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@dawriter

एक बेटी की उम्मीद

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jhalak by  
jhalak

 

नयी नयी उम्मीदें आयी मेरे दरवाजे पर,

हर एक के बाबुल ने छोड़ा उनको चौराहे पर ,

भारत जैसे देश की यह अमिट गाथा है,

कैसे धर्म और राजनीति गठबंधन कराता है,

जो तुम आज ,भी वही झूठी शान बताते हो

अपनी बेटी -बहनों का जबरन विवाह कराते हो,

देख जरा ऐ मानव कैसे, ये धरा शिखर पे आयी है,

तेरी इसी क्रूरता ने कितनी बेटियां जलवायी है,

कभी तो कान लगाकर सुन ,ये जीवन की सच्चाई है

सबसे ज्यादा प्रेम तपस्या ,इस बेटी की परछाई है,

तूने तो बस जुल्म किए ,ये फिर भी प्रेम जताती है,

तेरे चुनाव के आंसू भी ,अपने दामन में छुपाती है,

तू रहे सदा बलशाली ,यही दुआ जताकर जाती है,

तुझ जैसे मूरख की इज्जत ,दूजे घर में बनाती है,

कभी प्रेम से बात तो कर,वो तेरे प्रेम की प्यासी है,

जो तेरी जिम्मेदारी विवाह ,तो वो शिक्षा की अधिकारी है, 
ना मूंदो अपनी नजरें यूं वो, तेेेरी बिटिया रानी है,

ना केवल बहू ,उसके और भी कई किरदार हैं,
तेरे घर की लालिमा, किसी की साज़िश की शिकार है,

जल्दी कर ऐ बाबुल तू,वो तकती तेरा द्वार है,
तेरी सुता का पत्र आया सात समंदर पार है,
पढ़ना तुम सौ बार पत्र को,वो कहे ये बारम्बार है,
पहले तो प्रणाम कर लिया तेरा आशीर्वाद है,
ना करना छोटी का यूं जबरन विवाह ,वो तो अभी नादान है,
क्या होता परिणाम है ,ये उदाहरण तुम्हारे पास है,
कल की वो नन्ही परी आज ,उन दरिंदों का शिकार है,

कोई शिकायत नहीं है बाबा, बस एक उत्तर की कयास है,
उन सामाजिक लोगों को क्या, तनिक भर भी भान है,

मेरे टूटे सम्मान का क्या ,कोई रखते वो हिसाब है,
फिर क्यों बेटी बोझ होती है ,इस परिभाषा का ज्ञान है,
हे पिता ना दोहराना इतिहास ,बस यही अंतिम अनुमान है,
एक वक्त में एक ही अर्थी जलाना ऐ मेरे सरोकार है......

#saynotoforcedmarriage

                -झलक



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