DOMESTIC VIOLENCE

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रिक्शेवाली चाची

Mohit Trendster   1.01K views   10 months ago

...वो तो बेचारे सबके पंचिंग बैग होते हैं। अन्य लोगो के अहंकार को शांत करने वाला एक स्थाई पॉइंट। ऐसा ही कुछ सीधे लोगों के साथ उनके घर और बाहर होता है। कई बार तो सही होने के बाद भी ऐसे लोग बहस हार जाते हैं।

सुलोचना....( सच्ची कहानी )

dhirajjha123   133 views   2 years ago

बदलाव का अधिकार हर किसी के पास है । पर इस अधिकार का पूरा फायदा उसी को मिलता है जिसमें लड़ने की ताकत है, जिसमे हक़ छीन लेने की हिम्मत है । जो लड़ सकता है अपनों के ख़िलाफ, जो चुनौती दे सकता है सनातन से चले आ रहे बेकार के रिवाज़ों को

Dowry

Shreya Dubey   46 views   2 years ago

They say marriages are made in heaven

An unforgettable fear

jhalak   39 views   2 years ago

Woman is the best creation of God ,only she can sit on the chair of God in the form of Mother.....but the best have to face the worst...

शादी के बाद का बर्थडे

kavita   1.35K views   1 year ago

संतान द्वारा माता पिता को खुश रखने की चाह ....अर्थात बच्चे बड़े हो गए ...! प्रेम, विवशता, और उनके अनकहे दर्द को दर्शाती एक लघु कथा

बेजुबान

udyalkarai   26 views   1 year ago

आज सवाल उठाने का मन में ख्याल है आया

घरेलूं हिंसा

Piyush Shukla   33 views   2 years ago

घरेलूं हिंसा का मतलब यह नही होता है कि किसी महिला या लड़की को मारना या पीटना बल्कि इसका वास्तविक मतलब ,किसी भी महिला या लड़की की भावनाओं से खेलना, उसे उसकी मर्जी के विरुद्ध कार्य करवाना , शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करना।।

अनकहा दर्द ।

chandrasingh   317 views   2 years ago

आखिर ये नयी सदी मे जी रहे लोगो की मानसिकता कब तक ये दहेज रूपी गुलामी की जंजीरों को झेलेगी इसे तोड़ना होगा और शुरुवात करनी होगी एक दहेज मानसिकता मुक्त समाज की । ताकि किसी तनिशा का फिर से अन्त न हो । अब हमे लड़ना हो, जागना होना नही तो अगली तनिशा हमारे घर से भी हो सकती है ।

Defence

ashwanikumartiwari3   11 views   1 year ago

It's a story thats best savoured when unfolded without having any prior information about it.

गोपाल फ़िर से जी उठा stopdomesticviolence

hema   74 views   2 years ago

कभी कभी स्थितियाँ ऐसी हो जाती हैं कि कहानी के सभी पात्र किसी न किसी वजह से कमज़ोर और मजबूर दिखते हैं ..लेकिन नियति सबको एक मौका ज़रूर देती है अपनी भूल का प्रायश्चित करने का ... यह कहानी है उस घरेलू हिंसा की जिसकी जड़ है बेमेल विवाह...

कभी कभी लड़की वाले भी दहेज के दोषी होते हैं

nehabhardwaj123   249 views   1 year ago

ये कहानी है चड्ढा साहब की जिन्होंने लड़के वालों के न चाहते हुए भी अपनी बेटी की दहेज दिया, पर दूसरी बेटी की शादी करने के समय आर्थिक स्थिति तंग हो चुकी थी।

घरेलू हिंसा

nis1985   63 views   1 year ago

आज भी हमारे देश में न जाने कितने कमलू जैसे दरिंदे भरे पड़े है जो दारु पीकर अपनी औरतो को प्रताड़ित करते है बेटा न पैदा करने पे, ये घटिया मानसिकता अभी भी १००% ख़त्म नहीं हुई है

साढ़े तीन ऑंखें

dhirajjha123   430 views   1 year ago

एक कहानी मानवीय प्रेम की, एक कहानी एक आम औरत की, एक कहानी एक माँ की

और मैं मुक्त हो गयी

kavita   664 views   1 year ago

शोषण के विरुद्ध एक स्त्री के आत्मबल संजो कर विद्रोह करने की मार्मिक कथा

नाम

sonikedia12   56 views   1 year ago

कभी कभी इंसान उन गलतियों का बोझ ढोता हैं जो उसने किया ही नहीं ।