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@dawriter

वापसी

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sunita by  
sunita

..."मुझे छोड़ दो नहीं जाना है तुम्हारे साथ", " चलों ..तुम्हारा समय पूरा हो चुका है।" "मै नहीं जाऊंगी मेरे छोटे छोटे बच्चे हैं, उनकी देखभाल कौन करेगा ?"

"तुम्हे चलना ही होगा ..", यमदूत उसे घसीटते हुए ले गए।
"महाराज..." यह औरत बहुत शोर कर रही थी बहुत कठिनाई हुई इसे लाने में "। "हू़. ..तो तुम हो ! तुम्हे कौन नहीं जानता पूरे देवलोक में तुम्हारी माता की अटूट भक्ति की कहानी सभी जानते हैं आदिशक्ति की पुजारिन को सभी प्रणाम करते हैं, तुम्हे नमन है, हे देवी भक्तिन तुम यमलोक क्यो नहीं आना चाहती तुम्हे तो पता है तुम्हारा पृथ्वी पर निवास की अवधि समाप्त हो चुकी है।"

.."मुझे पता है मृत्यु के देवता पर मेरे छोटे बच्चे, उन्हे मातृत्व विहीन न करो। अभी वह खुद को संभाल नहीं सकते। उन्होने अभी कुछ नहीं देखा। वो अबोध मेरे बिना क्या कर पायेंगे।" , " इसकी चिन्ता तुम न करो सभी प्रणियों का जीवन निर्धारण परमात्मा की इच्छा से होता है। हमे पता है तुम्हारे बारे में पर हम विधि के विधान के आगे मजबूर है।" "नहीं मृत्यु के देव ! मेरे बच्चे अकेले है छोटे हैं, उन्हे बड़ा कर दूं फिर ले आना, मै खुश होकर आऊगी मै खुद भी धरती पर ज्यादा नहीं रहना चाहती। पर थोड़ा समय दे दो। यमराज माँ की करूणता से द्रवित हो उठे।

वह दुख से भर गये। पहली बार उन्हे भी लगा इस स्त्री को अभी यहां नहीं आना चाहिए। उन्होने पृथ्वीलोक की ओर देखा, उस औरत की छोटी बच्ची अपनी माँ के बगल में बैठी खेल रही है अपनी गुड़िया, खिलौने फैला कर। माँ का शरीर निष्चेष्ट पड़ा है उसे पता भी नहीं उसकी माँ की मृत्यु हो चुकी है। उसका पुत्र घर के बाहर अपने मित्रों के साथ खेल रहा है। पति काम करने के लिए शहर से बाहर गया है। अभी सबकुछ समान्य था। यमराज उन मासूम बच्चों को देख रो पड़े, इस औरत को अभी और जीना होगा वह सही कह रही है।...

चल पड़े महाकाल से मिलने वहां पहुचें तो देखा माँ अादि शक्ति महाकाल के आगे हाथ जोड़ कर कड़ी उनसे विनती कर रही हैं..

"हे महाकाल आप तो काल के भी काल है !"

"उस बेचारी को थोड़ा जीवनदान दे दो वह मेरी भक्त है आप भी जानते हैं वह सरल, सीधी, छल कपट से दुर ममतामयी स्त्री है उसके जीवन में उसके बच्चों के सिवाय कोई खुशी नहीं उसने कभी किसी बुरा नहीं किया कभी किसी पीड़ा नहीं दी हे कालेश्वर ! दया करो।"

माता शक्ति की अनुय विनय व यमराज की प्रार्थना सुन महाकाल ने उसे जीवन दान दे दिया। यमदूत उसे वापस धरती पर छोड़ अाये।
यमराज ने देखा उस औरत के मंदिर का दीया अभी भी जल रहा था वह नमन कर वापस यमलोक चले गये।
छोटी बच्ची को भूख लगी तो खिलौने पटक कर वह माँ को जगाने लगी तब तक पुत्र भी खेलकर वापस आ गया, "माँ खाना दे दो बहुत भुख लगी है बच्चों की आवाजे सुनकर वह जाग गयी ...।"
सर पकड़ कर बैठ गयी इतनी पीड़ा क्यों हो रही है।
महाकाल व महाकाली ऊपर से मुस्कुरा रहे थे।

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लेखिका
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सुनीता शर्मा खत्री

©



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