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@dawriter

प्रेम

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प्रेम....तुम प्रेम करना चाहते हो मुझसे ??? तो ठीक है बोलो कर सकोगे तुम प्रेम मुझे अनंतकाल तक.... जब मुझे खुदसे ही प्रेम ना रहे...कर सकोगे इतना प्रेम की मन और यादों में जो गहरे गहरे घाव हैं जिंदगी के वो जख्म भर सकें...करोगे ना इतना प्रेम? जिस भरोसे के दम पर लोगो ने मेरे भरोसे को रौंदा है हज़ार दफा..उस भरोसे के दुबारा जन्म लेने तक प्रेम कर सकोगे मुझे?? कर सकोगे मुझसे प्रेम जब मैं आईने में खुद का अक्श तलाश करूंगी.. आँखों के नीचे एहसासों के मरने से पनपे काले घेरे चेहरे पर फैले हों... जब अश्क सूख चुके हो और आँखों में चंचलता की जगह सिर्फ और सिर्फ मायूसी दिखे करोगे इस चेहरे से प्रेम तब??? जब मैं किसी जिद्दी अड़ियल इंसान की तरह बार बार तुम्हे एक ही बात कहूंगी..तब सब्र रखकर प्रेम कर सकोगे मुझसे?कई बार जिन रिश्तो से मैंने प्रेम किया उन सबने छोड़ दिया मुझे एक मतलब के बाद..और तुम मुझे ना छोड़ो इसलिए 4 साल की बच्ची की तरह बहाने बनाउंगी तुमसे बात करने के...

बिना किसी बड़ी बात के रूठ जाउंगी तुमसे किसी बच्ची की तरह ताकि तुम मुझे मनाओ और मैं खुश हो जाऊं जरा सा किसी बच्ची की ही तरह ... कर पाओगे मेरे इस बचपने से प्यार बिना चिड़चिड़ाहट के।। फिर किसी दोस्त के चले जाने का डर मुझे खोखला करेगा...इसी डर की बौखलाहट में मैं तुमसे शायद झगड़ा करूंगी..बिना किसी गलती के इलज़ाम दूंगी तुम्हे ताकि तुम माफ़ी मांगो और दूर ना जाने का वादा करो... तब मेरी बौखलाहट को किनारे रख कर मेरे तुम्हारे प्रति प्रेम से प्रेम करोगे ना?? दोस्त की कमी है..किस्से बांटू हंसी..दर्द...किसके साथ यादें बनाऊं वो मस्ती की ..वो शैतानियों की ..वो रुठने की ..वो मनाने की ..वो नाचने की ...वो बेवजह हंसने की... बनोगे ना तुम वो दोस्त..जिस्की हर किसी को जरूरत होती है...बहुत भीड़ है पर मुझे प्रेम नही दोस्त चाहिए होगा....करोगे ना इतना प्रेम की मैं तुम्हारी दोस्त बन सकू?? और लड़कियों की तरह चंचलता नही है मुझमे बल्कि सिन्दूरी शाम सी ठहरी हुई हूँ...अपना सकोगे एक लड़की को बिना चंचलता के.... बोलो...कर सकोगे मुझसे प्रेम...

क्योंकि मैं साज श्रृंगार में नही लिपटी रह पाती..बिखरे बालों को समेट कर जूड़ा बना लेती हूँ वही बहुत है..हाँ माथे पर बिंदी हमेशा सजाए रखती हूँ.. आज की लड़कियों की तरह अदाएं और नखरे नहीं आते मुझे..हाँ पर हर हाल में मुस्कुराहट सहेजे रखने का हुनर है मुझमे वो मुस्कुराहट मेरी हो या किसी और की..बोलो.कर सकोगे इस सादेपन से प्रेम। कर सकोगे प्रेम जब मैं घण्टों खामोश बैठी आसमान निहारा करूंगी..और कभी तुमने नई जगह जाने की बात की और मैं इंकार कर दू..और उसके बदले तुमसे घर की छत पर बैठकर चांदनी की छांव में दुनिया जहान की बातें करूंगी...तब बिना नीरस हुए प्रेम कर सकोगे मुझे?.घर के हर कोने में कागज के टुकड़े बिखरे मिलेंगे तुम्हे..जिन्हें पढ़कर सहेज़ के रखने का जिम्मा तुम पर होगा....उठा पाओगे ये जिम्मेदारी बोलो? कभी कभी बात करने के लिए तुम्हारे ठीक सामने होते हुए भी तुम्हे खत लिखकर अपनी बाते करूंगी..कर सकोगे इन खतों से प्रेम.....बोलो करोगे ना मुझसे प्रेम मेरे बिखर जाने तक या मेरे संवर जाने तक।। करोगे ना मुझसे प्रेम जब प्रेम करने की कोई वजह नहीं होगी? क्या करोगे मुझसे इतना प्रेम कि मैं सिर्फ प्रेम का एहसास रख सकू दिल में... बोलो है साहस? मुझसे प्रेम करने का?

#निधि खामोशलफ़्ज़ोकाशोर



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