DOMESTIC VIOLENCE

शादी के बाद का बर्थडे

kavita   657 views   6 days ago

संतान द्वारा माता पिता को खुश रखने की चाह ....अर्थात बच्चे बड़े हो गए ...! प्रेम, विवशता, और उनके अनकहे दर्द को दर्शाती एक लघु कथा

नन्हा कदम

rajmati777   508 views   1 month ago

एक ऐसी महिला की कहानी जिसे अपनी सुहागरात में क्या क्या करना पड़ा।सास ने बहू का वर्जिनिटी टेस्ट करवा उसे सदमे में डाल दिया।

498A कितना सफल कितना असफल

swati21   93 views   1 month ago

IPC 498A The most misuse law. आज तक सरकार भी इस कानून को सही अर्थो में लागू नहीं करा पाई है।

घर का मामला

varsha   364 views   1 month ago

आज के समय में जब हम अपने आसपास कुछ भी गलत होता देखकर भी आंखें मोड़ लेते हैं तो हम कैसे अपने लिए संवेदनशीलता की उम्मीद रख सकते हैं।

और मैं मुक्त हो गयी

kavita   425 views   1 month ago

शोषण के विरुद्ध एक स्त्री के आत्मबल संजो कर विद्रोह करने की मार्मिक कथा

साढ़े तीन ऑंखें

dhirajjha123   307 views   2 months ago

एक कहानी मानवीय प्रेम की, एक कहानी एक आम औरत की, एक कहानी एक माँ की

घरेलू हिंसा

nis1985   31 views   2 months ago

आज भी हमारे देश में न जाने कितने कमलू जैसे दरिंदे भरे पड़े है जो दारु पीकर अपनी औरतो को प्रताड़ित करते है बेटा न पैदा करने पे, ये घटिया मानसिकता अभी भी १००% ख़त्म नहीं हुई है

कभी कभी लड़की वाले भी दहेज के दोषी होते हैं

nehabhardwaj123   216 views   3 months ago

ये कहानी है चड्ढा साहब की जिन्होंने लड़के वालों के न चाहते हुए भी अपनी बेटी की दहेज दिया, पर दूसरी बेटी की शादी करने के समय आर्थिक स्थिति तंग हो चुकी थी।

Defence

ashwanikumartiwari3   9 views   3 months ago

It's a story thats best savoured when unfolded without having any prior information about it.

लघुकथा- रिश्तों की नीलामी

rashmi   230 views   3 months ago

पैसों से खरीदकर बनाए गए रिश्तें और उन पर हुकुमियत की दास्तां

घरेलू हिंसा: एक संकीर्ण सोच

utkrishtshukla   690 views   4 months ago

........हमें महिलाओं के प्रति अपनी संकीर्ण सोच बदलनी होगी और बाहर निकलना होगा ऐसी रूढ़िवादी परम्पराओं से जो उन्हें सम्मान व बराबरी का दर्जा नहीं दे सकती हैं।..........

A stamped on Rose

misswordsmith   118 views   4 months ago

A small article where I have tried to picturise the scenario of a woman facing domestic violence in both physical and mental form.

Men: The Perpetrators (A Reality or a Mindset)

abhinav   80 views   5 months ago

Violence against men do breathe in our very society. Men are always contemplated as perpetrators and women as sufferer.But is it always so?

बेजुबान

udyalkarai   20 views   6 months ago

आज सवाल उठाने का मन में ख्याल है आया

I OBJECT

Rajeev Pundir   15 views   6 months ago

How shameful it is that we the men take our lovely and delicate better halves for granted and use and abuse them at our will !! This poem is inspired from a news of a boy who murdered his beloved brutally. We've to stand against this beastly mentality to stop violence against women.

YOUR HATEFUL SURVIVOR

aesha   233 views   6 months ago

A very short open letter to my ex abuser. You were a mistake I choose. But I have found peace away from you

नाम

sonikedia12   43 views   6 months ago

कभी कभी इंसान उन गलतियों का बोझ ढोता हैं जो उसने किया ही नहीं ।

Me and me and a war

variantme   20 views   7 months ago

In the agony of the days spent, she Crys.... She talks to her self and laments. She calls it a war. Yes! A WAR.

Finding solace in the most tragic way.

writerinmaking0   362 views   7 months ago

An attempt to modify the society through my thoughts that aim to question the dynamics of domestic violence. My main concern is to talk about how domestic violence works in a place we least expect it to.

गोपाल फ़िर से जी उठा stopdomesticviolence

hema   63 views   7 months ago

कभी कभी स्थितियाँ ऐसी हो जाती हैं कि कहानी के सभी पात्र किसी न किसी वजह से कमज़ोर और मजबूर दिखते हैं ..लेकिन नियति सबको एक मौका ज़रूर देती है अपनी भूल का प्रायश्चित करने का ... यह कहानी है उस घरेलू हिंसा की जिसकी जड़ है बेमेल विवाह...

सुलोचना....( सच्ची कहानी )

dhirajjha123   44 views   7 months ago

बदलाव का अधिकार हर किसी के पास है । पर इस अधिकार का पूरा फायदा उसी को मिलता है जिसमें लड़ने की ताकत है, जिसमे हक़ छीन लेने की हिम्मत है । जो लड़ सकता है अपनों के ख़िलाफ, जो चुनौती दे सकता है सनातन से चले आ रहे बेकार के रिवाज़ों को

अनकहा दर्द ।

chandrasingh   137 views   7 months ago

आखिर ये नयी सदी मे जी रहे लोगो की मानसिकता कब तक ये दहेज रूपी गुलामी की जंजीरों को झेलेगी इसे तोड़ना होगा और शुरुवात करनी होगी एक दहेज मानसिकता मुक्त समाज की । ताकि किसी तनिशा का फिर से अन्त न हो । अब हमे लड़ना हो, जागना होना नही तो अगली तनिशा हमारे घर से भी हो सकती है ।

श्रेणी- Story/Domestic Violence

sonikedia12   90 views   7 months ago

हाँ ये शब्द कई बार सुना । कई चोट और निशान भी देखे। पर उन चोटों और निशानों का क्या जो बड़े प्यार से दिए जाते हैं पर हम कई बार पहचान नहीं पाते और अंदर ही अंदर घुटते है एक जिंदा लाश की तरह जिसमें सिर्फ़ साँसे होती है पर खुद के लिए नहीं । इसमें गलती किसकी ये तय करना भी कठिन होता है ।

Journey of an oppressed- woman

jhalak   149 views   7 months ago

This poem is about the phases comes in life of an oppressed woman from her marriage to her pregnancy and to her equation of being free and make others to help in this...so please read it full...its also a story of a dear daughter