति कुढ़न पैदा हो जाती है, जो समय के साथ-साथ बढ़ती जाती है। यहीं कुढ़न व आपसी मन-मुटाव धीरे-धीरे नोंक-झोंक और अन्ततः घरेलू हिंसा का रूप ले लेती है। जिसके परिणाम कभी-कभी हत्या जैसे भयावह भी होते है।
  
अब यदि हम जबरन विवाह के कारणों पर अपना ध्यान दें तो हम पाते है कि कभी समाज, कभी धर्म, तो कभी आर्थिक कमजोरी, तो कभी मजबूरी और तो और कभी हम स्ंवय इसके लिए जिम्मेदार होते है। इन कारणों में सबसे बड़ी भूमिका कुंठित व रूढ़िवादी समाज की होती है जो इस तरह की कुप्राथाओं व रीति रिवाजों को मान्यता प्रदान करता है और धार्मिकता रूपी चादर ओढ़ा कर इसको अपने आस-पास पनपने देता है। समाज का हर वो व्यक्ति इस घटना का जिम्मेदार है जो इसको देख कर अपनी आँखंे बन्द कर लेता है। इतिहास साक्षी है इस बात का कि जबरन थोपी गयी समाजिक व धार्मिक परंपराओं और कुरीतियों ने समाज के विकास में अनेेक बाधाएं उत्पन्न की। समाजिक वातावरण को स्वच्छ रखने के लिए हमें अपनी आवाज इसके विरोध में बुलंद करनी होगी। हम अपनी कमियों को छुपाने के लिए अपनी बेटी या बेटे का विवाह बिना उसकी मर्जी के किसी से भी करा देते है। ऐसे में क्या होता है जब विवाह उपरान्त उसकी कमीं उजागर होती है तो शुरू होती है आपसी कलह। जो नित्य उसके जीवन को अन्धकार की ओर ले जाती है।
 
प्रायः एक वजह और देखने को मिलती है कि किसी गांव के अमीर जमींदार ने अपने गांव के किसी गरीब जिसने उससे कर्ज लिया है, कर्ज की अदायगी के रूप में गरीब की बेटी से जबरन विवाह कर लेते है। इन मामलों में अक्सर लड़का व लड़की की उम्र के बीच काफी अन्तर देखा गया है। जिससे लड़की का पूूरा जीवन वैवाहिक दासता की ओर चला जाता है। गांव में जबरन विवाह का एक उदाहरण और मिलता है, चूंकि इन क्षेत्रों में न्याय ग्राम पंचायताें के हाथ में होता इसलिए वे फैसले में उस लड़कीे का विवाह उस लड़के से करवा देते है जिसने लड़की के साथ दुष्कर्म या दुष्कर्म करने की कोशिश की थी। इस मामले में अक्सर लड़का अमीर व लड़की गरीब घर की होती है और लड़के या लड़के के पिता का पूरा दबदबा पंचायत पर होता है। दहेज की कमी के कारण कई माँ-बाप अपने बच्चों की शादी कम उम्र में ही एक अधेंड़ उम्र के व्यक्ति के साथ करा देते है। यह मामले बाल विवाह के अन्तर्गत आते है। यहां यह बताना अनुचित न होगा कि बाल विवाह और दहेज लेना-देना दोनों कानूनी अपराध है। कई बार यह भी देखा गया है कि कोई व्यक्ति किसी दुसरे व्यक्ति से प्रेम करता है और उससे वो शादी भी करना चाहता है लेकिन माँ-बाप इस रिश्ते को स्वीकृति इसलिए नही देते क्योंकि दुसरा पक्ष उनके आर्थिक स्तर व जाति-धर्म के समतुल्य नहीे है। अन्ततः माँ-बाप उसकी शादी जबरदस्ती अपने स्तर के व्यक्ति के साथ करा देते है। 

यह विचार करने वाली बात है कि 21वीं शताब्दी के एक राष्ट्र जो विश्व में अगली महाशक्ति के रूप में उभरता हुआ माना जा रहा है, उसके लिए यह एक समस्या से कम नही है कि जबरन विवाह और बाल विवाह जैसी कुप्रथाएं अभी भी जारी है। उपरोक्त कथन में इंगित किया जा चुका है कि इस प्रकार की सामाजिक बुराईयां विकास में अनेक बाधाएं उत्पन्न करती है। तथ्यों के अध्धयन से यह स्पष्ट होता है कि भारत ही नहीं अपितु विश्व के कई ऐसे देश है जहां यह प्रचलन में है, विशेषकर दक्षिण एशिया और अफ्रीका।

संयुक्त राष्ट्र ने जबरन विवाह को मानवाधिकार के दुरूपयोग के अन्तर्गत चिन्ह्ति किया है क्योंकि यह मानव की स्वतंत्रता और स्वायत्तता के अधिकारों का उल्लंघन करता है। सरकार द्वारा इस अपराध को समाप्त करने के लिए कठोर दण्ड का प्रावधान बनाया गया है। ऐसे में कई एनजीओ ने समय-समय पर जागरुकता अभियान द्वारा इसके विरुध लोगों को एकजुट किया है। यहां दराइटर जैसे मंचों का जिक्र करना उचित होगा जिन्होने ऐसी मुहिम को प्रारंभ किया और शब्दो, कहांनिया और लेखों के द्वारा समाज के लोगो की सोच बदलने का सार्थक प्रयास कर रहे है। इन जागरुकता अभियानों के परिणाम स्वरूप ही आज लोग अपराधों को होता देख अपनी आवाज बुलन्द कर रहे है।

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