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@dawriter

इश्क़ रूहानी है,एसिड से नहीं जलता साहब!!!

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इश्क़ किये हैं क्या कभी किसी से? अरे नहीं यार,वो बचपन वाला नहीं, शिद्दत वाला पूछ रहे हैं। मने, किसी को कभी इतना चाहें हैं क्या कि इस हिसाब किताब की दुनिया से मीलों दूर बेहिसाब सा इश्क़ हो?जब आपको ये फ़र्क दिखना ही बन्द हो जाए कि वो और आप अब दो नहीं एक ही हो?कि बस उनकी एक मुस्कान पर तुम बैकुंठ के दर्शन पा लो, कि उसके हर एक सपने के साथ तुम अपने पंख लगा दो, कि उसकी हर एक कमज़ोरी को तुम ढक लो?कि उसके हर एक आँसू को तुम मुट्ठी में कैद कर लो?

इतने सवाल हैं हमारे ज़हन में और ये भी जानते हैं कि जवाब एक ही होगा सभी का। कहेंगे कि कलयुग है देवी जी, ऐसा प्यार अब कहाँ मिलेगा? जी,इश्क़ की दौड़ में लोग आजकल भाग तो लेते हैं मगर मन्ज़िल तक पहुँचते बहुत कम हैं। अब वो बात नहीं रही रिश्ते बनाने और निभाने में। अब वो हीर-राँझा, लैला-मजनू नहीं रहे जो एक दूसरे के लिए जान देने को तैयार हो जाएँ। अब तो साहब,दौर चला है जान लेने का, आबरू से खेल जाने का, अस्तित्व पर वार करने का।

हाँ,सच ही तो कह रहे हैं हम। आजकल कितना आसान होता है ना, इश्क़ में किसी के इनकार को उसकी ही मौत का कारण बना देना? कितना आसान होता है न पड़ोस में रहने वाली पूजा का रोज़ पीछा करना और फिर एक दिन समय देख कर दिल खोल कर उनसे प्यार का इज़हार करना,जो जवाब "ना" हुआ तो अगले ही दिन उनपर "एसिड अटैक" कर देना। मने, मानव प्रवृत्ति कितनी ही गिर सकती है इसका अंदाज़ा लग जाता है इसी बात से कि इंसान किसी की एक "ना" के चलते किस हद तक गुज़र सकता है।

ये इश्क़ नहीं है जनाब!!!किसी पर एसिड फेंक देना। कैसा इश्क़ है ये?हम भी इश्क़ में हैं लेकिन हमारे वजह से उन्हें ज़रा भी तकलीफ़ हो तो हम खुद को सौ बार कोसते हैं कि कैसे हमसे ये भूल हो गयी। किसी के तन की ख़ूबसूरती तो तुम छीन लोगे मगर मन की सुंदरता को किस एसिड से जलाओगे?मन की सुंदरता और पवित्रता को किस तरह मैला करोगे?आंतरिक सुंदरता को छीन लोगे क्या?

लोगो के मन में आजकल इस तरह की भावना है कि अगर मेरी ना हुई तो किसी और की भी ना हो। लेकिन सुनो, एक बात कहेंगे। तुम चाहे उसपर एसिड फेंक कर उनकी सुंदरता ही क्यों ना छीन लो मगर आज भी कोई होगा जो उनक हाथ थामेगा, जो उनके मन को देखेगा और उन्हें वो प्यार देगा जो तुम देने का कभी दावा करते थे।

कुछ दिन पहले ही ठाणे के रवि शंकर ने अपनी प्रेमिका ललिता से शादी की जिनपर कभी एसिड फेंका गया था। जिनको उन्हीं के भाई ने अपने गुस्से का शिकार बनाया था।
ये शादी सबूत है इस बात का कि इश्क़ महज़ तन का नहीं बल्कि मन का मोहताज होता है। जिस लड़की को तुमने जला दिया, उस लड़की का हाथ किसी ने थाम लिया। तुमने उसके चहरे को तो जला दिया मगर उसके हौसलों को छू तक नहीं सके। तुमने उसे समाज में सर झुकाकर चलने को मजबूर किया, और वहीं एक तरफ़ किसी ने उसका हाथ थाम उसे हिम्मत से दुनिया का सामना करना सिखाया। ये तमाचा है उन सभी के मुँह पर जिन्हें लगता है कि किसी पर एसिड फेंक कर वो उसके अस्तित्व को मिटा सकते हैं। ये भूल है तुम्हारी जो तुम्हें लगता है कि तुम्हारे गिरा देने से वो फ़िर से उठ खड़ी नहीं होगी। ये नीचता है तुम्हारी जो तुम मुहोब्बत में बदले की भावना रखते हो। ये पागलपन है तुम्हारा जो तुम्हें इंसान से हैवान बना देता है।

मुहोब्बत की दो तस्वीरें हैं और दोनों ही एकदम अलग हैं। एक तरफ़ कोई मुहोब्बत का नाम देकर किसी को तबाह कर देता है और वहीं दूसरी और कोई किसी का हमसफ़र बन उसे ज़िन्दगी जीना सिखाता है। हम भी लड़की हैं,समझ सकते हैं कि रूप और सुंदरता किसी भी लड़की के लिए कितना महत्व रखते हैं। ज़रा सा भी कभी हमे कहीं जल जाए तो सारा घर आसमान पर उठा लेते हैं लेकिन जो लड़कियाँ इस दर्द को झेल जाती हैं और फ़िर भी पहले से भी ज़्यादा बुलन्द होकर समाज में खड़ी होती हैं,उन लड़कियों को हम सलाम करते हैं। आजकल अंदरुनी सुंदरता अभाव में है साहब, जो किसी में कभी दिखे तो बस थाम लीजिये उसका हाथ। जैसे रवि ने थामा ललिता का। तभी हिसाब-किताब की इस दुनिया में बेहिसाब सा इश्क़ होगा। बेमतलब सी मुहोब्बत होगी। उस शख्स को भी हमारा सलाम जिन्होंने उस लड़की को अपना जीवनसाथी बनाया। दुनिया के तंज तानों को नज़रअंदाज़ कर बस अपने दिल की सुनी और नई मिसाल कायम की। ये प्यार ऐसा ही होता है, जब शिद्दत वाला होता है ना तो किसी की आत्मा से होता है। शक्ल, रूप-रंग तो केवल उस आत्मा के नकाब हैं। कभी कीजिये किसी को बेकनाब इस तरह भी कि बस अंतर्मन से मुहोब्बत हो।
जैसे हमें है उनसे।
जैसे रवि को है ललिता से।
जैसे फ़िर शायद किसी और रवि को हो किसी और ललिता से...

 ~विशाखा शर्मा 

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