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@dawriter

घर का मामला

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varsha by  
varsha

माँ सामने वाले घर से एक औरत के जोर जोर से चीखने और रोने की आवाज आ रही है लगता है वो लोग उसे बहुत बेरहमी से पीट रहे हैं राहुल की आंखों में उस औरत के लिए गहरी संवेदना थी।

"राहुल तू अपना काम कर ये तो उस घर के रोज के किस्से हैं आये दिन मारपीट होती रहती है। उस घर के लोग आपस में सुलझा लेंगे हमें पचड़े में पड़ने की क्या जरूरत?

"पर माँ आज तो बहुत देर हो गयी लगता है उसकी जान ही लेकर छोड़ेंगे। मैं जा रहा हूँ पुलिस को फोन लगाने। मैं नहीं देख सकता ये सब।"

"राहुल मैंने क्या कहा तुझे समझ नहीं आता जा यहां से अपनी पढ़ाई में ध्यान लगा। फालतू चीजों पर ध्यान मत दिया कर "राहुल अनमना सा अपने कमरे में चला जाता है।

अगले दिन सुबह सुबह फोन की घंटी घनघना उठती है। राहुल की माँ फोन पर बात करने के बाद अचेत होकर गिर जाती है। राहुल दौड़कर माँ को संभालता है और जमीन पर गिरा हुआ फोन उठाता है"

फोन राहुल के दोस्त विनय का था जो राहुल की दीदी के ससुराल वाले शहर में ही रहता था

"राहुल दीदी हमें छोड़कर चली गयी आसपास के लोगों ने बताया कि रात भर उनके घर से मारपीट और रोने की आवाजें आ रही थीं"

वर्षा श्रीवास्तव"अनीद्या"



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