Pallavi Vinod

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अलगाव का दर्द

कभी जिससे बहुत प्यार किया जिसके लिए सब कुछ छोड़ दिया अगर वही जीवन के सफर में अकेला छोड़ दे तो कोई कैसे जिये ।

पुनर्जीवन

18 साल तक वैधव्य का दर्द सहने के बाद जीवन को पुनः जीने का सफर है पुनर्जीवन।

बेटे का दर्द

अक्सर हम शादी के बाद बेटियों के जीवन मे आने वाले परिवर्तन और तकलीफ की बाद करते हैं,लेकिन बेटे के जीवन के बदलाव से मुख मोड़ लेते हैं।

मिल के भी हम न मिले

कभी-कभी कुछ प्रेम कहानियाँ बनती ही हैं न पूरी होने के लिए।एक मीठी सी कसक कभी न भूलने वाले अहसासों से भरी अधूरी प्रेम कहानियाँ भी जीवन में रास घोल देती हैं।

दर्द

हर लड़की के अपनी शादी को लेकर कुछ सपने होते हैं,लेकिन जब वो सपने टूटते हैं तो उनकी चुभन जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द बन जाती हैं।

तू धूप है छम्म से बिखर

अपनी जवान होती बेटी को आधुनिकता के भटकाव से एक माँ ही निकाल सकती है।

सॉरी माँ

कभी कभी छोटी छोटी गलतफहमियां रिश्तों में दूरियाँ ले आती हैं,जिंदगी की मिठास इसकी खूबसूरती प्रेम और अपनेपन में है। हमारी थोड़ी सी समझदारी से रिश्तों के बीच आयी दरार भर जाती है।

कैसे मुझे तुम मिल गए

पहला प्रेम जीवन में आलौकिक सुख की अनुभूति लाता है,किसी की मुस्कान दिल में तरंगें पैदा कर देती है,किसी की आंखों के सम्मोहन में हम इस कदर डूब जाते हैं कि फिर उसे भूल पाना बहुत मुश्किल हो जाता है।

"काश वो दोनों मिल जाते"

हर प्रेम मुकम्मल हो ये जरूरी तो नहीं,कुछ अधूरी प्रेम कहानियां अक्सर "काश"पर खत्म हो जाती हैं।

अगले जनम मोहे बिटिया ही दीजो

ये कहानी है संयोगिता की, जिसका जन्म घर की तीसरी बेटी के रूप में हुआ,जो जीवन भर तरसती रही पापा के प्यार के लिए, उसके लिए उसके पापा की खुशी से बढ़कर कुछ भी नहीं था।

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