Kumar Gourav

Kumar Gourav
Verified Profile

This is a verified account of top writer.

0

Most recent posts

अंतिम इच्छा

अंतिम इच्छा सन 2050 की बात है तब भूकंप की घंटे भर अग्रिम सूचना देने वाला यंत्र अस्तित्व में आ चुका था । उसकी मदद से अट्टालिकाओं से भरे शहर को सूचित किया गया आज दो बजकर दस मिनट पर ऐसा भीषण भूकंप आएगा कि पूरा शहर धूल में मिल जाएगा ।

चीनी

चीनी फज्र की नमाज के बाद खाँ साहब गणेशी के चाय की थड़ी पर अखबार पढ़ने बैठ गये। अभी भट्टी गरम होने में कुछ समय था ग्राहक इंतजार से ऊब चले न जाएं इसलिए गणेशी ने टीवी ऑन कर दिया। समाचार आ रहे थे जवानों से भरी बस में हुआ विस्फोट।

राम मिलाये जोड़ी

रमेश कभी स्कूल नहीं गया। गाँव में स्कूल था ही नहीं। जितना पढ़ना लिखना सीखा सब सिनेमा के पोस्टर से। रखवाला, सौदागर, मरते दमतक सबके डायलॉग रटे हुए थे। एक अंग्रेजी सिनेमा भी देख रखा था 'हू एम आई' हीरो भले चाइनीज था लेकिन सिनेमा खूब चला था।

परवरिश

उसने हामिद की ठुड्ढी पकड़ कर पुचकारा " खा ले बेटा। देख न कितना काम है सबको कल ही सिल के देना है । " उसने पैर पटका "परसों सिल के दोगी तो क्या होगा ? " "नहीं बेटा पंद्रह अगस्त तो कल है न। झंडा तो कल ही फहरेगा सबका। "

रामरस

गरीब के पेट पर लात पड़ती है तो सांप की तरफ फुंफकारता है गजोधर भी फुंफकारे। लेकिन ढ़ोरबा सांप से कौन डरता है । कुछ ही देर में कुचाकर चोखा बन गए ।

कप्तान/कोच

कुछ ही समय बाद वो फिर से मैदान पर था अबकि बार कोच की भूमिका में।

टूटे रिश्ते

कुछ लोगों की आदत होती है अक्सर टूटी हुई चीज़ों को ढोते जाते हैं। कुछ लोग उससे दूर भागते हैं

रोटी पानी

सुबह सुबह गेट खटखटाने की आवाज से नींद खुली। देखा तो एक सात आठ साल का बच्चा था । "भैया रोटी दे दो "

नशा

नहीं और नहीं पीना और हम तो कहेंगे तुम भी मत पियो , शराब कोई बढ़िया चीज थोड़े है ।

ललक

नाक सिकोड़ते हुए बोली "ठीक है कल से कापी पेंसिल लेकर आ जाना। " बड़े ने प्रतिवाद किया "उसमें बहुत खर्चा है ऐसे ही आप जो बोर्ड पर लिखेंगी वही पढ़ लेगा। ज्यादा नहीं पढ़ना है हिसाब बाड़ी लायक पढ़ जाए बस। "

व्यापार वर्धक यंत्र

इस बरसात में लकड़ियों के खरीदार मिल रहे हैं । पहले तो मुझे लग रहा था श्मशानघाट पर दुकान खोलकर गलती कर दी। लेकिन भला हो उन पंडितजी का अब तो धंधा चौचक हो रहा है पिछले दो घंटे में बारिश के बावजूद लोग घाट की दुकानें छोड़कर मेरे पास आ रहे हैं । "

क्रियाकर्म

एकमुश्त इतनी मौतें प्रशासन की परेशानी की वजह न बन जाए इसलिए रातों रात उन्हें बोरी में भर प्रशासन ने स्टीमर से दूसरी तरफ चोरगांव में फिंकवा दिया और वहाँ के मुखिया को कुछ पैसे देते हुए कहा इन लाशों को चुपचाप ठिकाने लगा दो और मुँह खोला तो गाँव में कोई न बचेगा ।

Some info about Kumar Gourav

  • Male
  • 01/03/89

EDIT PROFILE
E-mail
FullName
PHONE
BIRTHDAY
GENDER
INTERESTED IN
ABOUT ME