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@dawriter

एक पत्र मेरी "अपनी" के नाम

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मेरी प्रिय "अपनी",

अपनी अथार्त मेरी पत्नी, मेरी अर्धागिनी,मेरी हमसफर। आज मैं तुम्हें इस खत के जरिये अपनी भावनायें,तुम्हारे प्रति मेरा प्यार परवाह बताना चाहता हूं। तुम्हारी कुछ शिकायत भी दूर करना चाहता हूं। मानता हूं हम पति अपनी भावनाएं कभी बोलकर व्यक्त नहीं करते जो तुम पत्नियां कई तरह से बोलकर व्यक्त कर देती हो। मै तो लिखने में भी बहुत सोच रहा हूं तो बोलना तो अकल्पनीय है। मेरी हिंदी या शब्दो को लेकर हँसना या मजाक मत उड़ाना प्लीज। तो कहाँ से शुरू करू मैं, क्योंकि बहुत शिकायत है तुम्हें मुझसे जैसे अपना प्यार नही जताते, कोई काम मे हाथ नही बटाते,कही घुमाने नही ले जाते,कभी कोई गिफ्ट नही लाते, मेरी कोई परवाह नहीं करते, मेरी बात नही सुनते...वगैर वगैरह लिस्ट लंबी है बहुत। तो काम से शुरू करते हैं। तुम कहती हो हर रोज सारा दिन मै ही अकेले काम करती हूं तुम तो कुछ नही करते। हैं ना! तो बीवी जी हम भी कुछ काम करते हैं हां आपके जितना ना सही पर करते तो है। बस वो दिखाई नही देते जैसे- कभी -कभी मैं कहता हूँ आज सुबह मै चाय बनाऊँगा अपने स्टाइल से, तो वो मेरी परवाह ही तो होती है ताकि तुम्हें कभी -कभी सुबह अच्छे से देखने को मिले। वाशिंग मशीन में भी कपड़े डाल देता हूं डायर कर देता हूँ कभी कुछ बाहर सूखा भी देता हूँ वो बात अलग है कि मेरे सुखाने के तरीके तुम्हें पसंद नही आते। कभी अपनी  शर्ट लाने के बहाने सारे सूखे कपड़े उतार लाता हूँ। जब कामवाली बाई नही आती या तुम थकी हुई होती हो तो चाहे मेरा मन कुछ पकवान खाने का होता है तब भी कहता हूँ कि आज खिचड़ी या पुलाव बना लो ताकि जल्दी बन जाये और बर्तन भी ज्यादा ना हो। रात को अपने पांव तुम्हारे पैर पर रख देता हूँ पता है तुम्हारे पैर दर्द कर रहे होंगे। मेरा भी मन होता हैं 8-9 घन्टे आफिस में काम करने के बाद या सारा दिन फील्ड वर्क के बाद सीधा घर जाकर लेट जाऊ शांति से। लेकिन में आते वक्त दूध सब्जी या घर का सामान लेके आता हूँ। फिर घर आने पर कोई सामान बताना तुम भूल जाती हो तो वापस जाके लाता हूँ। फिर तुम्हारी तो कभी बच्चों की बातें भी सुनता हूँ। हां हु हम्म करता हूं क्योंकि थक गया होता हूँ। लेकिन मैं भी चाहता हूं तुम्हारे और बच्चों के साथ समय गुजारना तो अपनी थकावट भूल जाता हूं। फिर आता हैं संडे जो मैं चाहता हूं सारा दिन आराम करना और तुम सबके साथ समय बिताना लेकिन संडे को इतने काम होते हैं जैसे -गाड़ी साफ करना,कोई सामान बिगड़ गया है उसे ठीक करना या करवाने ले जाना, रद्दी बेचना, घर के सामान लाना, या किसी से मिलने जाना।

शाम को शॉपिंग के बहाने तुम सबको बाहर लेजाता हूँ खाना भी बाहर खाते क्योंकि बाकी हर दिन तुम ही तो बनाती हो। एक दिन तुम्हें भी आराम मिले। कभी मुझे ऑफिस से छुट्टी नही मिलती तो कभी तुम्हें। कभी बच्चों के एग्जाम तो कभी बीमारी, तो कभी बजट की वजह से कही दूर कुछ दिन के लिए नही जा पाते। लेकिन सारा दोष तुम मुझ पर मढ़ती हो कि मैं कभी कही नही ले जाता। तुम कहती हो कभी गिफ्ट नही लाता है अब यार तुम्हे कभी कोई मेरी लायी चीज़ पसंद आई है सबमे नुक्स निकाल देती हो। फूल लाता हूँ तो कहती हो क्यों लाये हो पैसे बर्बाद किये। चॉकलेट लाता हूँ तो कहती हो डाइट पर हूँ कोई चीज़ लाता हूँ तो या तो बहुत महंगी होती हैं या कलर पसंद नही आता। करू क्या मैं बताओ तुम।और भी छोटी बातें हैं क्या तुमने कभी गौर किया जैसे- मै गाड़ी धोने के साथ पूरा एरिया धो देता हूँ, पौधों को पानी दे देता हूँ, यहाँ -वहाँ का कचरा भी बाहर फेंक देता हूं। किचन से मेज तक खाने से भरे बर्तन रख देता हूँ वापस भी रख के जाता हूं। रात को कमरे में तुम्हारे आने से पहले बिस्तर सही कर देता हूँ,तकिया चादर अलमारी से निकाल देता हूँ। ऊपर छत में जाके पानी की टंकी चेक करके पानी भर देता हूँ। बोतल में भी पानी भर देता हूँ। तुम बीमार होती हो सच मानो मन करता हैं फोन करके एक बार पूछ लूँ। लेकिन फिर सोचता हूँ तुम आराम कर रही होगी या अभी ही सोई होगी इसलिए फोन नही करता। तुम ये मत समझना के ये सब बता के, लिख के मै कोई अहसान कर रहा हूँ। नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है मै तो बस ये एहसास दिलाना चाहता हूँ कि मै भी तुम्हारी बहुत परवाह करता हूँ। तुम्हारे हर काम मे हाथ बटाना चाहता हूं लेकिन क्या करूँ आता नहीं है ना तुम्हारे जैसे अच्छे से सब करना। लेकिन जो कर सकता हूं करता हूं ना जताता हूं ना कहता हूँ कभी। क्योंकि ये हमारा घर है तो हर काम भी हमारा होगा ना। बस मेरे किये काम दिखाई नही देते। जैसे तुम चाहती हो तुम्हारी ख्वाहिश है मेरी भी हैं। फर्क बस इतना है तुम कह देती हो रो देती हो मै कह नही पाता। लेकिन तुम्हें और बच्चों को खुश देखना चाहता हूं। और हाँ "मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं तुम्हारे बिना जी नही सकता"। ये पढ़ कर मत कहना के एक बार बोल कर दिखाओ क्योंकि ये मुझसे ना होगा।

                          तुम्हारा "अपना" 



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