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@dawriter

भूतिया महल

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विनोद राय ऑफिस में मीटिंग के बाद मीटिंग में पूरा दिन व्यस्त रहे। शाम के आठ बजे फुरसत मिली और अपने डेस्क पर आए। पेशे से आर्किटेक्ट विनोद राय का अपने क्षेत्र में विशेष स्थान है। घर जाने से पहले अदरक वाली चुस्त चाय की चुस्कियों के बीच लैपटॉप पर ईमेल देखने लगे। एक ईमेल को पढ़ कर फिर से पढ़ा। ईमेल बेल्जियम के प्रसिद्ध आर्किटेक्ट राफेल का था। राफेल ने विनोद राय को यूरोप आर्किटेक्ट अधिवेशन में सम्मलित होने के लिए निमंत्रण पत्र भेजा है। आने-जाने और रहने का खर्च आर्किटेक्ट एसोसिएशन की ओर से है। राफेल की यूरोप के बेहतरीन और प्रसिद्ध आर्किटेक्ट में गिनती होती है। विनोद राय राफेल के साथ दो प्रोजेक्ट पर काम कर चुके थे। राजस्थान की एक पुरानी हवेली को पांच तारा होटल में परिवर्तित करने के प्रोजेक्ट में राफेल मुख्य आर्किटेक्ट थे और विनोद राय ने उस प्रोजेक्ट में एक अहम भूमिका निभाई थी। विनोद राय की काबिलयत देख कर राफेल ने ऑस्ट्रिया में एक पुरानी इमारत के जीर्णोद्धार के प्रोजेक्ट में विनोद राय को अपनी टीम में सम्मलित किया था। विनोद राय की उम्र पचपन वर्ष की हो चुकी थी। राफेल उनसे लगभग पंद्रह वर्ष बड़े थे। उम्र लगभग सत्तर के आसपास। सत्तर की उम्र में भी राफेल एकदम चुस्त और कार्यरत है। विनोद राय को निमंत्रण पर अति प्रसन्नता हुई और फौरन राफेल को अधिवेशन में सम्मलित होने की सहमति भेजी। यूरोप में आर्किटेक्ट अधिवेशन में सम्मलित होना विनोद राय के लिए सौभाग्य और सम्मान की बात थी।

अधिवेशन के अध्यक्ष राफेल थे। अधिवेशन में राफेल ने विनोद राय के काम और कार्यशैली की भूरी-भूरी तारीफ की और सम्मान पत्र के साथ यूरोप आर्किटेक्ट एसोसिएशन की एसोसिएट मेम्बरशिप प्रदान की। विनोद राय के लिए यह गौरव की बात थी।

अधिवेशन समापन के बाद राफेल ने विनोद राय और कुछ चुने हुए आर्किटेक्ट को शहर से कुछ दूरी पर एक छोटी पहाड़ी पर बने एक महल में रात के डिनर पर आमंत्रित किया। एक मिनी बस में विनोद राय और दूसरे आर्किटेक्ट पहाड़ी पर बसे महल की ओर रवाना हुए। छोटी-छोटी घुमावदार संकरी सड़क के सफर के पश्चात रात आठ बजे महल में प्रवेश किया। राफेल ने उन सब का जोरदार स्वागत किया। राफेल ने टीम को महल दिखाया। लगभग एक घंटा महल देखने मे लगा। राजस्थान के किलों जैसा विशाल नही था। एक हवेली से बड़ा और किले से छोटा महल था। टीम के सभी सदस्य आर्किटेक्ट थे और सभी बारीकी से महल का अध्ययन कर रहे थे। राफेल महल के वास्तु की जानकारी विस्तार से सभी को दे रहे थे। एक बड़े दरवाजे के पास विनोद राय रुक गए और बारीक अध्ययन करने लगे। विनोद राय को उस दरवाजे की बारीक जांच करते देख राफेल रुक गए और विनोद राय से पूछा।
"विनोद आपको इस दरवाजे में क्या खास दिखा जो रुक गए?"
"राफेल ऐसे दरवाजे राजस्थान के किलों और हवेलियों में होते हैं। दरवाजे में छोटा दरवाजा। दरवाजे पर आप जो नक्काशी देख रहे है वो वास्तव में आयते और मंत्र हैं। दरवाजे के बाएं हिस्से पर आयते अरबी भाषा में लिखी है। भाषा अरबी है यह निश्चित है पर क्या लिखा है मुझे नही मालूम क्योंकि मैं अरबी नही जानता। दरवाजे के दाएं हिस्से पर हिंदी में गायत्री मंत्र लिखा है। ऊपर से नीचे तक गायत्री मंत्र लिखा है। हिन्दू धर्म में गायत्री मंत्र का विशेष महत्व है। हर पूजा में इसका उच्चारण किया जाता है। गायत्री मंत्र के बारे में एक बात और कहना चाहता हूं कि इसके उच्चारण के बाद भूत और प्रेत निकट नही आता और सब डर दूर हो जाते हैं। राफेल मुझे लगता है कि महल के निर्माण में अरब और भारत के मजदूरों और शिल्पियों का विशेष योगदान रहा होगा।"
विनोद राय की बात सुनकर राफेल मुस्कुरा दिए। "विनोद राय मैं तुमसे इस बात से सहमत नही कि गायत्री मंत्र भूत, प्रेतों से बचाता है। मैंने आपको यहां आने से पहले बताया नही। बताया इसलिए कि शायद सुनकर आप यहां नही आते। यह महल भूतिया महल है। इस महल को हॉन्टेड कैसल कहते हैं।"

यह सुनकर सभी ने दांतों तले उंगली दबाई कि रात के समय भूतिया महल बुला कर राफेल आखिर क्या करना चाहते हैं। सभी के रौंगटे खड़े हो गए। मन ही मन सभी वहां से शीघ्र रुक्सत लेना चाहते थे। भूत के साथ आमना सामना कोई नही चाहता था। विनोद राय भी सभी की तरह असहज हो गए। रात का समय, शहर से दूर पहाड़ी पर भूतिया महल में डिनर से पहले ही सभी का मन बेस्वाद हो गया। सभी को आशंकित देख राफेल ने हौसला बढ़ाते हुए कहा "चलिए आपने महल देखा अब डिनर करते हैं।"

डाइनिंग हॉल बहुत बड़ा था। बीच मे दो खंभे थे। एक खंभे पर राजा का और दूसरे खंभे पर रानी का चित्र था। बीच मे बड़ी डाइनिंग टेबल जिस पर एक साथ पचास लोग खाना खा सकते हैं। एक दीवार पर शीशे थे और उसके सामने वाली दीवार पर आकर्षक कलाकृतियां थी। तीसरी दीवार पर बहुत बड़ी खिड़की थी। खिड़की से पहाड़ का सुंदर दृश्य दिखाई देता था और पहाड़ी के नीचे बसे नगर की झिलमिलाती बत्तियां अतुलनीय लग रही थी। चौथी दीवार पर वही बड़ा दरवाजा था जिस पर आयते और गायत्री मंत्र लिखे हुए थे।

सभी डाइनिंग टेबल पर बैठ गए। राफेल ने महल का इतिहास बताना आरम्भ किया। यह महल करीब दो सौ वर्ष पुराना है। यहां राजा अपने परिवार के संग रहते थे। जनता नीचे नगर में रहती थी। महल के पिछले हिस्से में नौकर रहते थे। भारत मे अंग्रेजो का शासन था और गुलामो की तरह बहुत मजदूर अंग्रेजो ने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में ले गए। मैं विनोद राय की बात से सहमत होता हूं कि उन हिंदुस्तानी मजदूरों ने गायत्री मंत्र को दरवाजे पर अंकित किया होगा। वो दौर राजाओं का था और आपसी रंजिश और अपने राज्य के विस्तार के लिए खून-खराबा और लड़ाई होती थी। ऐसी एक लड़ाई में इस महल के राज परिवार को कैद कर लिया। यातनाएं दी और फिर मार डाला। राज परिवार खत्म हो गया सिर्फ नौकर बचे थे। नौकर के वंश बताते हैं कि राज परिवार के सदस्य आज भी भूत बन कर इसी महल में रहते हैं।"

सभी आर्किटेक्ट बहुत ध्यान से राफेल की बातें सुन रहे थे और साथ में कुछ हद तक डरे हुए थे। राफेल ने उनका डर दूर करते हुए कहा।
"मित्रो डरने की कोई आवश्कयता नही है। आप पूरी तरह सुरक्षित है। आपको यह भूतिया महल दिखाने का मकसद है कि सरकार इस भूतिया महल को पर्यटन के लिए खोलना चाहती है। यह भूतिया महल बहुत पुराना है और इसको एक नए तरीके से संवार कर पर्यटक स्थल बनाना है और मुझे आप जैसे मंझे हुए आर्किटेक्ट की जरूरत है। आप मेरी टीम का हिस्सा बनिये और इस हॉन्टेड कैसल को विश्व का सबसे जुदा पर्यटक स्थल बना कर अपनी कला को विश्व के सामने प्रस्तुत कीजिये।"

राफेल कुछ पल के लिए शांत हो गया फिर उसने डाइनिंग हॉल में बैठे अपने साथियों के लिए डिनर की अनुमति मांगी। विनोद राय अचंभित हो गया।
"राफेल सर आप किसके साथ बात कर रहे हैं। मुझे यहां कोई नजर नही आ रहा है।"
"आप दो खंभो पर राजा और रानी के चित्र देख रहे है। वे इस महल के वास्तविक राजा और रानी के चित्र हैं। जब इनका कत्ल हुआ, कहते हैं उसके बाद ये भूत बन कर महल में ही घूमते हैं। बिना उनकी अनुमति के यहां कोई नही आ सकता। सामने शीशों में राजा और रानी थे जिनसे मैं आपके डिनर की अनुमति ले रहा था। वे आम व्यक्तियों को नजर नही आते। इन्होंने डिनर की अनुमति दे दी है अब डिनर कुछ ही पल में आपके सामने होगा। राजा से बातचीत वोही कर सकता है जो राजा की कुर्सी पर बैठता है। मैं जिस कुर्सी पर बैठा हूं वह राजा की है।"

विनोद राय का दिमाग सुन हो गया। राफेल भूतों से बात कर रहा है। भूतों के बहुत किस्से विनोद राय ने सुने थे लेकिन ऐसी रहस्यमयी स्थिति से पहली बार सामना हुआ। कड़ाके की ठंड में पसीना महसूस होने लगा। विनोद राय समझ नही सका कि वास्तव में राफेल भूत से बात कर रहा था या अभिनय कर रहा था। सच क्या था विनोद राय को नही मालूम। वह उस भूतिया महल से जल्द से जल्द निकलना चाहता था।

भूख विनोद राय की खत्म हो गई थी। डिनर में न के बराबर थोड़ा सा लिया।

रात के ग्यारह बजे राफेल ने सबके साथ मिनी बस में भूतिया महल से रुक्सत ली। विनोद राय चुपचाप बस की खिड़की से बाहर दूर टिमटिमाती बत्तियों को देखते हुए सोचता रहा क्या गायत्री मंत्र की शक्ति ने भूत को दूर रखा। विनोद राय हर रात सोने से पहले गायत्री मंत्र का जाप करता है और उसका विश्वास है कि रात को बुरे सपने नही आते। होटल पहुंच कर राफेल ने सबसे इस प्रोजेक्ट में जुड़ने की फिर विनती की।

अगले दिन विनोद राय ने भारत आने की फ्लाइट पकड़ी और भूतिया महल के किस्से को एक बुरा सपना मान कर भूलना ही बेहतर समझा।

कुछ दिन बाद राफेल की ईमेल आई। राफेल ने प्रोजेक्ट से जुड़ने की सहमति मांगी। विनोद राय ने अपनी असहमति की ईमेल लिखी।



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