0
Share




@dawriter

अब तो बहुत देर हो गई

1 14       
dhirajjha123 by  
Dhiraj Jha

कुछ कहानियां मनोरंजन से किनारा कर के सिर्फ इसलिए लिखी जाती हैं कि उसे पढ़ कर समझा जाए, जो गलतियां हुईं वो दोहराई ना जाएँ । आप भी पढ़िए इसे और देखिए कहीं अनजाने में आप भी कोई ऐसी ही गलती तो नहीं कर रहे ।

“दीदी तुम पागल हो चुकी हो, उसे भूल क्यों नहीं जाती, तुम दोनों एक नहीं हो सकते और वैसे भी ये प्यार व्यार सब बेकार की बातें हैं, कोशिश करो तो कुछ दिनों में भूल जाओगी ।” नीलम ने प्रिया को डांट कर कहा, वैसे तो नीलम प्रिया की छोटी बहन थी मगर फिर भी उसे डांट रही थी और प्रिया उसकी बात सुन कर मुस्कुरा रही थी मगर ये मुस्कराहट वो मुस्कराहट थी जो आंसुओं में भीगी होती है । जब दर्द को बयाँ करने में आंसु सक्षम ना हों तब ऐसी मुस्कराहट ही खिलती है चेहरे पर और इसका दर्द कितना गहरा होता है ये शायद वही समझ सकता है जिसके ऊपर ये दर्द बीत रहा हो ।

“तुम भी डांट लो भला क्यों ना डांटोगी मैंने इतना बड़ा गुनाह जो किया है । प्यार किया है अपने पसंद के लड़के से । अपनी ज़िन्दगी उसके साथ जीने का सोचा है । वो दिन रात मेरे लिए तडपता है और मैं उसकी तड़प देख कर तड़पती हूँ यही गुनाह है न मेरा । प्यार तो बस उसी के लिए सही है जो करता है सामने वाले के लिए तो हमेशा ही गलत होता है ।” प्रिया ने अपने आंसुओं को बामुश्किल रोकते हुए अपना दर्द बताया जिसका नीलम पर कोई फरक नहीं पड़ा

“तुम अंधी हो चुकी हो दीदी तुम्हे सबकी बातें बेकार ही लगेंगी मगर तुम्हारे इस तरह करने से कुछ होने वाला नहीं है पापा कभी नहीं मानेंगे तुम बस खुद को दुखी करोगी ।”

“हाँ नीलम मैं अंधी हो चुकी हूँ पर याद रखना मैं जिस उम्र में हूँ उस उम्र में बिना सोचे समझे फैसले नहीं लिए जाते अगर मैं या मेरी उम्र की कोई भी लड़की इस उम्र में प्यार करती है न तो वो बी एफ नहीं चुन रही होती वो सोच समझ कर अपना हमसफर चुन रही होती है । और ज्यादा छोटी नहीं हो तुम मुझसे तुम पर भी ये अंधापन छाएगा तब तुम्हे आज के लिए अफ़सोस होगा कि तुमने मुझे समझने कि बजाये मेरा विरोध किया । मैं जानती हूँ पापा नहीं मानेंगे मगर ये सोच कर मैं कोशिश भी न करूँ तो उस इन्सान को क्या मुंह दिखाउंगी जो तमाम परेशानियों और दिक्कतों को नज़र अंदाज़ कर के जागता मेरा नाम ले कर है और जिसकी रात के आखरी पहर में भी मुझे पाने की दुआ ही होती है ।” नीलम उस वक़्त सच में कुछ नहीं समझी थी उसके लिए उस वक़्त प्रिया सरासर गलत थी ।

“दीदी” नीलम हडबडा कर उठी, चारो तरफ अपनी बहन को ढूंढने लगी, अभी तो यहीं थी अभी कहाँ चली गई ? फिर नीलम को ख्याल आया की ये तो उसकी गलतियों की झलक थी जो रोज़ रात को उसके सामने आती सपना बन कर । नीलम की आँखों से रोज़ सुबह ऐसे ही आंसू झरते और वो आंसुओं से भरी आंख से सामने की दिवार की तरफ देखती जहाँ प्रिया की फोटो तंगी थी और फोटो पर हार टंगा था । वो रोज़ प्रिया से माफियाँ मांगती मगर प्रिया बिना कुछ बोले अपनी उसी दर्द भरी मुस्कान के साथ तस्वीर में से नीलम को देखती रहती । नीलम खुद को उसकी और राघव की मौत का ज़िम्मेदार मानती थी उसे लगता कि अगर वो उस वक़्त प्रिया और राघव के प्यार को समझ जाती उनकी मदद न सही कम से कम प्रिया को सहारा भी दे देती तो प्रिया आज उसके साथ होती ।

प्रिया के लिए उसके पापा ने राघव को नामंजूर कर दिया सब खिलाफ होगए कोई भी साथ नहीं था । प्रिया अकेली पड़ गई थी, साथ ही उसकी किसी दूसरी जगह शादी की बात पक्की कर दी गई यह सदमा प्रिया सह नहीं पाई और धीरे धीरे खुद को ज़िन्दगी से दूर करते करते खुद को मौत के पास कर लिया । उसके बाद राघव जिंदा रहना गलानी सा लगने लगा कुछ ही दिनों बाद नीलम ने राघव के भी मौत की खबर सुन ली । उस दिन से नीलम को समझ आया की सबका प्यार बस बेफजूल नहीं होता । प्यार के कुछ रिश्ते जो होते हैं वो बस प्यार की छाया में ही जिंदा रह सकते हैं उन्हें अलग करते ही वो सूख जाते हैं और फिर दम तोड़ देते हैं । एसी बहुत सी नीलम की तरह बहनें और भाई हैं जो प्रिया और राघव के जैसे प्यार को समझ नहीं पाते और जब उन्हें अपनी गलती का अहसास होता है तब एक ही बात उन्हें पश्चाताप की आग में झोंकती है वो ये कि “अब तो बहुत देर हो गई” ।

प्यार खुबसूरत है दुनिया में सबसे ज्यादा खुबसूरत बशर्ते उसको समझा जाए, अपने आसपास किसी को प्यार में खोया देख उसका मजाक न बनाइए उसे समझिये उसपर हंसने की बजाये ये सोचिए कि आखिर उस प्यार में ऐसा क्या है जिसने उसकी ज़िन्दगी को इतना खुबसूरत बना दिया । क्यों उसे किसी और की ज़रूरत ही महसूस नहीं होती सिवाए उसके जिस से वो प्यार करता है । प्यार खुबसूरत है जनाब बस उसे आपका ना समझ पाना ही उसे एक भयानक अंजाम तक ले जाता है ।



Vote Add to library

COMMENT