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@dawriter

मूक

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jhalak by  
jhalak

उस दिन मैं बहुत खुश थी, घर वालों ने मुझे मेरे मन का काम करने की अनुमति जो दे दी थी।अपनी पसंदीदा कपड़े पहन मैं ओडिशन के लिए थिएटर गयी।वहां कई लड़कियां और लड़के ओडिशन के लिए आए थे पर मैं सबसे अलग थी।थिएटर में पहुंचते ही मुझे एक लम्बी सी स्क्रीप्ट पकड़ा दि गयी, मैंने जल्दी से पूरी स्क्रिप्ट याद कर ली और स्टेज पर जाकर बहुत अच्छे से एक्टिंग करी लेकिन मुंह से एक शब्द भी नहीं कहा और कहती भी कैसे पैदायशी गूंगी जो थी......यह बात वहां बैठे हर व्यक्ति को समझ आ गई थी लेकिन मेरी अदाकारी को देख मुझे चुन लिया गया।मेरा चेहरा भी बहुत फोटोजिनिक था तो अब मुझे कई और विज्ञापन भी मिलने लगे...यह काम मेरे मन का भी था और इसमें अच्छे रुपए भी मिलते थे साथ ही अब सब लोग मुझे एक बेचारी गूंगी ना मान कर एक कलाकार मानते थे।मै और मेरा परिवार इस बात से बहुत खुश थे... लेकिन क्या मनुष्य की इच्छाएं कभी खत्म हुयीं हैं जो आज होंगी... मैंने एक बड़ी पिक्चर के ओडिशन का विज्ञापन देखा और मन में यह इच्छा आयी कि काश मैं भी बोल पाती ...तभी दिमाग में एक विचार आया कि क्यों ना एक बार उस गले के स्पेशलिस्ट से मिल लिया जाए। थियेटर और विज्ञापन से इतनी राशि तो इक्ट्ठी हो ही चुकी थीं।अगले दिन सुबह ही मैं स्पेशलिस्ट के पास अपोइनमैन्ट के समय पर पहुंच गयी और डाक्टर ने कहा कि एक ओपरेशन के द्वारा मैं बोल पाऊंगी...यह सुन मेरी खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा और मैं बहुत खुशी से जब हास्पिटल से बाहर निकल रही थी की अचानक सामने से आती एक लड़की से टकरा गयी... मैं उस लड़कीसे अपनी जुबान में माफी मांगने ही वाली थी कि उसने मुझसे गुस्से में कहा कि "अन्धी हो क्या? दिखाई नहीं देता? एक तो वैसे ही आज मैं लेट हो गयी हूं ऊपर से तुम जैसी गंवार मेरे रास्ते में आ रही है" और इतना कह कर वह मुझे एक तरफ धक्का दे वहां से चली गई।दिल तो कर रहा था कि उसे उसी की भाषा में जवाब दूं लेकिन आवाज ना होने के कारण मैं कुछ भी ना कह सकी और वहां से चली गई.... दो हफ्तों के बाद मेरा ओपरेशन होना था तो मैं तय दिन पर हास्पिटल पहुंच गयी। कुछ टेस्ट्स के लिए मुझे एक कमरे में लेकर जाया गया। उस कमरे की खिड़की से मैंने देखा कि एक लड़कीको स्ट्रैचर पर लिटाकर ओपरेशन थियेटर में ले जाया जा रहा था , थोड़ा ध्यान से देखने पर मुझे याद आया कि यह तो वही नकचडी लड़की है जो उस रोज मुझसे टकरायी थी। उसे देख मैं सोचने लगी कि"ना जाने क्या कराने आयी है?.... जरुर अपने होंठों या नाक की सर्जरी के लिए आयी होगी और क्या...उस लड़की के प्रति मेरी नफरत ने एक विकराल रुप ले लिया और मैंने मन में एक इच्छा मांगी कि "काश सारी सर्जरी गलत हो जाए और इसका पूरा चेहरा खराब हो जाए.." मुझे खुद को विश्वास नहीं था कि मैंने कुछ ऐसी इच्छा मांगी थी.... तभी नर्स मुझे ओपरेशन थियेटर में ले गयी और लगातार चार घंटे ओपरेशन के बाद जब मेरी आंखें खुली तो मैं बोल पा रही थी... मेरे जीवन का सबसे बड़ा सपना उस दिन सच हो गया था अब बस मुझे ओडिशन के लिए जाना था। कुछ दिन आराम करके जब मैं ओडिशन के लिए गयी तो वहां दो लोग बैठे थे ,एक बहुत बड़े डायरेक्टर और दूसरे हमारे शहर के कई थिएटर के मालिक । मैं स्टेज पर गयी और बहुत अच्छे से एक्टिंग करी (डायलाग के साथ ) लेकिन फिर भी उन्होंने मुझे नहीं चुना ... कारण पूछने पर उन्होंने कहा कि उनको मेरी आवाज पसंद नहीं आयी ........ लेकिन उस थियेटर के मालिक ने मुझे अपने थियेटर में डायरेक्टर का काम ओफर किया तो मैंने वह ओफर स्वीकार कर लिया...मेरा सपना अधूरा रहने के बाद भी मैं खुश थी... आज जब रोज कि तरह मैं थियेटर पहुंची कि एक लड़की वहां ओडिशन के लिए आयी ... मैंने उसे देखते ही पहचान लिया कि यह वही लड़की है जिससे उस रोज मैं टकरा गयी थीं..बात काफी पुरानी हो गयी थीं लेकिन मुझे याद थी.... स्टेज पर आकर उसने अपना ओडिशन दिया।बिना एक शब्द कहे उसने पूरी एक्टिंग कर दी और अंत मैं उसने मुझसे इशारे से पूछा कि क्या वह कल से आने लगे.... उसकी ऐसी हालत देख कर मैं उसकी हालत समझ गयी आखिर जीवन के २२ वर्ष मैंने भी बिना कुछ कहे बिताए थे.... मैंने गर्दन हिलाकर हां का इशारा किया और वह वहां से चली गई और मैं उसको देखती ही रह गयी कि तभी मैंने बैक स्टेज पर दो लड़कियों की बातें सुनी"देखो तो जरा , अपने आप को बड़ी एक्ट्रेस समझती थी और अब देखो जुबान से हाथ धो बैठी" दूसरी ने कहा "तुमने सुना? ये अपने टांसिलस का इलाज कराने गयी थी लेकिन सर्जरी गलत हो गयी और इसकी आवाज चली गयी........" ये सुन मुझे याद आया कि मैंने उस दिन भगवान से प्रार्थना करी थी कि काश इसकी सर्जरी गलत हो जाए और वास्तव में ऐसा हो गया...... आज मेरे कारण कोई और वह दुख झेल रहा था जो कभी मैंने सहा था.... जिस दिन मुझे आवाज मिली उसी दिन शायद मेरे कारण कोई और मूक हो गया था,उस समय मैं कुछ नया बोल सकी क्योंकि मैं मूक थी और आज आवाज होते हुए भी मूक हूं...... - झलक



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