127
Share




@dawriter

कजॆ तेजाब का

12 149       

कजॆ  तेजाब का

सुरज उस दिन भी निकला था, लेकिन उसकी जिंदगी में अंधेरा बनकर,

हवाएँ उस दिन भी चल रही थी, लेकिन उसके लिए तुफान बनकर,

हर रोज की तरह उस दिन भी बाजार जा रही थी वो, हसॅते  खेलते गीत गा रही थी वो,

बीच सड़क में बाईक रोक कर,कुछ लोग उस पर तेजाब फेंक देते है, न जाने कैसे वह लोग अपने आप को मदॆ कह लेते है,

वह चीख रही थी चिल्ला रही थी, लेकिन कोई उसकी मदद नही कर रहा था, क्योंकि कोई उसे अपना नही समझ रहा था,

उसके चेहरे से इस कदर निकल रही थी उसकी चमड़ी , जैसे वह लड़की नही रेत से बनी मूतिॅ हो, 

भरे बाजार तड़प रही थी वो, 

लेकिन कोई उसे बचा नहीं  रहा था, हर कोई विडियो बना रहा था,लेकिन कोई उसे अस्पताल नही लेजा रहा था,

जब अस्पताल पहुची तो डॉक्टर ने भतीॅ करने से मना कर दिया, पुलिस केस का कहकर जले शरीर को बेहाल छोड़ दिया,

जैसे तैसे उसका ईलाज हुआ, 

बच तो वो गई थी, उसकी साँसे भी चल रही थी, लेकिन अंदर ही अंदर वह घुट रही थी, 

धँस चुकी थी उसकी आँखे अंदर, चेहरे पर फफोले भी पड़ने लगे थे, यह तो सिर्फ बाहरी घाव थे, उसके तो अपने भी उससे दूर रहने लगे थे,

जो लोग कभी जिस चेहरे के साथ सेल्फी खिचाते थे, अब उसी चेहरे से डरते थे , जिस चेहरे को वो सजाया करती थी, अब उसी को आईने में देखकर घबरा जाया करती थी वो, 

जब किया उसने केस दर्ज उन जालिमो के खिलाफ,तो अदालत मे सबूत कम पर गये, शायद उस दिन उसके चेहरे पर तेजाब के छीटे कम पर गये,

जैसे तैसे उसने सबूत इकट्ठा किए,चार साल बीत गए,हर वक्त अदालत में बस एक सवाल गुजँता था,क्या हुआ, कब हुआ,कैसे हुआ, यह सवाल नही थे,यह वह लफ्ज थे,जो उसके घाव को रोज ताजा कर देते थे, 

उन जालिमो को सजा भी मिली तो सिर्फ दो साल की, क्या किसी की जिंदगी तबाह करने के लिए सिर्फ दो साल कि सजा बहोत है,

उस दिन तो सिर्फ उसका शरीर जला था, पर अदालत का फैसला सुन उसकी रूह भी जल गई थी, 

क्या क़सूर था उस लड़की का सिफॆ इतना कि उस लड़के को मना कर दिया था, 

क्यो किसी कि जिंदगी बर्बाद करने की बोतल किसी दुकान पर आसानी से मिल जाती है, क्यो वहा खड़े लोग पत्थर की मूर्ति बनकर तमाशा देखते है, क्यो वह किसी लड़की को अपना नही समझते है,

क्यो ना हो एक ऐसा कानून, जिसमे तेजाब का कजॆ तेजाब से उतरे,आखिर उन जालिमो को भी पता चले क्या होता है जब रूह जलती है, क्या होता है जब रातो की निंद उड़ती है, 

जो घाव दवा से भी नही भरेंगे, वह भी तो पहचाने उसका ददॆ क्या होता है, 

यह कहानी सिर्फ इंकार से शुरु नही होती कभी,दहेज के लिए, तो कभी बदले की आस में फिर से दोहराई जाती है, 

अगर रोकना है तेजाबी हमले, तो कजॆ तेजाब का कानून बनाना होगा,

अगर फिर कभी किसी जालिम ने तेजाबी हमले का सोचा, तो वह उसका अंजाम जान लेंगे और अपने कदम अपने आप पीछे हटा लेंगे,

अगर ला दिया हमने अपने देश की हवाॅओ में कजॆ तेजाब का कानून,

तो फिर कभी किसी लड़की की जिंदगी बर्बाद नहीं होगी,

और भारत देश में हर लड़की खुशहाल रहेगी 

#stopacidattack



Vote Add to library

COMMENT