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@dawriter

रोटी 20 सेंटीमीटर गोल होनी चाहिए।

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डियर मम्मी पापा,

मुझे आपने बडे़ लाड़ प्यार से पाला, पुणे में रहकर वो सब कुछ सिखाया जो हर माता पिता अपनी बेटी को सिखाते है, और फिर शादी की आई टी इंजीनियर से, आपने अपने हिसाब से तो सही ही सोचा कि लड़का पढा़ लिखा है समझदार होगा, पर माँ यदि ऐसे पढे़ लिखे लोग होते है तो भगवान करे दुनिया में कोई पढा़ लिखा न हो, अब सहन नही होता माँ बचा लो मुझे,

आपके इंजीनियर दामाद के कुछ प्रोटोकॉल है जैसे

रोटी 20 सेंटीमीटर गोल होनी चाहिए। खाने के पहले वो रोटी को नापते है.
उन्हे ब्रेकफास्ट का मेन्यू एक दिन पहले भेजकर मंजूरी करानी पड़ती है।
हर दिन कितना आटा, चावल, दाल, तेल खर्च हुआ उसका हिसाब-किताब देना होता है वो भी फिर एक्सेल सीट पर.
एक्सेल सीट का बकायदा एक फॉर्मेट है, जिसमें तीन कॉलम हैं - पूर्ण(complete), अपूर्ण(incomplete) और कार्य प्रगति में(in progress)।
एक्सेल सीट पर पूरी रिपोर्ट बनाकर ईमेल भेजना है।
निर्देशों के मुताबिक अगर कोई टॉस्क पूरा नहीं हुआ है तो उसका कारण भी लिखना पड़ता है।
माँ जरूरी बातचीत भी ईमेल से ही करनी होती है।

अब ये पति के ‘प्रोटोकॉल’ मै नही कर सकती माँ, आईटी प्रोफेशनल पति की ज्यादिती से तंग आकर आत्महत्या करना चाहती थी, मगर बेटी को देखकर हिम्मत नहीं जुटा पाती। वह जब भी रोटी खाने लगता है पहले उसका आकार नापता है। इतना ही नहीं वह चाहता है कि उसने सारा दिन जो काम किया उसका ब्यौरा अलग-अलग रंगों की शीट में तैयार करके मैं उसको दिखाऊं। अगर एक दिन भी किसी काम की जानकारी मैं न दे पाऊं या कोई कॉलम छूट जाए तो गाली गलौच करता है। जब कभी प्रोटोकॉल टूटा, मुझे मारा ,पिटा जिसकी वजह से मै जी रही हूँ उस बेटी को भी मारने की कोशिश की, तो कभी मुझे ठंडा पानी डालकर एसी के कमरे में बंद कर दिया. अपनी गृहस्थी बनाये रखने के लिऐ मैने हर अत्याचार सहा एक कहावत है "डोली में जाना और अर्थी में आना" .

चाहे तुम्हारे शरीर को कितनी ही मार खानी पडे। चाहे तुम्हारे मन को कितने ही ताने सहने पडे। चाहे तुम्हारी आत्मा को पल पल घुट-घुट कर मरना पडे लेकिन अर्थी में ही आना ,अकेली औरत को हर पुरुष गलत नजर से देखता है भूखे भेड़ियों की जमात में अकेले अपने को सम्मान बचा कर रखना मुश्किल होगा, इसलिए बेहतर है कि हम एक ही पुरुष की ज्यादतियाँ सह लें. ऐसा क्यो सिखाया जाता है हम लड़कियो को?

शादी प्यार का संबंध है, या प्रोटोकॉल का, अब मुझसे सहन नही होता.

अपनी बेटी को माफ कर दिजिए पापा, मै तलाक चाहती हूँ

आपकी बेटी..

नोट:ये बाल्ग एक सत्य घटना पर आधारित है।

Image Source: zagreb



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