DOMESTIC VIOLENCE

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बेजुबान

udyalkarai   20 views   7 months ago

आज सवाल उठाने का मन में ख्याल है आया

I OBJECT

Rajeev Pundir   15 views   7 months ago

How shameful it is that we the men take our lovely and delicate better halves for granted and use and abuse them at our will !! This poem is inspired from a news of a boy who murdered his beloved brutally. We've to stand against this beastly mentality to stop violence against women.

YOUR HATEFUL SURVIVOR

aesha   233 views   7 months ago

A very short open letter to my ex abuser. You were a mistake I choose. But I have found peace away from you

नाम

sonikedia12   44 views   7 months ago

कभी कभी इंसान उन गलतियों का बोझ ढोता हैं जो उसने किया ही नहीं ।

Me and me and a war

variantme   20 views   8 months ago

In the agony of the days spent, she Crys.... She talks to her self and laments. She calls it a war. Yes! A WAR.

Finding solace in the most tragic way.

writerinmaking0   364 views   8 months ago

An attempt to modify the society through my thoughts that aim to question the dynamics of domestic violence. My main concern is to talk about how domestic violence works in a place we least expect it to.

गोपाल फ़िर से जी उठा stopdomesticviolence

hema   69 views   8 months ago

कभी कभी स्थितियाँ ऐसी हो जाती हैं कि कहानी के सभी पात्र किसी न किसी वजह से कमज़ोर और मजबूर दिखते हैं ..लेकिन नियति सबको एक मौका ज़रूर देती है अपनी भूल का प्रायश्चित करने का ... यह कहानी है उस घरेलू हिंसा की जिसकी जड़ है बेमेल विवाह...

सुलोचना....( सच्ची कहानी )

dhirajjha123   68 views   8 months ago

बदलाव का अधिकार हर किसी के पास है । पर इस अधिकार का पूरा फायदा उसी को मिलता है जिसमें लड़ने की ताकत है, जिसमे हक़ छीन लेने की हिम्मत है । जो लड़ सकता है अपनों के ख़िलाफ, जो चुनौती दे सकता है सनातन से चले आ रहे बेकार के रिवाज़ों को

अनकहा दर्द ।

chandrasingh   295 views   8 months ago

आखिर ये नयी सदी मे जी रहे लोगो की मानसिकता कब तक ये दहेज रूपी गुलामी की जंजीरों को झेलेगी इसे तोड़ना होगा और शुरुवात करनी होगी एक दहेज मानसिकता मुक्त समाज की । ताकि किसी तनिशा का फिर से अन्त न हो । अब हमे लड़ना हो, जागना होना नही तो अगली तनिशा हमारे घर से भी हो सकती है ।

श्रेणी- Story/Domestic Violence

sonikedia12   99 views   8 months ago

हाँ ये शब्द कई बार सुना । कई चोट और निशान भी देखे। पर उन चोटों और निशानों का क्या जो बड़े प्यार से दिए जाते हैं पर हम कई बार पहचान नहीं पाते और अंदर ही अंदर घुटते है एक जिंदा लाश की तरह जिसमें सिर्फ़ साँसे होती है पर खुद के लिए नहीं । इसमें गलती किसकी ये तय करना भी कठिन होता है ।

Journey of an oppressed- woman

jhalak   150 views   8 months ago

This poem is about the phases comes in life of an oppressed woman from her marriage to her pregnancy and to her equation of being free and make others to help in this...so please read it full...its also a story of a dear daughter

Domestic violence- hindi poem

ruinedstorm   152 views   8 months ago

Please like it, share and comment if it shakes you. Women gives the birth and deserves the respect. She is the sole creator of life, new life.

It's time to awake..

jhalak   5 views   8 months ago

In India there are more cases of domestic violence then any other problem the difference is most of them are hidden...

घरेलूं हिंसा

Piyush Shukla   17 views   8 months ago

घरेलूं हिंसा का मतलब यह नही होता है कि किसी महिला या लड़की को मारना या पीटना बल्कि इसका वास्तविक मतलब ,किसी भी महिला या लड़की की भावनाओं से खेलना, उसे उसकी मर्जी के विरुद्ध कार्य करवाना , शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करना।।

Dowry

Shreya Dubey   45 views   8 months ago

They say marriages are made in heaven