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@dawriter

घरेलू हिंसा

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nis1985 by  
nis1985

निशा की कलम से...

#घरेलू#हिंसा

""अरे, ओ कमलू काहे कूट रहा है रे सुबह से शांता को,सारे गांव में कोहराम मचा रखा है तुमदोनो ने, ई रोज-रोज का कुटाई और तुम्हरी लुगाई का रुलाई सुन- सुन के साला हमरा तो कान ही फुट गवा है, गांव की सरपंच ताई ने कमलू को फटकार लगाते हुए कहा।

""अरी ओ ताई काहे इतना गला फाड़ के चिल्ला रही है, ई हमरे घर का मामला है तुमका का लेना देना, चलो निकलो इहा से, कमलू ने लड़खड़ाते हुए कहा।

""पहिले खुद का सम्भाल और ठीक से खड़े हो बेवड़े, शराब के नशे में धुत्त तुमका होश भी है, तुम किस से बात कर रहे हो, दिन दहाड़े शराब के नशे में धुत्त, छी लानत है तुम पे।

""चल निकल इहा से बुढ़िया, साली कान पका रखा है हमरा।

"""और कमलू शुरू हो गया फिर से शांता की कुटाई में।

""'"ताई!...ताई, हमका बचाई लो, नहीं तो ई जानवर हमका मार डालेगा, मार खा-खा के हमरा पूरा बदन पत्थर हुई गवा है ताई, हम तुम्हरे सामने हाथ जोड़कर विनती करत है, हमका ई दरिंदे से बचाई लो।

""अरी तू काहे को डर रही है, हमरे होते हुए, हम हैं ना अभी सभा बुलवा के ई कुकुर को पुलिस के हवाले करत हैं, सरपंच ताई ने गुस्से से कहा।

""अरे नही! नही ताई इनको कौनो और सजा दे, दो पर इनका पुलिस के हवाले न करो, हमरा और हमरी बिटियन का क्या होगा, बिना मरद के जानत हो न सब कैसन बुरी नजरो से देखत है,और हमरी तीनो बिटिया हैं, जानत हो न ताई जमाना कितना खराब है, शांता ने रोते हुए कहा।

""अरी धत्त पगली, अइसन मरद से तो मरद न होना ही अच्छा है, जो साला दिनरात शराब के नशे में धुत्त अपन लुगाई और बिटियन के कुटाई करत है, और तू इसका लात खाती है दिनरात तुम्हरे बच्चे मार खाते है, और तू अब भी उ कमलू की भक्त बनी बैठी है।

""अरी तुझपे भी लानत है शांता, जो कमजोर बनी बैठी है, देख तुने अभी इस बेवड़े को नहीं सुधारा तो, जिंदगी भर ई दरिन्दा तुझे और तेरी फूल सी बिटियन का कुटाई ही करता रहेगा।

""शांता चुपचाप रोती हुई ताई की बाते सुन रही थी।

""अरी ओ ताई ज्यादा इहा ज्ञान न बाट, चल निकल इहा से, और हम तो ई साली का कूट-कूट के आज भुर्ता ही बना देंगे, ई साली एक तो बेटी जन-जन के वैसे हमरी जिंदगी नरक बना डाली है, ऊपर से हमका दारू पीने का पैसाे तक नहीं देती साली, सब छुपा के रखती है, बेटवा तो जन नहीं सक ऊपर से बोलती है, बिटियन का पढ़ाएगी, घर मे खाने को कुछो नहीं है, और बड़ी आई बिटियन का पढ़ाएगी, और उ पढ़ लिख के कौन सा तीर मार लेंगी, ज्यादा होशियार बना के साला कुछो ऊंच नीच हो गया तो मुह दिखाने के काबिल न रहेगी ई शांता, सीधा चूल्हा फुके और कौनों अच्छा सा मर्द देख के ब्याह करवाऊंगा, कह देते है, अगर अबकी बार बेटवा न जनी तो मार डालेंगे इसको भी और इसकी औलाद को भी, तीन बिटियन का तो बचा ली, आगे इसकी ख़ैर नहीं, कमलू लगातार माँ-बहन की गालियां बक रहा था शांता को।

""ताई एक दम से बौखला गयी, अरे तू अपन फूल सी बीटीयन को कोस रहा है, इनके पढ़ाने में तोहार इज्जत जा रही है और तू जो दिन-रात दारू पी के हुड़दंग मचा रहा उ मा तोहार इज्जत नहीं जात है, बड़ा मरद बना बैठा है तू,और जो तू ये अपन मेहरारू और बिटियन का दिन-रात माँ बहन का गाली बकत है, न तो सुन, अपन माँ का दूध पी के ही तू मरद बना है रे, इतनी ही मर्दानगी भरी है तेरे अंदर तो पाल अपन बिटियन का, साला दारू पी-पी के घर का सारा पैसा चांट जाता है,और फूल सी बिटियन का कुपोषण का शिकार बना डाला है।

""ताई की बाते सुनकर भी, मानो कमलू पर जूं तक नही रेंग रही थी।

""सुन शांता आज का कारनामा देख के तो पानी हमरे सर से बहुते ऊपर जा चुका है, अब हमका ही कुछो करना पड़ी।

""कमलू शराब केनशे में धुत्त लाल लाल आंखों से ताई को घूर रहा था, अब निकल बुढ़िया इहा से बहुतै बड़-बड़ कर ली, पहले अपन बिटिया के खबर तो ले, जिसको कुछ साल पहले पढ़ने भेजी थी शहर, उ कछू बन भी पाई की भाग भुग।

""अरे तुमका नहीं पता का, कमलू की लुगाई ने उसे टोकते हुए कहा।

ताई ने तुरंत शांता का हाथ पकड़ लिया, अरे छोड़ न शांता इस बेवड़े को का खबर गांव में आज तक हुआ का है, मैं कल आती हूँ, तू बस चिंता मत करना कल सुबह तक हम ई का निपटा देंगे।

""अगली सुबह, चल निकल बाहर, तुम्हरे ख़िलाफ़ FIR है प्रताड़ना और लुगाई को जान से मारने की कोशिश के खिलाफ।

""नहीं! नहीं साहेब हमने कुछो नहीं किया, हमका थाना न ले जाओ, हमरे बच्चे भूखे मर जायेंगे।

""चुप कर साले दारू पी के अपन लुगाई और बच्चों को मारता है,और साला नाटक कर रहा, चल थाने तुम्हरी सारी हेकड़ी निकालते है, पुलिस के डण्डे पड़ेंगे न तब तुम्हरी अक्ल ठिकाने आएगी।

""कमलू गिड़गिड़ाता रहा, पुलिस उसको पकड़ के ले जा रही थी, शांता भी आज चुप थी, कमलू के दिये सारे दर्द की टीस जो उठी थी उसके मन मे, और ताई ने उसका बोध करवा दिया था, की उसके साथ अन्याय हुआ है...

""उतने में ही एक बड़े पुलिस अफसर की गाड़ी वहा रुकी सारे पुलिस जो कमलु को पकड़े हुए थे, एकदम से चुप हो गए उस अफसर को सलामी देने के लिए।

""बड़ी ही रौबदार पुलिस अफ़सरनी उतरी गाड़ी से, चेहरे पे गजब का तेज था, अरे ई का जानवरों की तरह पकड़े हो इनका चलो हटो सब।

""साहेब की ऐसी फटकार सुनकर सारे थानेदार सकते में में आ गए।

""कानाफुसी होने लगी, ई मैडम को आज का हुआ है, बड़ी नरमी से पेश आ रही है, ई कमलू से।

""कमलू अफ़सरनी से गिड़गिड़ाते हुए बोला, हमका माफी दे दो मैडम जी, मगर हमका जेल न भेजो।

""तुम्हरी गलती अब माफी लायक न है चाचाजी, उ तो अब गुनाह बन चुका है।

""अफ़सरनी के मुह से अपने लिए चाचाजी शब्द सुनकर कमलू अचंभित हो गया।

""चाचाजी ????? कमलू ने अफ़सरनी से पूछा।

""उतने में उ ताई आ गयी, कमलू, ताई को घूर रहा था।

""मैडम जी ई ताई ने ही हमका फसाया है, झुठ बोल रही है साली बुढ़िया, ई सठिया गई है मैडमजी।

""उतने में ताई ने उस अफ़सरनी का माथा चूमा।

""ई नजारा देख के तो उ कमलू के होश ही उड़ गए।

"ई गटारन जइसन आंखों से का घूर रहा है कमलू, देख ये है हमरी बिटिया जिसको हम पढ़ाये लिखाये, ई न तो ई भागी किसी के साथ न ही हमरा मुँह काला की, उल्टा हमरा नाम रोशन करि है, तुम जइसन जाहिल गवार और घटिया सोच के मरद की वजह से ही, ई बिटियन का ई हाल हुआ है, बिटिया इसको कड़ी से कड़ी सजा दिलवाओ।

""कमलू अफसर बिटिया को अपलक देख रहा था, आंखों से लगातार आँसू बह रहे थे।

""चाचाजी कछु याद आया हम उ ही छुटकी है, जिसका तुम उ पेड़ से इमली तोड़ के देते थे, और याद है, उ मंगलू काका का दुकान का जलेबी, हमका कित्ता पसन्द था, कि तुम हमरे लिए रोज -रोज लाते थे, जब हमका इत्ता बिटियन जैस लाड़ किये, तो अपन फूल जइसन बिटियन के साथ अइसन बर्ताव काहे चाचा, देवी का रूप है सब और तुम अपन बिटियन और लुगाई का माँ बहन की गालियां बक रहे हो, लानत है तुम पर।

""कमलू बस सर झुकाये चुपचाप रो रहा था

""अरे ओ पांडे! तुरते ईहा आओ।

"जी! जी मैड़म थानेदार तुरंत हड़बड़ाते हुए आया।

""सुनो ई चाचा को तुरंते नशामुक्ति केंद्र में ले जाओ, और भर्ती करवा दो।

""ई का बिटिया इ दरिंदा का तुम अइसन ही छोड़ रही हो"' ताई ने गुस्सा होकर कहा।

""नहीं अम्मा ई चाचा को पहिले हम दारू नाम का जहर से छुड़ाने का एक कोशिश करेंगे, जो इनका हसती खेलती जिंदगी मा आगी लगा दिया है, और सजा तो इनका जरूर मिलेगी।

""कमलू दोनो हाथ जोड़े और आंखों में आंसू भरे अपनी लुगाई और बिटियन को बस देखे जा रहा था, शांता के आंखों में भी आंसू थे, लेकिन कमलु के जाने का दुख नहीं था, कमलू के सुधर जाने का एक आस था उ शांता की आंखों में।

""अब शायद कुछो भी कहने की जरूरत न थी, कमलू ने बस इतना ही कहा, शांता तुम अपना और हमरी तीनो बिटियन का खयाल रखना हम जल्दी वापस आएंगे,और अपना सारा फर्ज भी निभाएंगे और आज तक तुम सबका जितना भी दर्द दिए है न, उ सबका हिसाब भी देंगे।

""और कमलू फफक फफककर रो पड़ा।

""ताई के सामने भी कमलू हाथ जोड़ा और चला गया पुलिस वेन मे बैठकर।

""ताई ने गर्व से माथा चुम लिया अपनी बिटिया का।

""आज कमलू नशामुक्ति केंद्र में है, कमलू की तीनों बिटिया को अफ़सरनी बिटिया ने स्कूल में दाखिला करवा दिया है, और शांता भी काम मे लग गई है।

""आज भी हमारे देश में न जाने कितने कमलू जैसे दरिंदे भरे पड़े है जो दारु पीकर अपनी औरतो को प्रताड़ित करते है बेटा न पैदा करने पे, ये घटिया मानसिकता अभी भी १००% ख़त्म नहीं हुई है, कुछ प्रतिशत आज भी बचे हैं जो लड़कियों को सिर्फ चूल्हा फुकने, घर संभालने और बच्चे पैदा करने की मशीन समझते हैं, और इसे अपनी शान भी समझते हैं...!!!©

निशा रावल
बिलासपुर

#stopdomesticviolence

Image Source: youthkiawaaz



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